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श्रीगंगानगर: 42 घंटे बाद गंगनहर से निकाला गया युवक का शव, परिजनों में मचा कोहराम

श्रीगंगानगर। राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर में नहरों का जाल बिछा हुआ है, लेकिन ये नहरें कई बार हादसों का सबब भी बन जाती हैं। ताज़ा मामला हिंदूमलकोट थाना क्षेत्र के खाट लबाना गांव का है, जहाँ पिछले तीन दिनों से चल रहा एक बड़ा सर्च ऑपरेशन आज सुबह समाप्त हुआ। गंगनहर की लक्ष्मीनारायण वितरिका में नहाते समय डूबे युवक का शव लगभग 42 घंटों की मशक्कत के बाद बरामद कर लिया गया है। इस घटना के बाद मृतक के परिवार में मातम पसरा हुआ है और पूरे गांव में शोक की लहर है।

कैसे हुआ हादसा?

जानकारी के अनुसार, घटना दो दिन पहले की है जब युवक भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए अपने कुछ साथियों के साथ खाट लबाना गांव के पास गंगनहर की वितरिका में नहाने गया था। श्रीगंगानगर में अप्रैल के महीने में ही तापमान 35°C से ऊपर जा रहा है, जिसके कारण अक्सर युवा नहरों का रुख करते हैं।

नहाने के दौरान, युवक अचानक पानी के तेज बहाव की चपेट में आ गया। चूंकि गंगनहर की इन शाखाओं में पानी की गति काफी तीव्र होती है और गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है, युवक देखते ही देखते गहरे पानी में समा गया। किनारे पर मौजूद साथियों ने उसे बचाने की कोशिश की और शोर मचाया, लेकिन बहाव इतना तेज था कि वह उनकी नज़रों से ओझल हो गया।

42 घंटे का सघन तलाशी अभियान

हादसे की सूचना तुरंत हिंदूमलकोट पुलिस थाना को दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर स्थानीय गोताखोरों और प्रशासन की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।

  • चुनौतियां: नहर में पानी का स्तर अधिक होना और सिल्ट (कीचड़) की वजह से तलाशी में काफी दिक्कतें आईं।

  • सर्च ऑपरेशन: जाल बिछाकर और नावों की मदद से युवक को ढूंढने का प्रयास रात भर जारी रहा। अगले दिन एसडीआरएफ (SDRF) और निजी गोताखोरों की टीम ने भी मोर्चा संभाला।

  • सफलता: लगातार 42 घंटों तक चली खोजबीन के बाद, आज सुबह घटनास्थल से कुछ दूरी पर युवक का शव पानी की सतह पर तैरता हुआ दिखाई दिया, जिसे गोताखोरों की मदद से बाहर निकाला गया।

पुलिस की कार्रवाई और पोस्टमार्टम

शव बाहर निकालने के बाद पुलिस ने उसे अपनी कस्टडी में लिया। परिजनों द्वारा शिनाख्त किए जाने के बाद पुलिस ने शव को जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया है। हिंदूमलकोट थाना पुलिस ने बताया कि इस संबंध में मर्ग दर्ज कर ली गई है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या युवक को तैरना आता था या वह किसी फिसलन की वजह से गहरे पानी में चला गया।

प्रशासन की चेतावनी: नहरों से रहें दूर

इस दुखद घटना ने एक बार फिर प्रशासन की उन चेतावनियों को दोहरा दिया है जिसमें लोगों को नहरों के किनारे न जाने या उनमें न नहाने की सलाह दी जाती है।

  1. अचानक बहाव: नहरों में गेट खुलने या बंद होने से पानी का स्तर और गति अचानक बदल जाती है।

  2. किनारों की फिसलन: काई और गीली मिट्टी के कारण किनारों पर पैर फिसलने का खतरा रहता है।

  3. गहराई का भ्रम: ऊपर से शांत दिखने वाली नहर भीतर से काफी गहरी और पथरीली हो सकती है।

गांव में शोक की लहर

युवक की पहचान होने के बाद खाट लबाना और आसपास के क्षेत्रों में उदासी छाई हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि मृतक मिलनसार स्वभाव का था और परिवार का सहारा था। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

निष्कर्ष

गंगनहर और उसकी वितरिकाएं श्रीगंगानगर की जीवनरेखा हैं, लेकिन सुरक्षा नियमों की अनदेखी इन्हें ‘मौत का जाल’ बना देती है। प्रशासन ने एक बार फिर अपील की है कि ग्रामीण और युवा विशेष रूप से गर्मी के मौसम में नहरों के भीतर जाने के बजाय सुरक्षित विकल्पों को चुनें ताकि ऐसे हादसों को रोका जा सके।


मुख्य तथ्य:

  • क्षेत्र: हिंदूमलकोट, खाट लबाना गांव।

  • नहर: गंगनहर (लक्ष्मीनारायण वितरिका)।

  • समय: 42 घंटे का रेस्क्यू ऑपरेशन।

  • परिणाम: शव बरामद, पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।

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