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श्रीगंगानगर: स्कूलों में ‘सांता क्लॉज’ ड्रेस को लेकर शिक्षा विभाग की सख्ती और धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा

श्रीगंगानगर। राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर में इस साल क्रिसमस के त्योहार के बाद भी स्कूलों में ‘सांता क्लॉज’ की पोशाक को लेकर छिड़ा विवाद शांत होता नहीं दिख रहा है। श्रीगंगानगर जिला शिक्षा विभाग ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए निजी शिक्षण संस्थानों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि किसी भी विद्यार्थी को उसकी या उसके अभिभावकों की सहमति के बिना विशेष धार्मिक या सांस्कृतिक पोशाक पहनने के लिए विवश करना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।

विवाद की पृष्ठभूमि और विभाग का आदेश

दिसंबर माह के मध्य में ही जिला शिक्षा विभाग के पास कुछ अभिभावकों और सामाजिक संगठनों द्वारा शिकायतें पहुंची थीं। इन शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि कई निजी स्कूल क्रिसमस कार्यक्रमों के नाम पर बच्चों पर ‘सांता क्लॉज’ की ड्रेस पहनकर आने का दबाव बना रहे हैं। इसके साथ ही ड्रेस न पहनने पर बच्चों को स्कूल की गतिविधियों से बाहर रखने या उन पर मानसिक दबाव बनाने की बातें भी सामने आईं।

इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने एक आधिकारिक सर्कुलर जारी किया था। इसमें स्पष्ट कहा गया था कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और शिक्षण संस्थानों में किसी भी छात्र को उसकी इच्छा के विरुद्ध किसी विशेष धार्मिक स्वरूप को धारण करने के लिए मजबूर करना संवैधानिक अधिकारों का हनन है।

27 दिसंबर: अनुपालन की समीक्षा और कार्रवाई की तैयारी

आज, 27 दिसंबर को जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय में एक विशेष बैठक बुलाई गई, जिसमें जिले के विभिन्न ब्लॉकों से मिली रिपोर्टों की समीक्षा की जा रही है। विभाग यह जांच रहा है कि क्रिसमस के दौरान किन स्कूलों ने सरकारी निर्देशों का पालन किया और किन स्कूलों ने इन्हें दरकिनार कर बच्चों को सांता क्लॉज की ड्रेस पहनने के लिए मजबूर किया।

विभाग के सूत्रों के अनुसार, कुछ स्कूलों के खिलाफ पुख्ता सबूत मिले हैं जहाँ ड्रेस कोड को अनिवार्य (Mandatory) बताया गया था। ऐसे स्कूलों को अब ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show Cause Notice) जारी करने की तैयारी है। यदि स्कूलों का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो उनकी मान्यता रद्द करने या भारी जुर्माना लगाने जैसी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

अभिभावकों और स्कूल संचालकों का पक्ष

इस मामले ने जिले में एक बड़ी बहस को जन्म दे दिया है:

  • अभिभावकों का तर्क: कई अभिभावकों का मानना है कि सांता क्लॉज की ड्रेस, टोपी और दाढ़ी खरीदना न केवल आर्थिक बोझ डालता है, बल्कि यह बच्चों की पसंद का विषय होना चाहिए, स्कूल का आदेश नहीं।

  • निजी स्कूलों का तर्क: वहीं, कुछ स्कूल संचालकों का कहना है कि यह केवल बच्चों के मनोरंजन और सांस्कृतिक विविधता को समझने का एक हिस्सा था, इसे विवाद का रूप देना गलत है।

प्रशासनिक रुख: “शिक्षा का माहौल निष्पक्ष हो”

शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि स्कूलों का प्राथमिक कार्य शिक्षा प्रदान करना है। त्योहारों का उत्सव खुशी का विषय होना चाहिए, लेकिन जब इसमें ‘अनिवार्यता’ जुड़ जाती है, तो वह शोषण की श्रेणी में आ जाता है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी किसी भी अन्य धार्मिक त्योहार पर इस तरह के निर्देश जारी रहेंगे ताकि किसी भी छात्र को असहज महसूस न हो।

निष्कर्ष श्रीगंगानगर में शिक्षा विभाग की यह सख्ती राज्य के अन्य जिलों के लिए भी एक नजीर पेश कर रही है। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्कूल परिसर केवल शिक्षा और सर्वांगीण विकास का केंद्र बने रहें, न कि किसी विशेष सांस्कृतिक विचार को थोपने का माध्यम। आगामी दिनों में नोटिस मिलने वाले स्कूलों की सूची सार्वजनिक होने की संभावना है, जिससे जिले के निजी स्कूलों में हड़कंप मचा हुआ है।

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