
श्रीगंगानगर। राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर में बुधवार की दोपहर उस समय दहशत का माहौल बन गया, जब शहर के सबसे व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्र रविंद्र पथ पर स्थित प्रसिद्ध ‘होटल पगोडा रिजॉर्ट इन’ की ऊपरी मंजिल से आग की लपटें और काले धुएं का गुबार उठने लगा। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
घटना का क्रम: कैसे भड़की आग
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोपहर के समय होटल की बहुमंजिला इमारत की छत (रूफटॉप) पर अचानक धुआं दिखाई दिया। उस समय होटल के नीचे स्थित बाजार में भारी भीड़ थी। जैसे ही लोगों ने होटल की छत से ऊंची-ऊंची लपटें उठती देखीं, शोर मच गया। होटल के भीतर मौजूद कर्मचारी और मेहमान तुरंत बाहर की ओर भागे।
आग इतनी भीषण थी कि आसमान में कई किलोमीटर दूर तक काला धुआं साफ देखा जा सकता था। प्रारंभिक सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस और दमकल विभाग की टीमें सक्रिय हुईं। स्थानीय दुकानदारों ने भी अपनी ओर से बचाव कार्य शुरू किया, लेकिन आग की ऊंचाई अधिक होने के कारण काबू पाना मुश्किल हो रहा था।
दमकल विभाग की मुस्तैदी और रेस्क्यू ऑपरेशन
सूचना मिलते ही श्रीगंगानगर नगर परिषद की तीन दमकल गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंचीं। बाद में आग की भयावहता को देखते हुए अतिरिक्त गाड़ियां और निजी टैंकरों को भी बुलाया गया।
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चुनौतीपूर्ण कार्य: होटल एक संकरी और व्यस्त सड़क पर स्थित है, जिसके कारण दमकल की गाड़ियों को सही स्थान पर खड़ा करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
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हाइड्रोलिक प्लेटफार्म का उपयोग: इमारत की ऊंचाई अधिक होने के कारण दमकल कर्मियों ने सीढ़ियों और हाइड्रोलिक सिस्टम का सहारा लिया ताकि आग को नीचे की मंजिलों तक फैलने से रोका जा सके।
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काबू पाने में लगा समय: करीब दो से तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दमकल कर्मियों ने आग पर पूरी तरह काबू पाया। राहत की बात यह रही कि दमकल विभाग ने समय रहते आग को होटल के कमरों तक पहुंचने से रोक दिया, अन्यथा नुकसान बहुत बड़ा हो सकता था।
संभावित कारण और नुकसान का आकलन
होटल प्रबंधन और फायर ब्रिगेड की प्रारंभिक जांच के अनुसार, आग लगने का प्राथमिक कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि छत पर रखे कुछ पुराने फर्नीचर, जनरेटर सेट के पास मौजूद केबल या एयर कंडीशनर की यूनिट्स में स्पार्किंग होने से आग सुलगी।
नुकसान: हादसे में होटल की छत पर बना अस्थायी ढांचा, फर्नीचर और कुछ सजावटी सामान पूरी तरह जलकर राख हो गया है। होटल की आंतरिक साज-सज्जा को भी धुएं और पानी के कारण नुकसान पहुंचा है। हालांकि, होटल प्रबंधन ने अभी तक नुकसान का कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया है, लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि यह लाखों में हो सकता है।
प्रशासन की अपील और सुरक्षा जांच
हादसे के बाद प्रशासन ने शहर के अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और होटलों को अपनी फायर सेफ्टी ऑडिट करवाने के निर्देश दिए हैं। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भीड़भाड़ वाले इलाकों में स्थित इमारतों में अग्निशमन उपकरणों की कार्यक्षमता की जांच अनिवार्य है।
राहत की खबर: इस पूरे घटनाक्रम में सबसे सुखद पहलू यह रहा कि किसी भी व्यक्ति को गंभीर चोट नहीं आई और न ही कोई जनहानि हुई। समय रहते होटल को खाली करा लिया गया था।
भविष्य की चेतावनी
रविंद्र पथ जैसे व्यस्त बाजार में इस तरह की घटना एक बड़ी चेतावनी है। यदि यह आग रात के समय लगती या नीचे की मंजिलों तक फैल जाती, तो आसपास की दुकानों को भी चपेट में ले सकती थी। स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि ऐसे होटलों में फायर एग्जिट और सुरक्षा मानकों की नियमित जांच होनी चाहिए।