
राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर में 30 अप्रैल, 2026 की दोपहर एक ऐसी घटना घटी जिसने प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया। भाजपा के स्थानीय विधायक जयदीप बिहाणी पर सरकारी अधिकारियों द्वारा किए गए कथित हमले ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि जनप्रतिनिधियों और नौकरशाही के बीच बढ़ते तनाव को भी उजागर कर दिया है।
घटनाक्रम: बैठक जो अखाड़े में तब्दील हो गई
शहर के विधायक सेवा केंद्र में गुरुवार दोपहर एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक का मुख्य एजेंडा श्रीगंगानगर शहर में लंबे समय से चली आ रही पेयजल किल्लत और सड़कों की बदहाली था। बैठक में आरयूआईडीपी (RUIDP) और निर्माण कार्य से जुड़ी निजी कंपनी एलएंडटी (L&T) के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बैठक की शुरुआत में विधायक बिहाणी ने शहर के विभिन्न वार्डों में पानी की सप्लाई न होने और खुदाई के बाद सड़कों को अधूरा छोड़ने पर नाराजगी व्यक्त की। चर्चा के दौरान माहौल तब गरमा गया जब विधायक ने अधिकारियों से कार्य में हो रही देरी का जवाब मांगा। आरोप है कि इसी दौरान अधिकारियों ने अपना आपा खो दिया।
हमले का स्वरूप और आरोप
विधायक जयदीप बिहाणी के समर्थकों और वहां मौजूद चश्मदीदों का दावा है कि बहस इतनी बढ़ गई कि अधिकारियों ने मर्यादित आचरण की सीमाएं लांघ दीं। आरोप लगाया गया है कि एक अधिकारी ने विधायक का कॉलर पकड़ा और उनके चेहरे पर हाथ से वार किया। इस धक्का-मुक्की में विधायक का चश्मा टूट गया और उन्हें मामूली चोटें आईं।
एक चुने हुए जन प्रतिनिधि पर उनके ही कार्यालय में इस तरह के हमले की खबर जंगल की आग की तरह पूरे शहर में फैल गई। कुछ ही मिनटों में विधायक सेवा केंद्र के बाहर सैकड़ों की संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक जमा हो गए।
पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आया। जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने घटनास्थल का जायजा लिया। आक्रोशित कार्यकर्ताओं को शांत करने के लिए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए हमले के आरोपी तीन अधिकारियों को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने विधायक की शिकायत पर राजकार्य में बाधा (हालांकि यहाँ स्थिति विपरीत थी), मारपीट और अपमानजनक व्यवहार की धाराओं में मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
राजनीतिक उबाल और स्थानीय प्रतिक्रिया
इस घटना ने श्रीगंगानगर की राजनीति में उबाल ला दिया है:
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भाजपा का विरोध: राजस्थान भाजपा के प्रदेश नेतृत्व ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया और नारेबाजी की। उनका कहना है कि अगर एक विधायक अपने कार्यालय में सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता का क्या होगा?
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जनता का आक्रोश: श्रीगंगानगर की जनता पहले से ही पानी की किल्लत और खराब सड़कों से परेशान थी। इस घटना ने आग में घी डालने का काम किया है। लोगों का कहना है कि अधिकारी अपनी विफलता छुपाने के लिए हिंसा का सहारा ले रहे हैं।
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प्रशासनिक पक्ष: दूसरी ओर, कुछ हलकों में यह भी चर्चा है कि कार्य के दबाव और तीखी बयानबाजी के कारण अधिकारियों ने मानसिक संतुलन खोया होगा, हालांकि हिंसा को किसी भी आधार पर जायज नहीं ठहराया जा सकता।
निष्कर्ष और उठते सवाल
यह घटना केवल एक मारपीट का मामला नहीं है, बल्कि यह कार्यपालिका (Executive) और विधायिका (Legislature) के बीच के बिगड़ते तालमेल का संकेत है। आरयूआईडीपी और एलएंडटी जैसी संस्थाओं पर पहले भी कार्य में देरी के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन एक विधायक पर शारीरिक हमला होना लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन है।
फिलहाल, श्रीगंगानगर में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। पुलिस बल को तैनात किया गया है ताकि स्थिति नियंत्रण से बाहर न हो। अब सबकी नजरें पुलिस की जांच और राज्य सरकार द्वारा इन अधिकारियों पर की जाने वाली अनुशासनात्मक कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या प्रशासन इन अधिकारियों को निलंबित करेगा? यह सवाल अब पूरे राजस्थान की राजनीति के केंद्र में है।