
श्रीगंगानगर/सूरतगढ़: राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर का महत्वपूर्ण उपखंड सूरतगढ़ एक बार फिर अपनी पुरानी और लंबित मांग को लेकर सुर्खियों में है। आज 27 फरवरी, 2026 को ‘सूरतगढ़ जिला बनाओ अभियान समिति’ के नेतृत्व में स्थानीय निवासियों, व्यापारियों और युवाओं ने एकजुट होकर एक विशाल प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन ने एक बार फिर राज्य सरकार का ध्यान इस ओर खींचा है कि सूरतगढ़ को स्वतंत्र जिला घोषित करना अब केवल एक मांग नहीं, बल्कि क्षेत्रीय आवश्यकता बन चुकी है।
प्रदर्शन का स्वरूप और जन-भागीदारी
आज सुबह से ही सूरतगढ़ के मुख्य बाजारों से होते हुए लोग उपखंड कार्यालय की ओर कूच करने लगे। प्रदर्शनकारियों के हाथों में बैनर और तख्तियां थीं, जिन पर “हमारा हक, हमारा जिला – सूरतगढ़” जैसे नारे लिखे थे। इस आंदोलन की खास बात यह रही कि इसमें राजनीति से ऊपर उठकर सभी दलों के स्थानीय नेताओं, नागरिक समाज के प्रतिनिधियों और छात्र संगठनों ने हिस्सा लिया।
समिति के पदाधिकारियों ने संबोधन के दौरान स्पष्ट किया कि पिछले कई दशकों से सूरतगढ़ अपनी उपेक्षा झेल रहा है। ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री को संदेश भेजा गया कि यदि इस बार बजट या आगामी घोषणाओं में सूरतगढ़ का नाम नहीं आता है, तो यह आंदोलन उग्र रूप ले सकता है।
क्यों उठ रही है जिला बनाने की मांग? (प्रमुख तर्क)
समिति ने अपनी मांग के समर्थन में मुख्य रूप से तीन बड़े कारण प्रस्तुत किए हैं:
-
भौगोलिक विशालता: श्रीगंगानगर जिला मुख्यालय से सूरतगढ़ की दूरी काफी अधिक है। दूर-दराज के गांवों के निवासियों को छोटे-छोटे प्रशासनिक कार्यों के लिए 70 से 100 किलोमीटर का सफर तय कर जिला मुख्यालय जाना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है।
-
सामरिक और औद्योगिक महत्व: सूरतगढ़ में एशिया का सबसे बड़ा केंद्रीय राज्य फार्म स्थित है। साथ ही, यहाँ सूरतगढ़ सुपर थर्मल पावर स्टेशन और एक महत्वपूर्ण सैन्य छावनी (Air Force & Army Base) है। सामरिक दृष्टिकोण से पाकिस्तान सीमा के नजदीक होने के कारण यहाँ एक सुदृढ़ प्रशासनिक ढांचे (District Administration) की आवश्यकता है।
-
विकास की गति: प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि जिला बनने से यहाँ के बुनियादी ढांचे, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव आएगा। वर्तमान में उपखंड स्तर पर मिलने वाला बजट यहाँ की जनसंख्या और क्षेत्रफल के लिहाज से ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।
सरकार की दुविधा और पूर्ववर्ती घोषणाएं
उल्लेखनीय है कि राजस्थान में पिछले कुछ वर्षों में कई नए जिले बनाए गए हैं। उस समय भी सूरतगढ़ का नाम चर्चा में था, लेकिन अंतिम सूची में इसे स्थान नहीं मिल सका। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर गहरा असंतोष है कि उनसे कम जनसंख्या और छोटे क्षेत्रफल वाले क्षेत्रों को जिला घोषित कर दिया गया, जबकि सूरतगढ़ की पात्रता हर मानक पर खरी उतरती है।
अभियान समिति की आगामी रणनीति
अभियान समिति के संयोजक ने बताया कि आज का प्रदर्शन तो केवल एक “चेतावनी” मात्र है। उन्होंने कहा:
“सूरतगढ़ की जनता अब आश्वासनों से थक चुकी है। हमने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी है। यदि सरकार ने जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो हम राष्ट्रीय राजमार्ग जाम करने और क्रमिक अनशन जैसे कड़े कदम उठाने पर मजबूर होंगे।”
निष्कर्ष
सूरतगढ़ को जिला बनाने की मांग का यह पुनरुत्थान स्थानीय राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है। यह मुद्दा न केवल प्रशासनिक सुगमता से जुड़ा है, बल्कि यह क्षेत्र के आत्मसम्मान और भविष्य के विकास की नींव भी है। अब गेंद राज्य सरकार के पाले में है कि वह इस सीमावर्ती क्षेत्र की भावनाओं को कितनी गंभीरता से लेती है।