
1. रात के अंधेरे में ड्रोन की आहट और ऑपरेशन
4 जनवरी 2026 की रात को सीमा के करीब स्थित एक गांव में BSF के सतर्क जवानों ने पाकिस्तान की ओर से आने वाले एक ड्रोन की भनभनाहट सुनी। तुरंत कार्रवाई करते हुए जवानों ने इलाके की घेराबंदी की और पुलिस को सूचित किया। घने कोहरे (जिसका फायदा तस्कर उठाना चाहते थे) के बावजूद, तकनीकी सर्विलांस की मदद से उस स्थान को चिन्हित किया गया जहां ड्रोन ने पैकेट गिराए थे। तलाशी अभियान के दौरान उच्च गुणवत्ता वाली हेरोइन के कई पैकेट बरामद हुए, जिनका अंतरराष्ट्रीय बाजार में मूल्य लगभग 20 करोड़ रुपये आंका जा रहा है।
2. स्थानीय तस्करों की गिरफ्तारी और मॉडस ऑपरेंडी
पुलिस ने इस मामले में दो स्थानीय युवकों को गिरफ्तार किया है, जो सीमा के पास सफेद रंग की एक कार में पैकेट रिसीव करने का इंतजार कर रहे थे। तस्करों ने पूछताछ में बताया कि वे सीमा पार बैठे अपने आकाओं के साथ एन्क्रिप्टेड ऐप्स (जैसे टेलीग्राम या सिग्नल) के जरिए जुड़े हुए थे। ड्रोन के जरिए नशा गिराने की इस तकनीक को ‘ड्रॉप एंड रन’ कहा जाता है, जिसमें तस्कर कुछ ही मिनटों में खेप उठाकर गायब हो जाते हैं।
3. सुरक्षा बलों की बढ़ती सतर्कता
इस घटना के बाद श्रीगंगानगर सेक्टर में सुरक्षा व्यवस्था को ‘हाई अलर्ट’ पर रखा गया है।
-
एंटी-ड्रोन सिस्टम: संवेदनशील इलाकों में एंटी-ड्रोन तकनीक और जैमर्स तैनात किए जा रहे हैं।
-
संयुक्त गश्ती: BSF और राजस्थान पुलिस अब सीमावर्ती गांवों में रात के समय संयुक्त गश्त (Joint Patrolling) बढ़ा रही है।
-
ग्रामीण इंटेलिजेंस: ‘विलेज डिफेंस कमेटियों’ को सक्रिय किया गया है ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत मिल सके।
तस्करी पर कार्रवाई: एक सांख्यिकीय नजरिया
| विवरण | आंकड़े / जानकारी |
| बरामद हेरोइन का मूल्य | ₹20 करोड़ (लगभग) |
| पकड़े गए आरोपी | 02 (स्थानीय नेटवर्क से जुड़े) |
| उपयोग की गई तकनीक | हाई-टेक ड्रोन (GPS आधारित) |
| प्रमुख प्रभावित क्षेत्र | गजसिंहपुर, करणपुर और अनूपगढ़ बॉर्डर |
नशे के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति
श्रीगंगानगर पुलिस अधीक्षक (SP) ने स्पष्ट किया है कि पुलिस अब केवल माल पकड़ने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इन तस्करों की संपत्तियों को भी कुर्क (Seize) करने की प्रक्रिया शुरू करेगी। गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ में कई चौंकाने वाले नाम सामने आए हैं, जो पंजाब और हरियाणा तक फैले नशे के व्यापार को नियंत्रित कर रहे हैं। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य इस “सप्लाई चेन” को पूरी तरह से तोड़ना है ताकि सीमावर्ती जिलों के युवाओं को इस दलदल से बचाया जा सके।
चुनौतियां और भविष्य की रणनीति
सर्दियों का घना कोहरा तस्करों के लिए एक ढाल का काम करता है। सुरक्षा बलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बिना किसी थर्मल विजुअल के छोटे ड्रोनों को ट्रैक करना है। भविष्य में, सीमा पर और अधिक CCTV कैमरे और सेंसर आधारित फेंसिंग लगाने की योजना पर काम चल रहा है।
महत्वपूर्ण नोट: पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि यदि उन्हें रात के समय किसी ड्रोन की आवाज सुनाई दे या खेतों में कोई संदिग्ध व्यक्ति दिखाई दे, तो तुरंत 100 या स्थानीय थाने को सूचित करें।