
श्रीगंगानगर: भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा और पंजाब राज्य की सीमा से सटे राजस्थान के संवेदनशील जिले श्रीगंगानगर में इस सप्ताह नशे के सौदागरों और अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करों के खिलाफ पुलिस प्रशासन और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों ने संयुक्त रूप से एक बड़ा और कड़ा अभियान छेड़ रखा है। सीमा पार (पाकिस्तान) से ड्रोन के जरिए होने वाली हेरोइन की तस्करी और पड़ोसी राज्य पंजाब के रास्ते जिले में पैर पसार रही नशीली गोलियों/दवाइयों की अवैध सप्लाई को रोकने के लिए सुरक्षा बलों ने पूरी ताकत झोंक दी है।
इस सप्ताह जिला पुलिस ने सीमावर्ती और ग्रामीण इलाकों में अभेद्य नाकाबंदी कर संदिग्धों से पूछताछ तेज कर दी है, जिसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय और अंतर्राज्यीय बॉर्डर पर त्रिस्तरीय (Three-Tier) सुरक्षा चक्र
श्रीगंगानगर जिले की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यह एक तरफ पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़ता है और दूसरी तरफ नशा प्रभावित राज्य पंजाब से। इसी का फायदा उठाकर तस्कर इस इलाके को ड्रग्स की सप्लाई और ट्रांजिट रूट (रास्ते) के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश करते हैं। इस सप्ताह पुलिस प्रशासन ने इस नेक्सस को तोड़ने के लिए एक विशेष रणनीति के तहत काम शुरू किया है:
-
बीएसएफ (BSF) के साथ कड़ा समन्वय: अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सीमा सुरक्षा बल (BSF) के साथ स्थानीय पुलिस की विंग लगातार संपर्क में है। रात के समय ड्रोन की मूवमेंट पर नजर रखने के लिए सीमावर्ती गांवों में ‘विलेज डिफेंस कमेटियों’ (VDC) को दोबारा सक्रिय किया गया है।
-
पंजाब बॉर्डर पर सघन नाकाबंदी: पंजाब से आने वाले हर छोटे-बड़े वाहन, विशेषकर मालवाहक ट्रकों, बसों और संदिग्ध बाइकों की सघन चेकिंग की जा रही है। पुलिस ने इस सप्ताह कई अंतर्राज्यीय लिंक रोड्स पर भी अचानक (सरप्राइज) नाके लगाए हैं।
-
सिंथेटिक ड्रग्स पर कड़ा प्रहार: हेरोइन के साथ-साथ जिले के युवाओं को खोखला कर रही नशीली गोलियों (जैसे ट्रामाडोल, एल्प्राजोलम आदि) की अवैध बिक्री को रोकने के लिए औषधि नियंत्रण विभाग के साथ मिलकर मेडिकल स्टोर्स पर भी नजर रखी जा रही है।
संदिग्ध तस्कर ‘राउंडअप’, खंगाला जा रहा है पूरा नेटवर्क
इस सप्ताह की सबसे बड़ी सफलता यह रही है कि पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने तकनीकी विश्लेषण (Technical Surveillance) और मुखबिरों की सूचना पर पिछले कुछ दिनों में कई संदिग्ध तस्करों और उनके स्थानीय मददगारों को राउंडअप (हिरासत में लेना) किया है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इन संदिग्धों से बंद कमरों में कड़ाई से पूछताछ की जा रही है। पुलिस केवल नशा परिवहन करने वाले ‘कूरियर’ (पैडलर्स) को ही नहीं पकड़ना चाहती, बल्कि इस काले कारोबार के पीछे बैठे ‘सफेदपोश आकाओं’ और मुख्य सप्लायरों तक पहुंचना चाहती है। हिरासत में लिए गए तस्करों के मोबाइल कॉल डिटेल्स (CDR) और वित्तीय लेन-देन (Financial Trail) को खंगाला जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि नशे की खेप के बदले जो पैसा आ रहा है, उसका इस्तेमाल कहीं देश विरोधी गतिविधियों या गैंगस्टरों को फंडिंग करने में तो नहीं हो रहा है।
खुफिया इनपुट: हालिया दिनों में आए खुफिया इनपुट के अनुसार, पाकिस्तानी हैंडलर्स अब हेरोइन की डिलीवरी के लिए स्थानीय युवाओं को मोटे पैसों का लालच देकर इस दलदल में धकेल रहे हैं। पुलिस अब उन युवाओं की काउंसलिंग और निगरानी भी कर रही है जो अचानक बिना किसी काम के अमीर हो रहे हैं।
‘नशामुक्त श्रीगंगानगर’ अभियान: जनता से सहयोग की अपील
इस सप्ताह की धरपकड़ कार्रवाई के बीच श्रीगंगानगर जिला पुलिस अधीक्षक और स्थानीय प्रशासन ने आम जनता, विशेषकर सीमावर्ती क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों से एक विशेष अपील जारी की है। पुलिस ने कहा है कि यदि रात के समय आसमान में किसी भी तरह की ड्रोन की आवाज सुनाई दे, या खेतों में कोई संदिग्ध पैकेट या लावारिस वस्तु मिले, तो उसे खुद छूने की बजाय तुरंत स्थानीय पुलिस या बीएसएफ को सूचित करें। सूचना देने वाले का नाम पूरी तरह गुप्त रखा जाएगा।
निष्कर्ष
श्रीगंगानगर में इस सप्ताह मादक पदार्थों के खिलाफ जारी यह धरपकड़ इस बात का प्रमाण है कि प्रशासन इस सीमावर्ती क्षेत्र को नशे की मंडी नहीं बनने देने के लिए प्रतिबद्ध है। पुलिस की इस कड़ाई से जहां एक ओर तस्करों के हौसले पस्त हुए हैं, वहीं दूसरी ओर आमजन में सुरक्षा और कानून के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है। नशीले पदार्थों के इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए आने वाले दिनों में पुलिस कुछ और बड़े खुलासे कर सकती है।