
श्रीगंगानगर, राजस्थान।
कृषि प्रधान जिले श्रीगंगानगर में आज किसानों और सरकार के बीच न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लेकर चल रहा तनाव चरम पर पहुंच गया। गेहूं की सरकारी खरीद की धीमी प्रक्रिया और मापदंडों में सख्ती के विरोध में आज जिले की 15 प्रमुख अनाज मंडियां पूरी तरह बंद रहीं। किसानों और व्यापारियों के संयुक्त मोर्चे ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उग्र प्रदर्शन किया, जिससे करोड़ों रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है।
विरोध की मुख्य वजह: किसान क्यों हैं नाराज?
इस साल गेहूं की बंपर पैदावार होने के बावजूद किसानों में भारी असंतोष है। प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की प्रक्रिया बेहद जटिल है। किसानों की मुख्य शिकायतें निम्नलिखित हैं:
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पोर्टल की खामियां: ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन में तकनीकी दिक्कतों के कारण कई किसान अपनी उपज का पंजीकरण नहीं करा पा रहे हैं।
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नमी के मापदंड: सरकारी खरीद एजेंसियों द्वारा नमी (Moisture) के नाम पर गेहूं की रिजेक्शन दर बहुत अधिक है। किसानों का तर्क है कि बेमौसम बारिश के कारण गेहूं की गुणवत्ता पर थोड़ा असर पड़ा है, जिसमें सरकार को रियायत देनी चाहिए।
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बारदाने की कमी: कई मंडियों में बारदाने (सिलाई के बोरे) की कमी के चलते खरीद रुकी हुई है, जिससे किसान खुले आसमान के नीचे अपनी फसल रखने को मजबूर हैं।
मंडियों में प्रदर्शन और ‘चक्का जाम’ जैसी स्थिति
मंगलवार सुबह से ही जिले की रायसिंहनगर, पदमपुर, केसरीसिंहपुर, श्रीकरणपुर, और अनूपगढ़ सहित 15 मंडियों के मुख्य द्वारों पर ताले लटका दिए गए। व्यापारियों ने भी किसानों के समर्थन में अपनी दुकानें बंद रखीं। मंडियों के बाहर किसानों ने दरी बिछाकर धरना दिया और सरकार विरोधी नारेबाजी की।
देखते ही देखते यह विरोध प्रदर्शन उग्र हो गया जब किसानों ने मंडी के मुख्य मार्गों पर ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खड़ी कर रास्ता जाम कर दिया। किसानों का कहना है कि “जब तक हमारी पूरी फसल MSP पर नहीं खरीदी जाती, तब तक हम पीछे नहीं हटेंगे।” व्यापारियों का तर्क है कि खरीद न होने से मंडियों में जगह की कमी हो गई है और लेबर (हमाल) भी खाली बैठे हैं।
प्रशासन की समझाइश और सहायक सचिव का आश्वासन
हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारी मंडियों में पहुंचे। स्थिति को बिगड़ता देख मंडी समिति के सहायक सचिव और जिला रसद विभाग के अधिकारियों ने किसान प्रतिनिधियों के साथ बंद कमरे में लंबी वार्ता की।
शाम होते-होते, मंडी समिति के सहायक सचिव ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए आश्वासन दिया कि:
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गेहूं खरीद के लिए अतिरिक्त बारदाने की व्यवस्था तुरंत की जाएगी।
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नमी के मापदंडों में ढील देने के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है।
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पोर्टल की तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए विशेष हेल्प-डेस्क बनाई जाएगी।
इस आश्वासन के बाद, कई घंटों से चल रहा अनशन और धरना फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। किसानों ने प्रशासन को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है कि यदि खरीद सुचारू नहीं हुई, तो वे जिला मुख्यालय का घेराव करेंगे।
आर्थिक प्रभाव: करोड़ों का लेन-देन ठप
मंडियों के एक दिन बंद रहने से श्रीगंगानगर की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा है। व्यापारियों के अनुसार, एक दिन के बंद से लगभग 20 से 25 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है। इसके अलावा, हजारों की संख्या में मंडी मजदूर और ट्रक चालक भी इस गतिरोध के कारण बेरोजगार बैठे रहे।
निष्कर्ष: गतिरोध अभी भी बरकरार
हालांकि शाम को मंडियां खोलने पर सहमति बन गई है, लेकिन किसानों के चेहरों पर अभी भी चिंता की लकीरें हैं। हकीकत यह है कि जब तक मंडियों में गेहूं की तुलाई और उठान (Liftment) तेजी से शुरू नहीं होता, तब तक यह समाधान केवल कागजी नजर आता है।
मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में धूल भरी आंधी और छिटपुट बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में अगर गेहूं की खरीद में और देरी हुई, तो मंडियों में पड़ा लाखों क्विंटल सोना (गेहूं) खराब हो सकता है, जिससे किसान और सरकार दोनों को भारी नुकसान होगा।
विशेष टिप: यदि आप किसान हैं, तो अपनी फसल को नमी से बचाने के लिए तिरपाल साथ रखें और मंडी ले जाने से पहले अपनी गिरदावरी और जन-आधार कार्ड का मिलान सुनिश्चित करें।