🢀
श्रीगंगानगर: सरहद पर नशामुक्ति की अलख; पुलिस ने ‘चौपाल’ लगाकर युवाओं को दी नई दिशा

भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित राजस्थान का श्रीगंगानगर जिला पिछले कुछ समय से न केवल सामरिक दृष्टि से, बल्कि नशे की तस्करी और बढ़ते उपभोग के कारण भी चर्चा में रहा है। इस गंभीर समस्या को जड़ से मिटाने के लिए श्रीगंगानगर पुलिस प्रशासन द्वारा एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में आज 23 फरवरी, 2026 को सीमावर्ती गांवों और श्रीकरणपुर कस्बे में ‘नशा मुक्ति चौपाल’ का आयोजन किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को नशे की गर्त से बाहर निकालना और तस्करी के नेटवर्क को तोड़ना है।


बॉर्डर के गांवों में पुलिस की दस्तक

अभियान के तहत पुलिस दल ने विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय सीमा के बिल्कुल करीब स्थित गांवों, जैसे 40 PS और 43 PS, में चौपालें लगाईं। इन क्षेत्रों में अक्सर सीमा पार से ड्रोन के जरिए मादक पदार्थों की तस्करी की खबरें आती रहती हैं। पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया और उन्हें बताया कि नशा न केवल एक व्यक्तिगत स्वास्थ्य समस्या है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी एक बड़ा खतरा है।

नशे के दुष्प्रभावों पर गहन चर्चा

चौपाल के दौरान पुलिस अधिकारियों ने वैज्ञानिक और सामाजिक दोनों पहलुओं से नशे के नुकसान गिनाए:

  1. शारीरिक और मानसिक क्षय: “चिट्टा” (सिंथेटिक ड्रग्स) और अन्य नशीले पदार्थों के सेवन से युवाओं के फेफड़े, लिवर और मस्तिष्क पर पड़ने वाले घातक प्रभावों की जानकारी दी गई।

  2. आर्थिक बदहाली: वक्ताओं ने बताया कि कैसे नशे की लत एक हंसते-खेलते परिवार को कर्ज के जाल में फंसा देती है और अपराध की ओर धकेल देती है।

  3. कानूनी परिणाम: एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के सख्त प्रावधानों के बारे में युवाओं को सचेत किया गया, ताकि वे अनजाने में या लालच में आकर तस्करी का हिस्सा न बनें।


युवाओं से मार्मिक अपील और संकल्प

श्रीकरणपुर में आयोजित मुख्य चौपाल में पुलिस अधिकारियों ने युवाओं से भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि वे अपनी ऊर्जा को खेलों और पढ़ाई में लगाएं। चौपाल में मौजूद कई पूर्व नशा करने वाले व्यक्तियों ने भी अपने अनुभव साझा किए कि कैसे नशे ने उनके जीवन को बर्बाद किया और अब वे मुख्यधारा में लौटकर कितना बेहतर महसूस कर रहे हैं।

पुलिस ने ग्रामीणों से आग्रह किया कि यदि उनके क्षेत्र में कोई भी व्यक्ति नशा बेचता है या संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त है, तो उसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें। पुलिस ने आश्वासन दिया कि सूचना देने वाले का नाम पूरी तरह गुप्त रखा जाएगा।


समुदाय की भागीदारी और ‘पुलिस मित्र’ की भूमिका

इस अभियान की सबसे बड़ी सफलता ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी रही। गांव के बुजुर्गों और पंचायत प्रतिनिधियों ने संकल्प लिया कि वे अपने गांव को ‘नशा मुक्त’ बनाने के लिए पुलिस का पूरा सहयोग करेंगे।

  • निगरानी समितियां: प्रत्येक गांव में युवाओं की छोटी कमिटियां बनाई जा रही हैं जो संदिग्ध बाहरी लोगों पर नजर रखेंगी।

  • खेलकूद को बढ़ावा: पुलिस प्रशासन ने वादा किया है कि नशा मुक्त होने वाले गांवों के युवाओं के लिए खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी और उन्हें पुलिस भर्ती व अन्य सरकारी सेवाओं के लिए मार्गदर्शन दिया जाएगा।

निष्कर्ष

श्रीगंगानगर पुलिस की यह पहल सराहनीय है क्योंकि यह केवल डंडे के जोर पर नहीं, बल्कि जन-जागरूकता और आपसी विश्वास के आधार पर काम कर रही है। सीमावर्ती क्षेत्रों में ‘नशा मुक्ति चौपाल’ जैसे कार्यक्रम न केवल नशे की मांग को कम करेंगे, बल्कि सीमा पार से होने वाली साजिशों को नाकाम करने में भी मददगार साबित होंगे।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️