
घटना का विवरण: दफ्तर बना अखाड़ा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना श्रीगंगानगर जिले की एक स्थानीय ग्राम पंचायत की है। 14 फरवरी की सुबह जब ग्राम विकास अधिकारी (VDO) अपने दैनिक राजकीय कार्यों में व्यस्त थे और ग्रामीणों की समस्याओं का निस्तारण कर रहे थे, तभी दो भाई अचानक कार्यालय के भीतर दाखिल हुए। चश्मदीदों के मुताबिक, दोनों भाई किसी व्यक्तिगत काम या पुराने विवाद को लेकर आक्रोशित थे।
बातचीत शुरू होते ही दोनों भाइयों ने अपना आपा खो दिया और अधिकारी के साथ बदसलूकी शुरू कर दी। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि उन्होंने वी़डीओ (VDO) पर शारीरिक हमला कर दिया। कार्यालय में मौजूद फाइलों को इधर-उधर फेंक दिया गया और सरकारी संपत्ति को भी नुकसान पहुँचाया गया। हमलावरों की दबंगई का आलम यह था कि उन्होंने अन्य कर्मचारियों के बीच बचाव करने की कोशिशों के बावजूद मारपीट जारी रखी।
हमले का कारण: पट्टे या विकास कार्यों का विवाद?
प्राथमिक जांच और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, विवाद की जड़ में आवासीय पट्टे या किसी सरकारी योजना का लाभ न मिलना बताया जा रहा है। अक्सर ग्राम विकास अधिकारियों पर नियमों के विरुद्ध काम करने का दबाव बनाया जाता है, और जब अधिकारी कानून के दायरे में रहकर काम करते हैं, तो उन्हें इस तरह के आक्रोश का सामना करना पड़ता है। हालांकि, पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या यह हमला पहले से नियोजित था या किसी तात्कालिक गुस्से का परिणाम।
कर्मचारी संगठन और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
इस घटना की खबर फैलते ही जिले के ग्राम विकास अधिकारी संघ में जबरदस्त आक्रोश व्याप्त हो गया है। संगठन के पदाधिकारियों ने तुरंत एक आपातकालीन बैठक बुलाई और घटना की कड़ी निंदा की। कर्मचारियों का कहना है कि यदि पंचायत जैसे सार्वजनिक और सुरक्षित माने जाने वाले स्थानों पर भी अधिकारी सुरक्षित नहीं हैं, तो वे फील्ड में काम कैसे कर पाएंगे?
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कार्य बहिष्कार की चेतावनी: कर्मचारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि 24 घंटे के भीतर आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई और उनके खिलाफ सख्त धाराएं नहीं लगाई गईं, तो पूरे जिले में पंचायती राज कार्यों का बहिष्कार किया जाएगा।
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पुलिस की कार्रवाई: पुलिस ने पीड़ित अधिकारी की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया है। आरोपियों की पहचान कर ली गई है और उनकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।
निष्कर्ष और सुरक्षा पर सवाल
यह घटना श्रीगंगानगर में बढ़ती प्रशासनिक असुरक्षा की ओर इशारा करती है। एक तरफ जहाँ सरकार डिजिटल इंडिया और सुशासन की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर धरातल पर काम करने वाले अधिकारियों को जान-माल का खतरा बना हुआ है। सरकारी कार्यालयों में सीसीटीवी कैमरों की कमी और सुरक्षा गार्डों की अनुपलब्धता ऐसे उपद्रवियों के हौसले बुलंद करती है।