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: संविदा नर्सेज का आक्रोश, नियमितीकरण की मांश्रीगंगानगरग को लेकर कलेक्ट्रेट पर महापड़ाव की तैयारी

श्रीगंगानगर। जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली संविदा नर्सेज (Contractual Nurses) ने अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। 27 दिसंबर को जिले के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के उप-स्वास्थ्य केंद्रों पर कार्यरत नर्सेज ने सामूहिक रूप से विरोध प्रदर्शन करते हुए जिला मुख्यालय की ओर कूच किया है।

आंदोलन का मुख्य कारण: ‘समान कार्य-समान वेतन’ की अनदेखी

संविदा नर्सेज के इस उग्र आंदोलन के पीछे मुख्य रूप से दो बड़ी मांगें हैं:

  1. नियमितीकरण (Regularization): नर्सेज का कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से अल्प मानदेय पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कोरोना काल से लेकर वर्तमान तक उन्होंने फ्रंटलाइन वर्कर के रूप में काम किया, लेकिन सरकार उन्हें स्थायी करने की नीति पर ठोस कदम नहीं उठा रही है।

  2. वेतन विसंगतियां: वर्तमान में संविदा पर कार्यरत नर्सेज को मिलने वाला वेतन नियमित कर्मचारियों की तुलना में बहुत कम है। “समान कार्य-समान वेतन” के सिद्धांत को लागू न करना उनके आर्थिक शोषण का कारण बन रहा है।

कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन और ज्ञापन की रणनीति

आज सुबह से ही जिले के विभिन्न ब्लॉकों से संविदा नर्सेज का श्रीगंगानगर शहर पहुंचना शुरू हो गया। नर्सेज यूनियन के नेतृत्व में एक विशाल प्रतिनिधिमंडल जिला कलेक्ट्रेट पहुंचा है। आंदोलनकारियों की योजना है कि मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा जाए।

यूनियन के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया गया, तो यह सांकेतिक प्रदर्शन आने वाले दिनों में अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदल सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बार-बार आश्वासन तो देती है, लेकिन धरातल पर कोई आदेश जारी नहीं होता।

स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता असर

संविदा नर्सेज के इस सामूहिक अवकाश और विरोध प्रदर्शन का सीधा असर जिले की चिकित्सा व्यवस्था पर दिखने लगा है:

  • उप-स्वास्थ्य केंद्र (Sub-Health Centers): ग्रामीण इलाकों में स्थित दर्जनों उप-स्वास्थ्य केंद्र आज लगभग ठप नजर आ रहे हैं, क्योंकि वहां का पूरा जिम्मा संविदा स्टाफ पर ही निर्भर है।

  • टीकाकरण और ओपीडी: नियमित टीकाकरण (Vaccination) और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में बाधा आ रही है। सामान्य ओपीडी में पर्ची कटवाने और ड्रेसिंग जैसे कार्यों के लिए मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

  • दबाव में जिला अस्पताल: ग्रामीण केंद्रों से मरीजों का रुख अब जिला अस्पताल (राजकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल) की ओर हो रहा है, जिससे वहां भी व्यवस्थाएं चरमराने का डर बना हुआ है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। सीएमएचओ (CMHO) कार्यालय द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि आपातकालीन सेवाएं प्रभावित न हों। हालांकि, अधिकारियों का मानना है कि संविदा कर्मियों की मांगें राज्य स्तर की हैं, इसलिए जिला प्रशासन केवल उनके संदेश को सरकार तक पहुँचाने का माध्यम बन सकता है।

निष्कर्ष श्रीगंगानगर में संविदा नर्सेज का यह आंदोलन केवल वेतन की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह उनके भविष्य की सुरक्षा और सम्मान का सवाल बन चुका है। कड़ाके की ठंड के बावजूद कलेक्ट्रेट पर डटे नर्सेज के तेवर बता रहे हैं कि इस बार वे बिना किसी ठोस लिखित आश्वासन के पीछे हटने वाले नहीं हैं।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️