
श्रीगंगानगर। राजस्थान का वह जिला जिसे कभी अपनी हरियाली और ‘राजस्थान के अन्न भंडार’ के रूप में पहचाना जाता था, आज एक गंभीर स्वास्थ्य आपातकाल की दहलीज पर खड़ा है। हालिया वायु गुणवत्ता विश्लेषण (AQI Analysis) के चौंकाने वाले आंकड़ों ने स्थानीय प्रशासन और आम जनता की नींद उड़ा दी है। 22 और 23 फरवरी 2026 के आंकड़ों के अनुसार, श्रीगंगानगर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 304 तक पहुंच गया है, जिसने इसे ‘बेहद खराब’ (Very Poor) श्रेणी में डालते हुए देश के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शीर्ष पर ला खड़ा किया है।
AQI 304: आंकड़ों के पीछे का सच
वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) हवा की शुद्धता मापने का एक पैमाना है। शून्य से 50 के बीच AQI को ‘अच्छा’ माना जाता है, जबकि 301 से 400 के बीच का स्तर ‘बेहद खराब’ माना जाता है। श्रीगंगानगर का 300 के पार जाना यह दर्शाता है कि यहां की हवा अब सांस लेने के लिए सुरक्षित नहीं रही है।
इस प्रदूषण का सबसे चौंकाने वाला पहलू इसमें ओजोन ($O_3$) के स्तर में हुई अप्रत्याशित वृद्धि है। आमतौर पर सर्दियों के अंत और वसंत की शुरुआत में धूल के कण ($PM_{10}$ और $PM_{2.5}$) मुख्य प्रदूषक होते हैं, लेकिन इस बार ओजोन गैस का बढ़ता स्तर चिंता का मुख्य विषय बना हुआ है।
प्रदूषण के प्रमुख कारण: ओजोन का बढ़ता ग्राफ
विशेषज्ञों के अनुसार, श्रीगंगानगर में प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई जटिल कारण हैं:
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सतही ओजोन (Ground-level Ozone): ओजोन गैस सीधे उत्सर्जित नहीं होती, बल्कि यह नाइट्रोजन ऑक्साइड ($NOx$) और वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों ($VOCs$) के बीच सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में होने वाली रासायनिक प्रतिक्रिया से बनती है। श्रीगंगानगर में वाहनों के धुएं और औद्योगिक गतिविधियों से निकलने वाले रसायनों ने धूप के साथ मिलकर हवा को जहरीला बना दिया है।
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भौगोलिक स्थिति और धूल भरी हवाएं: थार रेगिस्तान के करीब होने के कारण, यहां अक्सर धूल भरी हवाएं चलती हैं। हवा की गति कम होने के कारण प्रदूषक कण वायुमंडल के निचले स्तर पर ही जमा हो जाते हैं।
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कृषि गतिविधियां: बॉर्डर इलाका होने के नाते, यहां बड़े पैमाने पर खेती होती है। फसलों के अवशेषों का निपटान और कृषि मशीनों से निकलने वाला धुआं भी वायु गुणवत्ता को प्रभावित करता है।
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सीमा पार से आने वाला प्रदूषण: पंजाब और पड़ोसी देश पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से आने वाली हवाएं भी अपने साथ प्रदूषकों का भार लेकर आती हैं।
स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर प्रभाव
AQI का 300 के पार जाना केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक सीधी चेतावनी है। ओजोन और जहरीली हवा के संपर्क में रहने से निम्नलिखित समस्याएं बढ़ रही हैं:
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श्वसन संबंधी बीमारियां: अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और फेफड़ों में संक्रमण के मामलों में पिछले कुछ दिनों में 25% की वृद्धि देखी गई है।
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आंखों और गले में जलन: ओजोन गैस के संपर्क में आने से आंखों में पानी आना और गले में लगातार खराश की शिकायतें आम हो रही हैं।
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बच्चों और बुजुर्गों पर खतरा: घर के बाहर खेलने वाले बच्चों और सुबह की सैर पर जाने वाले बुजुर्गों के फेफड़ों पर इसका सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव पड़ रहा है।
क्या हैं बचाव के उपाय?
प्रदूषण के इस खतरनाक स्तर को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कुछ सुझाव दिए हैं:
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सुबह और शाम के समय बाहरी गतिविधियों (जैसे मॉर्निंग वॉक या खेलकूद) से बचें।
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बाहर निकलते समय N-95 मास्क का उपयोग करें।
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घर के भीतर वायु शोधक (Air Purifiers) का उपयोग करें और अधिक से अधिक पौधे लगाएं।
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आंखों में जलन होने पर बार-बार साफ पानी से धोएं।
प्रशासनिक जिम्मेदारी और भविष्य की राह
श्रीगंगानगर को इस ‘प्रदूषण की राजधानी’ के तमगे से मुक्त कराने के लिए सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है। सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना, सड़कों पर पानी का छिड़काव करना और अवैध औद्योगिक इकाइयों पर नकेल कसना अनिवार्य है। साथ ही, ओजोन के स्तर को कम करने के लिए नाइट्रोजन ऑक्साइड के उत्सर्जन को नियंत्रित करना होगा।
निष्कर्ष: श्रीगंगानगर की हवा का बिगड़ना एक चेतावनी है कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बिगड़ चुका है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह ‘अन्न भंडार’ अपनी शुद्ध हवा को हमेशा के लिए खो देगा।