
श्रीगंगानगर और नवनिर्मित जिला अनूपगढ़ की सीमाएं सीधे तौर पर पाकिस्तान से लगती हैं। पिछले कुछ समय से खुफिया एजेंसियों (Intelligence Agencies) को लगातार इनपुट मिल रहे थे कि सीमा के इस पार बैठे कुछ संदिग्ध लोग पाकिस्तानी मोबाइल नेटवर्क और सिम कार्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं।
चूंकि सीमा के कुछ किलोमीटर भीतर तक पाकिस्तानी टावरों के सिग्नल पहुंच जाते हैं, इसलिए तस्कर और जासूस इन सिम कार्डों का उपयोग करते हैं ताकि भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की सर्विलांस (निगरानी) से बचा जा सके। जिला कलेक्टर द्वारा जारी किए गए आदेशों के अनुसार, अब इन प्रतिबंधित सिम कार्डों का उपयोग करना एक गंभीर अपराध माना जाएगा।
खुफिया एजेंसियों का इनपुट: क्या थी बड़ी साजिश?
सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि सीमा पार से होने वाली ड्रोन गतिविधियों और हेरोइन की तस्करी में इन सिम कार्डों का अहम रोल है।
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लोकेशन शेयरिंग: तस्कर पाकिस्तानी सिम के जरिए व्हाट्सएप या अन्य इंटरनेट कॉलिंग एप्स का इस्तेमाल कर सीमा पार बैठे अपने आकाओं को सटीक लोकेशन भेजते हैं।
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सूचनाओं का आदान-प्रदान: भारतीय सेना और बीएसएफ (BSF) की मूवमेंट की जानकारी साझा करने के लिए इन नेटवर्क्स का इस्तेमाल किया जा सकता है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है।
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घुसपैठ की आशंका: 18 मार्च की इस कार्रवाई के पीछे एक बड़ी आशंका यह भी है कि पाकिस्तान की तरफ से किसी बड़ी घुसपैठ की कोशिश की जा सकती है, जिसके लिए स्थानीय स्तर पर संपर्क साधने हेतु इन सिम कार्डों को सक्रिय किया गया था।
प्रशासन का ‘चक्रव्यूह’: चप्पे-चप्पे पर नजर
जिला प्रशासन ने केवल पाबंदी ही नहीं लगाई है, बल्कि एक सख्त मॉनिटरिंग सिस्टम भी तैयार किया है।
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धारा 163 (पूर्व में 144) के तहत आदेश: जिला मजिस्ट्रेट ने निषेधाज्ञा लागू कर दी है। यदि कोई व्यक्ति पाकिस्तानी सिम कार्ड के साथ पाया जाता है या उसका उपयोग करता पाया जाता है, तो उस पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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गांवों में मुनादी: सीमावर्ती गांवों के सरपंचों और नंबरदारों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे ग्रामीणों को जागरूक करें। किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा सिम कार्ड बेचने या इस्तेमाल करने की सूचना तुरंत पुलिस को देने को कहा गया है।
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BSF के साथ समन्वय: राजस्थान पुलिस और सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने संयुक्त गश्त बढ़ा दी है। विशेष रूप से रात के समय ‘नाका’ चेकिंग को और कड़ा कर दिया गया है।
तस्करी का नया तरीका: तकनीक बनाम सुरक्षा
श्रीगंगानगर बॉर्डर हमेशा से ही ड्रोन हमलों और ड्रग्स तस्करी के लिए संवेदनशील रहा है। पाकिस्तानी तस्कर अब पुराने तरीकों की जगह तकनीक का सहारा ले रहे हैं। पाकिस्तानी सिम कार्ड का इस्तेमाल करना उनकी रणनीति का हिस्सा है क्योंकि इन सिम की कॉल डिटेल्स निकालना भारतीय पुलिस के लिए लगभग नामुमकिन होता है। इस पाबंदी से उनके संचार तंत्र (Communication Network) की रीढ़ तोड़ने की कोशिश की गई है।
जनता से अपील और सावधानी
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह कदम किसी को परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है। सीमावर्ती इलाकों के निवासियों से अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि, अनजान ड्रोन की आवाज या संदिग्ध व्यक्ति की जानकारी तुरंत कंट्रोल रूम को दें।
निष्कर्ष: श्रीगंगानगर और अनूपगढ़ में लगी यह पाबंदी एक बड़े ‘ऑपरेशन क्लीन’ का हिस्सा है। सरहद पार से आने वाली हर एक लहर और हर एक सिग्नल पर अब भारत की पैनी नजर है। यह सनसनीखेज खुलासा बताता है कि सीमा पर जंग सिर्फ गोलियों से नहीं, बल्कि सिग्नल और सिम कार्ड से भी लड़ी जा रही है।