🢀
सामरिक शक्ति का नया केंद्र: लालगढ़ जाटान एयरबेस

1. कानूनी बाधाएं हुईं समाप्त

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के मार्ग में लंबे समय से भूमि अधिग्रहण को लेकर कानूनी अड़चनें बनी हुई थीं। स्थानीय किसानों ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया और मुआवजे को लेकर उच्च न्यायालय में याचिकाएँ दायर की थीं। हालांकि, हालिया घटनाक्रम में माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय सुरक्षा की महत्ता को सर्वोपरि रखते हुए किसानों की याचिकाओं को खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद प्रशासन और भारतीय वायुसेना (IAF) के लिए जमीन का कब्जा लेने और निर्माण कार्य शुरू करने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।

2. ‘प्रोजेक्ट ओरेशन सिंदूर’ का महत्व

यह एयरबेस केवल एक हवाई पट्टी मात्र नहीं है, बल्कि यह ‘प्रोजेक्ट ओरेशन सिंदूर’ का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

  • द्वितीय एयरबेस: श्रीगंगानगर में पहले से ही सूरतगढ़ में एक प्रमुख एयरफोर्स स्टेशन मौजूद है। लालगढ़ जाटान में यह जिला का दूसरा बड़ा एयरबेस होगा।

  • त्वरित प्रतिक्रिया (Quick Response): सीमा के बिल्कुल करीब होने के कारण, किसी भी आपातकालीन स्थिति या सीमा पार से होने वाली घुसपैठ की स्थिति में भारतीय लड़ाकू विमानों का ‘रिस्पॉन्स टाइम’ बहुत कम हो जाएगा।

  • अत्याधुनिक तकनीक: माना जा रहा है कि इस बेस पर आधुनिक रडार प्रणालियों और सुखोई या राफेल जैसे उन्नत लड़ाकू विमानों के लिए बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा।

3. रणनीतिक स्थिति और सुरक्षा चक्र

श्रीगंगानगर की सीमा पाकिस्तान के बहावलपुर और अन्य महत्वपूर्ण सैन्य केंद्रों से लगती है। लालगढ़ जाटान में एयरबेस बनने से:

  • पश्चिमी सीमा पर भारतीय वायुसेना की निगरानी क्षमता (Surveillance) कई गुना बढ़ जाएगी।

  • यह बेस न केवल हवाई हमलों के लिए बल्कि टोही विमानों और ड्रोनों के संचालन के लिए भी एक लॉन्च पैड के रूप में कार्य करेगा।

  • इससे थल सेना के ऑपरेशन्स को भी हवाई समर्थन (Air Support) मिलने में सुगमता होगी।

4. क्षेत्र का आर्थिक और ढांचागत विकास

रक्षा परियोजनाओं के साथ अक्सर क्षेत्र का विकास भी जुड़ा होता है। एयरबेस के निर्माण से लालगढ़ जाटान और आसपास के गांवों में सड़कों का जाल बिछेगा, संचार व्यवस्था सुधरेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। हालांकि, किसानों के विस्थापन का मुद्दा संवेदनशील रहा है, लेकिन प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि पुनर्वास और मुआवजे की प्रक्रिया को नियमानुसार और पारदर्शी तरीके से पूरा किया जाएगा।


निष्कर्ष

भारत-पाक सीमा पर बढ़ते ड्रोन खतरों और पड़ोसी देश की गतिविधियों को देखते हुए यह एयरबेस भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का सटीक जवाब है। ‘प्रोजेक्ट ओरेशन सिंदूर’ के तहत होने वाला यह निर्माण भारतीय वायुसेना को राजस्थान के इस सेक्टर में अजेय बना देगा। उच्च न्यायालय के फैसले ने राष्ट्र रक्षा की दिशा में एक बड़ा अवरोध हटा दिया है, और अब उम्मीद की जा रही है कि अगले कुछ महीनों में यहाँ युद्धस्तर पर निर्माण कार्य दिखाई देगा।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️