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श्रीगंगानगर रेलवे का कायाकल्प: 174.26 करोड़ रुपये से बदलेगी तस्वीर

राजस्थान के उत्तरी छोर पर स्थित श्रीगंगानगर रेलवे स्टेशन के लिए 28 फरवरी 2026 का दिन ऐतिहासिक रहा। भारतीय रेलवे ने बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को मजबूत करने के लिए 174.26 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। यह निवेश न केवल स्टेशन की सूरत बदलेगा, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्र की कनेक्टिविटी को एक नए युग में ले जाएगा।

इस परियोजना का मुख्य केंद्र एक अत्याधुनिक कोच मेंटेनेंस फैसिलिटी (धुलाई और रखरखाव केंद्र) विकसित करना है, जिससे श्रीगंगानगर अब केवल एक ‘टर्मिनल’ नहीं, बल्कि ट्रेनों के रखरखाव का एक बड़ा ‘हब’ बनकर उभरेगा।


परियोजना के मुख्य घटक और तकनीकी बदलाव

इस बजट का उपयोग रेलवे के तकनीकी ढांचे को आधुनिक बनाने के लिए किया जाएगा। इसमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं:

  • नई वाशिंग लाइन का निर्माण: वर्तमान में श्रीगंगानगर में ट्रेनों की सफाई और रखरखाव की क्षमता सीमित है। नई वाशिंग लाइन बनने से लंबी दूरी की ट्रेनों के रैक (डिब्बों) को यहीं साफ और तैयार किया जा सकेगा। इससे ट्रेनों की सफाई की गुणवत्ता में सुधार होगा।

  • इंजन एस्केप लाइन: स्टेशन पर ट्रेनों के आने-जाने के दौरान इंजनों के मूवमेंट को सुगम बनाने के लिए ‘एस्केप लाइन’ बिछाई जाएगी। इससे प्लेटफॉर्म पर ट्रेनों के खड़े होने और इंजन बदलने के समय में काफी बचत होगी, जिससे स्टेशन की परिचालन क्षमता (Operational Capacity) बढ़ जाएगी।

  • आधुनिक पिट लाइन: कोचों की गहन जांच और मरम्मत के लिए नई ‘पिट लाइन’ का निर्माण किया जाएगा, जो आधुनिक मानकों के अनुरूप होगी।


वंदे भारत और लंबी दूरी की ट्रेनों का मार्ग प्रशस्त

इस 174 करोड़ रुपये के निवेश का सबसे बड़ा दूरगामी लाभ वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी हाई-स्पीड ट्रेनों का संचालन है। वंदे भारत ट्रेनों के रखरखाव के लिए विशेष प्रकार की इंफ्रास्ट्रक्चर और क्लीनिंग फैसिलिटी की आवश्यकता होती है।

“अब तक श्रीगंगानगर से नई आधुनिक ट्रेनों के संचालन में सबसे बड़ी बाधा यहाँ उन्नत रखरखाव केंद्र का न होना थी। इस बजट की मंजूरी के बाद, भविष्य में श्रीगंगानगर से दिल्ली, जयपुर या अहमदाबाद के लिए वंदे भारत शुरू करने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।”


आर्थिक और सामाजिक प्रभाव

इस बुनियादी ढांचे के विकास के कई व्यापक लाभ होंगे:

  1. रोजगार के अवसर: 174 करोड़ के निर्माण कार्यों और भविष्य में मेंटेनेंस हब बनने से स्थानीय युवाओं के लिए तकनीकी और गैर-तकनीकी रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

  2. नई ट्रेनों की शुरुआत: जब श्रीगंगानगर में ट्रेनों के रखरखाव की सुविधा बढ़ जाएगी, तो रेलवे बोर्ड यहां से दक्षिण और पूर्वी भारत के लिए नई ट्रेनें शुरू कर पाएगा। अब ट्रेनों को रखरखाव के लिए बीकानेर या बठिंडा पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

  3. व्यापार को गति: बेहतर रेलवे कनेक्टिविटी से श्रीगंगानगर की कृषि मंडियों और स्थानीय व्यापारियों को भी लाभ होगा, क्योंकि माल ढुलाई और व्यापारियों का आवागमन सुगम हो जाएगा।


भविष्य की योजना: ‘अमृत भारत स्टेशन’ के साथ तालमेल

यह 174 करोड़ रुपये का बजट अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत चल रहे पुनर्विकास कार्यों के अतिरिक्त है। जहां अमृत भारत योजना स्टेशन के सौंदर्यकरण और यात्री सुविधाओं (जैसे लिफ्ट, एस्केलेटर और वेटिंग हॉल) पर केंद्रित है, वहीं यह नया बजट स्टेशन की ‘बैक-एंड’ क्षमता को बढ़ाने के लिए है।

यह निवेश श्रीगंगानगर को उत्तर पश्चिम रेलवे (NWR) के एक महत्वपूर्ण जंक्शन के रूप में स्थापित करेगा। सीमावर्ती जिला होने के कारण सामरिक दृष्टि से भी रेलवे ट्रैक और यार्ड का मजबूत होना अत्यंत आवश्यक है।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, 174.26 करोड़ रुपये की यह मंजूरी श्रीगंगानगर के रेल इतिहास में एक मील का पत्थर है। यह न केवल रेल यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाएगा, बल्कि जिले के समग्र विकास को एक नई गति प्रदान करेगा। आने वाले 1-2 वर्षों में जब यह इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो जाएगा, तो श्रीगंगानगरवासी गर्व से अपने स्टेशन से आधुनिकतम ट्रेनों में सफर कर सकेंगे।

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