
श्रीगंगानगर। सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर में रंगदारी (Extortion) और अवैध वसूली के खिलाफ पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई में से एक को अंजाम दिया है। कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई और आरजू बिश्नोई गिरोह से जुड़े 5 और सक्रिय गुर्गों को गिरफ्तार कर पुलिस ने गैंग के वित्तीय नेटवर्क की कमर तोड़ दी है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक की गई बरामदगी ने सुरक्षा एजेंसियों को भी चौंका दिया है।
बरामदगी का आंकड़ा ₹90 लाख के पार
पुलिस के अनुसार, इस पूरे अभियान के दौरान अब तक कुल ₹90,84,900 (नब्बे लाख चौरासी हजार नौ सौ रुपये) की भारी-भरकम राशि बरामद की जा चुकी है। यह पैसा व्यापारियों और अन्य लोगों से डरा-धमका कर वसूला गया था। इतनी बड़ी नकद राशि की बरामदगी यह दर्शाती है कि जिले में रंगदारी का यह नेटवर्क कितना गहरा और संगठित था।
तस्करी और वसूली का ‘रूट मैप’
पुलिस की गहन जांच और आरोपियों से पूछताछ में एक चौंकाने वाला ‘रूट मैप’ सामने आया है। जांच में यह तथ्य उजागर हुआ है कि गिरोह ने पैसे के लेन-देन के लिए एक सुनियोजित रास्ता तैयार किया था:
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गुजरात कनेक्शन: वसूली गई मोटी रकम का बड़ा हिस्सा सबसे पहले गुजरात भेजा जाता था।
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जोधपुर और अन्य स्थान: गुजरात से यह राशि हवाला या अन्य गुप्त रास्तों के माध्यम से जोधपुर पहुंचाई जाती थी और वहां से इसे गैंग के मुख्य सरगनाओं या जेलों में बंद उनके साथियों तक पहुंचाया जाता था।
यह नेटवर्क केवल राजस्थान तक सीमित नहीं था, बल्कि अंतरराज्यीय स्तर पर फैला हुआ था, जिसका उपयोग गैंग की आपराधिक गतिविधियों को फंड करने के लिए किया जा रहा था।
पुलिस की रणनीति और कार्रवाई
श्रीगंगानगर पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में गठित विशेष टीमों ने तकनीकी सर्विलांस और मुखबिरों की सूचना पर इन पांचों आरोपियों को दबोचा। पुलिस ने बताया कि ये गुर्गे न केवल रंगदारी का पैसा वसूलने में शामिल थे, बल्कि गैंग को लॉजिस्टिक्स और सुरक्षित ठिकाने मुहैया कराने का काम भी कर रहे थे।
पकड़े गए आरोपियों के पास से कई मोबाइल फोन और सिम कार्ड भी बरामद हुए हैं, जिनका उपयोग वे धमकी भरे कॉल करने और आपस में कोड वर्ड में बात करने के लिए करते थे।
व्यापारियों में बढ़ता विश्वास
पिछले कुछ समय से गैंग के नाम पर मिलने वाली धमकियों से जिले के व्यापारियों में दहशत का माहौल था। पुलिस की इस त्वरित और प्रभावी कार्रवाई से स्थानीय व्यापारिक जगत ने राहत की सांस ली है। प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि किसी भी अपराधी या गैंग को पनपने नहीं दिया जाएगा।
आगामी जांच के बिंदु
पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन से ‘सफेदपोश’ लोग शामिल हैं। साथ ही, गुजरात और जोधपुर के उन ठिकानों की भी शिनाख्त की जा रही है जहाँ पैसा डंप किया जाता था। आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
निष्कर्ष: यह कार्रवाई केवल 5 अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं है, बल्कि लॉरेंस-आरजू बिश्नोई गैंग के उस इकोसिस्टम पर हमला है जो पैसे के दम पर अपराध का साम्राज्य चला रहा था। श्रीगंगानगर पुलिस की यह मुस्तैदी अपराध नियंत्रण की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी।