
श्रीगंगानगर। राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर से आज एक अत्यंत हृदयविदारक समाचार प्राप्त हुआ है। शहर के जवाहरनगर थाना क्षेत्र स्थित सैन्य छावनी (Military Cantonment) में देश की सेवा में तैनात एक जांबाज सूबेदार का शारीरिक अभ्यास के दौरान आकस्मिक निधन हो गया। इस घटना ने न केवल सेना के गलियारों में बल्कि पूरे जिले में शोक की लहर दौड़ा दी है।
घटना का विवरण
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सूबेदार मुकेश सिंह राजपूत (46), जो भारतीय सेना की एक प्रतिष्ठित यूनिट में तैनात थे, अपनी नियमित दिनचर्या का पालन कर रहे थे। सेना में फिटनेस का स्तर बनाए रखना अनिवार्य होता है, और सूबेदार मुकेश सिंह अपनी अनुशासित जीवनशैली के लिए जाने जाते थे।
मंगलवार की सुबह, जब सूरज की पहली किरणें छावनी की धरती को छू रही थीं, सूबेदार मुकेश सिंह अपने साथियों के साथ शारीरिक प्रशिक्षण (PT) के लिए मैदान में उतरे थे। उन्होंने अपनी नियमित 12 किलोमीटर की लंबी दौड़ पूरी की। प्रत्यक्षदर्शियों और सूत्रों के अनुसार, दौड़ पूरी करने के बाद जब वे अन्य व्यायाम (पीटी) कर रहे थे, तभी अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें तेज चक्कर आया और वे अचेत होकर जमीन पर गिर पड़े।
तत्काल सहायता और चिकित्सा
मैदान पर मौजूद अन्य सैनिकों और चिकित्सा सहायकों ने बिना समय गंवाए उन्हें संभाला। उन्हें तुरंत छावनी के सैन्य अस्पताल (Military Hospital) ले जाया गया। वहां मौजूद सैन्य डॉक्टरों की टीम ने उन्हें पुनर्जीवित करने का हर संभव प्रयास किया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। गहन जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्राथमिक चिकित्सा रिपोर्ट के अनुसार, उनकी मृत्यु का कारण हृदय गति रुकना (Cardiac Arrest) बताया जा रहा है।
एक समर्पित योद्धा का सफर
46 वर्षीय सूबेदार मुकेश सिंह राजपूत मूल रूप से मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के रहने वाले थे। वे एक अनुभवी सैनिक थे जिन्होंने अपने करियर के दौरान विभिन्न कठिन मोर्चों पर देश की सेवा की थी। उनके साथियों ने उन्हें एक सख्त अनुशासक लेकिन बेहद मिलनसार व्यक्तित्व के रूप में याद किया। छावनी में उनके निधन की खबर फैलते ही माहौल गमगीन हो गया। वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने उनके पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
फिटनेस और स्वास्थ्य पर बढ़ती चिंता
यह घटना एक बार फिर फिटनेस और अचानक होने वाले हृदय रोगों के बीच के सूक्ष्म संबंध पर सवाल खड़े करती है। एक ऐसा व्यक्ति जो प्रतिदिन 12 किलोमीटर दौड़ने का आदी था, उसका इस तरह चले जाना सैन्य समुदाय के लिए एक बड़ा आघात है। विशेषज्ञों का मानना है कि कभी-कभी अत्यधिक शारीरिक श्रम या अज्ञात अंतर्निहित हृदय रोगों के कारण ‘एथलीट हार्ट’ जैसी स्थितियां पैदा हो जाती हैं, जो घातक साबित हो सकती हैं।
परिवार को सूचना और अंतिम विदाई
जवाहरनगर थाना पुलिस को घटना की सूचना दे दी गई है, ताकि आवश्यक कानूनी और आधिकारिक औपचारिकताएं पूरी की जा सकें। सूबेदार मुकेश सिंह के परिजनों को मुरैना (मध्य प्रदेश) में सूचित कर दिया गया है। सैन्य प्रोटोकॉल के तहत, उनके पार्थिव शरीर को पूरे सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव भेजने की तैयारी की जा रही है, जहां उनका अंतिम संस्कार राजकीय व सैन्य सम्मान के साथ किया जाएगा।
श्रीगंगानगर की पावन धरा, जो हमेशा से जवानों के शौर्य की गवाह रही है, आज एक कर्मयोगी की शहादत (कर्तव्य पालन के दौरान मृत्यु) पर मौन है। सूबेदार मुकेश सिंह राजपूत का जाना न केवल उनके परिवार के लिए बल्कि भारतीय सेना के लिए भी एक अपूरणीय क्षति है।
“एक सैनिक कभी मरता नहीं, वह बस अपने कर्तव्य की वेदी पर अमर हो जाता है।”