
श्रीगंगानगर, जिसे राजस्थान का ‘धान का कटोरा’ कहा जाता है, यहाँ की अर्थव्यवस्था पूरी तरह खेती पर टिकी है। खेती के आधुनिक होते दौर में ट्रैक्टर, कंबाइन हार्वेस्टर और लेजर लैंड लेवलर जैसे उपकरण अनिवार्य हो गए हैं, लेकिन इनकी ऊंची कीमतें आम किसान की पहुंच से बाहर हैं। इसी समस्या के समाधान के रूप में कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) मॉडल को विस्तार दिया जा रहा है।
1. कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) क्या है?
कस्टम हायरिंग सेंटर एक ऐसी इकाई है जहाँ खेती से जुड़ी तमाम आधुनिक मशीनें उपलब्ध होती हैं। इन केंद्रों का संचालन स्थानीय ‘ग्राम सेवा सहकारी समितियों’ द्वारा किया जाएगा। किसान अपनी आवश्यकतानुसार इन मशीनों को नाममात्र के किराए पर ले सकेंगे। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप किसी यात्रा के लिए टैक्सी किराए पर लेते हैं।
2. योजना का मुख्य उद्देश्य
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लागत में कमी: किसानों को भारी कर्ज लेकर मशीनें खरीदने की जरूरत नहीं होगी, जिससे खेती की इनपुट कॉस्ट (Input Cost) कम होगी।
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यंत्रीकरण (Mechanization): छोटे खेतों में भी आधुनिक मशीनों का उपयोग सुनिश्चित करना ताकि उत्पादकता बढ़े।
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समय की बचत: आधुनिक मशीनों से बुआई और कटाई का काम कम समय में पूरा होता है, जिससे किसान अगली फसल की तैयारी जल्दी कर सकते हैं।
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रोजगार सृजन: इन केंद्रों के संचालन और मशीनों के रखरखाव के लिए स्थानीय स्तर पर तकनीकी कौशल वाले युवाओं को रोजगार मिलेगा।
3. केंद्रों पर उपलब्ध होने वाले प्रमुख उपकरण
इन 65 केंद्रों पर क्षेत्र की फसल (गेहूं, नरमा, सरसों, ग्वार) के अनुसार मशीनें रखी जाएंगी:
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लेजर लैंड लेवलर: खेत को समतल करने के लिए, जिससे पानी की 25-30% बचत होती है।
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हैप्पी सीडर / सुपर सीडर: पराली प्रबंधन और सीधी बुआई के लिए।
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ड्रोन तकनीक: फसलों पर कीटनाशकों के छिड़काव के लिए अब ड्रोन भी इन केंद्रों का हिस्सा होंगे।
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ट्रैक्टर और कल्टीवेटर: जुताई के उन्नत साधन।
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रीपर और थ्रेशर: फसल की कटाई और छंटाई के लिए।
4. वित्तीय ढांचा और अनुदान
सरकार इन केंद्रों की स्थापना के लिए भारी सब्सिडी प्रदान कर रही है। प्रत्येक केंद्र के लिए लगभग 10 से 15 लाख रुपये तक का बजट आवंटित किया गया है। इसमें 80% तक की राशि सरकारी सहायता के रूप में दी जाती है, जबकि शेष राशि सहकारी समिति स्वयं वहन करती है।
5. किसानों को कैसे मिलेगा लाभ?
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बुकिंग प्रक्रिया: किसान अपनी नजदीकी ग्राम सेवा सहकारी समिति (GSS) में जाकर या मोबाइल ऐप (यदि उपलब्ध हो) के माध्यम से मशीन बुक कर सकेंगे।
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किराया दरें: किराए की दरें बाजार की तुलना में काफी कम रखी जाएंगी, जिसका निर्धारण समिति की प्रबंध कार्यकारिणी करेगी।
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प्राथमिकता: छोटे और सीमांत किसानों को बुकिंग में प्राथमिकता दी जाएगी।
6. श्रीगंगानगर के लिए महत्व
श्रीगंगानगर में नहरों के अंतिम छोर (Tail) तक पानी पहुंचने की समस्या अक्सर रहती है। ऐसे में लेजर लैंड लेवलर जैसी मशीनें पानी के समान वितरण में मदद करेंगी। साथ ही, पंजाब की सीमा से सटे होने के कारण यहाँ पराली जलाने की समस्या भी रहती है, जिसका समाधान यहाँ मिलने वाले मल्चर और रोटावेटर से होगा।
निष्कर्ष: 65 ग्राम सेवा सहकारी समितियों में इन केंद्रों की शुरुआत सहकारिता के मूल मंत्र “एक सबके लिए, सब एक के लिए” को चरितार्थ करती है। यह न केवल खेती को लाभ का सौदा बनाएगी, बल्कि जिले के किसानों को तकनीक के मामले में आत्मनिर्भर भी करेगी।