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सीमावर्ती क्षेत्रों में पुलिस का ‘हाई अलर्ट’: चोरी की बढ़ती वारदातों और साइबर ठगी के विरुद्ध श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ पुलिस की संयुक्त घेराबंदी

श्रीगंगानगर/हनुमानगढ़। राजस्थान के उत्तरी सीमावर्ती जिलों, श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ में पिछले कुछ दिनों से आपराधिक गतिविधियों में आई तेजी ने पुलिस प्रशासन को पूरी तरह सतर्क कर दिया है। विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में बढ़ती चोरी की घटनाओं और डिजिटल माध्यमों से हो रही साइबर ठगी ने पुलिस के सामने दोहरी चुनौती पेश की है। आज, 12 अप्रैल 2026 को प्राप्त जानकारी के अनुसार, दोनों जिलों की पुलिस ने आपसी समन्वय बढ़ाते हुए सीमावर्ती गांवों में गश्त और सुरक्षा व्यवस्था को पहले से कहीं अधिक चाक-चौबंद कर दिया है।

अनूपशहर की घटना ने बढ़ाई चिंता

सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा करने का तात्कालिक कारण पड़ोसी जिले हनुमानगढ़ के अनूपशहर में हुई एक बड़ी चोरी की वारदात है। सूत्रों के अनुसार, बेखौफ चोरों ने एक सूने मकान को निशाना बनाकर भारी मात्रा में जेवरात और नकदी पर हाथ साफ कर दिया। इस घटना के तार अंतर-राज्यीय गिरोह से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है। चूंकि अनूपशहर की सीमा श्रीगंगानगर के ग्रामीण इलाकों से सटती है, इसलिए श्रीगंगानगर पुलिस को अंदेशा है कि अपराधी पुलिस को चकमा देने के लिए जिले की सीमाएं पार कर सकते हैं।

श्रीगंगानगर पुलिस की ‘नाकाबंदी’ और रात्रि गश्त

अनूपशहर की घटना के तुरंत बाद श्रीगंगानगर के पुलिस अधीक्षक ने सीमावर्ती थाना क्षेत्रों के प्रभारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं।

  • चेक-पोस्ट की सक्रियता: जिले के प्रवेश द्वारों और मुख्य ग्रामीण सड़कों पर अस्थायी चेक-पोस्ट बनाए गए हैं। रात के समय गुजरने वाले हर संदिग्ध वाहन की गहन तलाशी ली जा रही है।

  • ग्रामीण गश्त: पुलिस ने ‘विलेज गार्ड्स’ और स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से ‘ठीकरी पहरा’ (ग्रामीणों द्वारा बारी-बारी से पहरेदारी) को पुनर्जीवित करने का प्रयास शुरू किया है। पुलिस की पीसीआर वैन अब मुख्य सड़कों के साथ-साथ लिंक रोड्स पर भी सक्रिय नजर आ रही हैं।

साइबर ठगी: एक अदृश्य दुश्मन के खिलाफ जंग

चोरी की भौतिक घटनाओं के अलावा, श्रीगंगानगर में साइबर अपराधियों का जाल भी तेजी से फैल रहा है। हाल ही में स्थानीय स्तर पर कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें लोगों को बिजली बिल अपडेट करने, बैंक केवाईसी (KYC) या लॉटरी के नाम पर ठगा गया है।

  • विशेष जांच दल (SIT): पुलिस ने साइबर ठगी के इन बड़े नेटवर्कों को तोड़ने के लिए एक विशेष जांच दल का गठन किया है। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि इन ठगों के तार देश के अन्य राज्यों (जैसे झारखंड और पश्चिम बंगाल) के साइबर अपराधियों से जुड़े हो सकते हैं।

  • जागरूकता अभियान: पुलिस सोशल मीडिया और स्थानीय समाचार पत्रों के माध्यम से नागरिकों को जागरूक कर रही है कि वे किसी भी अज्ञात लिंक पर क्लिक न करें और न ही अपना ओटीपी (OTP) साझा करें।

अंतर-जिला समन्वय और ‘क्राइम मीटिंग’

अपराधियों पर लगाम कसने के लिए श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ पुलिस के उच्च अधिकारियों के बीच एक समन्वय बैठक भी आयोजित की गई है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य अपराधियों का एक साझा डेटाबेस तैयार करना है। यदि कोई अपराधी एक जिले में वारदात कर दूसरे जिले में शरण लेता है, तो उसकी सूचना तत्काल साझा की जाएगी। पुलिस का मानना है कि इस ‘रियल-टाइम’ सूचना तंत्र से अपराधियों के भागने के रास्ते बंद हो जाएंगे।

जनता से पुलिस की अपील

पुलिस प्रशासन ने सीमावर्ती गांवों के निवासियों से अपील की है कि वे सतर्क रहें। यदि उनके मोहल्ले या गांव में कोई भी संदिग्ध व्यक्ति फेरी लगाने वाला या अजनबी घूमता दिखाई दे, तो तुरंत इसकी सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को दें। साथ ही, घर से बाहर जाते समय सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने और सीसीटीवी कैमरे लगवाने की भी सलाह दी गई है।

निष्कर्ष

सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति व्यवस्था बनाए रखना पुलिस के लिए हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है। हालांकि, अनुपशहर की चोरी और बढ़ते साइबर अपराधों के बाद जिस तरह से श्रीगंगानगर पुलिस ने सक्रियता दिखाई है, उससे अपराधियों में भय का माहौल है। 12 अप्रैल की यह अपडेट दर्शाती है कि आने वाले दिनों में पुलिस की यह ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करेगी। जनता का सहयोग और पुलिस की मुस्तैदी ही इन संगठित अपराधों पर लगाम लगाने का एकमात्र प्रभावी रास्ता है।

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