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श्रीगंगानगर: रबी फसलों की कटाई तेज, मंडियों में नई आवक के साथ किसानों की बढ़ी चिंता

श्रीगंगानगर। राजस्थान के ‘अन्न भंडार’ कहे जाने वाले श्रीगंगानगर जिले में इन दिनों खेतों से लेकर अनाज मंडियों तक भारी चहल-पहल देखी जा रही है। मार्च के अंतिम सप्ताह के साथ ही जिले में रबी सीजन (Rabi Season) 2025-26 की मुख्य फसलों—गेहूं और सरसों—की कटाई और थ्रेसिंग का काम अपने चरम पर पहुंच गया है। कम्बाइन हार्वेस्टर की गूंज और मजदूरों की टोलियां सुबह से शाम तक सुनहरी फसलों को समेटने में जुटी हुई हैं।

हालांकि, इस बार फसल की बंपर पैदावार की उम्मीदों के बीच बदलते मौसम के मिजाज ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।


अनाज मंडियों में रौनक: पीली और सुनहरी चमक

श्रीगंगानगर की मुख्य अनाज मंडी सहित जिले की अन्य सहायक मंडियों में नई फसल की आवक आधिकारिक रूप से शुरू हो चुकी है।

  • सरसों की आवक: सरसों की फसल पहले पककर तैयार हुई है, इसलिए मंडियों में वर्तमान में सरसों की आवक अधिक है। किसान अपनी ट्रॉलियां लेकर सुबह से ही मंडी परिसर में पहुंच रहे हैं, जिससे नीलामी चबूतरों पर पीली सरसों के ढेर दिखाई देने लगे हैं।

  • गेहूं की दस्तक: गेहूं की कटाई अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन फिर भी अगेती किस्मों की आवक मंडियों में होने लगी है। व्यापारियों का अनुमान है कि अप्रैल के पहले सप्ताह से गेहूं की आवक में भारी उछाल आएगा और मंडी परिसर पूरी तरह गेहूं से भर जाएगा।

मौसम का अलर्ट: ‘सिर मुड़ाते ही ओले पड़ने’ जैसी स्थिति

एक तरफ फसल कटकर घर और मंडी पहुंचने की तैयारी में है, तो दूसरी तरफ मौसम विभाग (IMD) की पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) की चेतावनी ने डर का माहौल पैदा कर दिया है। 28 मार्च से सक्रिय होने वाले इस तंत्र के कारण आंधी और बारिश की संभावना जताई गई है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यह समय फसल के लिए सबसे नाजुक होता है। यदि इस समय बारिश या ओलावृष्टि होती है, तो:

  1. गेहूं की चमक: बारिश से गेहूं के दाने का रंग काला पड़ सकता है या उसकी चमक कम हो सकती है, जिससे मंडी में उचित भाव नहीं मिलता।

  2. नमी का खतरा: कटी हुई फसल में नमी बढ़ने से फफूंद लगने या दाना खराब होने का जोखिम रहता है।

  3. कटाई में देरी: आंधी चलने से खड़ी फसल खेतों में बिछ सकती है, जिससे मशीनों द्वारा कटाई करना लगभग असंभव हो जाता है।

कृषि विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण सलाह

कृषि विभाग और स्थानीय ‘खेत पाठशाला’ के विशेषज्ञों ने किसानों के लिए तत्काल एडवाइजरी जारी की है। किसानों को निम्नलिखित सावधानियां बरतने को कहा गया है:

  • सुरक्षित भंडारण: जिन किसानों की फसल कट चुकी है, वे उसे खुले खेतों में न छोड़कर ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर ले जाएं।

  • तिरपाल का प्रबंधन: मंडी में अपनी उपज लेकर जा रहे किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपनी ट्रॉली के साथ तिरपाल (Tarpaulin) जरूर रखें, ताकि अचानक बारिश होने पर अनाज को तुरंत ढका जा सके।

  • थ्रेसिंग का समय: विशेषज्ञों के अनुसार, यदि मौसम विभाग का अलर्ट गंभीर है, तो एक-दो दिन के लिए कटाई या थ्रेसिंग का काम रोक देना ही समझदारी है ताकि भीगे हुए चारे (तूड़ी) और अनाज के नुकसान से बचा जा सके।

मंडी प्रशासन की तैयारियां

आने वाली बारिश की चेतावनी को देखते हुए श्रीगंगानगर मंडी प्रशासन ने भी कमर कस ली है। व्यापारियों और श्रमिकों को निर्देश दिए गए हैं कि मंडी में आने वाले अनाज को जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रखा जाए और ड्रेनेज (निकासी) की व्यवस्था दुरुस्त रखी जाए ताकि बारिश का पानी अनाज के ढेरों में न घुसे।

बाजार का रुख और भाव की स्थिति

प्रारंभिक आवक के दौरान सरसों के भावों में स्थिरता देखी जा रही है, हालांकि किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और उससे बेहतर भाव की उम्मीद लगाए बैठे हैं। श्रीगंगानगर क्षेत्र में किन्नू (Kinnow) के सफल सीजन के बाद अब सारा दारोमदार गेहूं और सरसों की पैदावार पर टिका है, जो जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।

निष्कर्ष

श्रीगंगानगर का किसान इस समय दोहरी चुनौती से जूझ रहा है—एक तरफ कड़ी मेहनत से उगाई गई फसल को समेटने की जल्दी है, तो दूसरी तरफ कुदरत के बदलते मिजाज से अपनी पूंजी को बचाने की जद्दोजहद। यदि अगले 48 घंटों में मौसम साथ देता है, तो इस बार रबी की पैदावार जिले के लिए नए रिकॉर्ड कायम कर सकती है।

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