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श्रीगंगानगर: मौसम का मिजाज – मार्च की दस्तक के साथ ही तपने लगा ‘रेगिस्तान का प्रवेश द्वार’

श्रीगंगानगर। राजस्थान के सबसे उत्तरी जिले श्रीगंगानगर में, जो अपनी चरम मौसमी परिस्थितियों के लिए देशभर में जाना जाता है, मार्च की शुरुआत के साथ ही सूरज के तेवर तल्ख होने लगे हैं। सर्दी की विदाई के तुरंत बाद अब धीरे-धीरे गर्मी का असर बढ़ रहा है। जिला मुख्यालय और आसपास के क्षेत्रों में अधिकतम तापमान में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है, जो इस बात का संकेत है कि इस साल गर्मी अपने पुराने रिकॉर्ड तोड़ सकती है।


तापमान का बढ़ता ग्राफ: आंकड़ों की जुबानी

मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, श्रीगंगानगर में पिछले 48 घंटों के दौरान तापमान में अप्रत्याशित बढ़त देखी गई है। जहाँ फरवरी के अंत तक सुबह और शाम की हवाओं में हल्की ठिठुरन थी, वहीं अब दोपहर के समय धूप चुभने लगी है। वर्तमान में अधिकतम तापमान सामान्य से 2-3 डिग्री सेल्सियस ऊपर चल रहा है।

आने वाले दिनों, विशेष रूप से 10 और 11 मार्च के आसपास, पारे में और अधिक उछाल आने की प्रबल संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के गुजरने के बाद आसमान पूरी तरह साफ हो गया है, जिससे सूर्य की किरणें सीधे धरातल तक पहुँच रही हैं और गर्मी का अहसास बढ़ा रही हैं।

पश्चिमी राजस्थान और गर्म हवाओं का असर

श्रीगंगानगर की भौगोलिक स्थिति इसे थार रेगिस्तान के करीब लाती है। पश्चिमी राजस्थान के जैसलमेर और बाड़मेर जैसे जिलों की तरह यहाँ भी अब ‘हल्की लू’ या गर्म हवाएं (Heat Waves) चलने के संकेत मिलने लगे हैं। हालांकि अभी मार्च की शुरुआत है, लेकिन शुष्क हवाओं ने वातावरण में नमी को कम कर दिया है।

दोपहर के समय सड़कों पर आवाजाही में कमी आने लगी है और लोग अब पंखों और कूलरों की सर्विसिंग करवाने में जुट गए हैं। स्थानीय बाजारों में ठंडे पेयों, जैसे गन्ने का रस और लस्सी की मांग में अचानक बढ़ोतरी देखी जा रही है।


कृषि पर प्रभाव: किसानों की बढ़ी चिंता

श्रीगंगानगर एक प्रमुख कृषि प्रधान जिला है। तापमान में अचानक आई यह बढ़त रबी की फसलों, विशेष रूप से गेहूं के लिए चिंता का विषय बन सकती है।

  • गेहूं की फसल: इस समय गेहूं की फसल दाना पकने की अवस्था (Grain Filling Stage) में है। यदि तापमान अचानक 35-36 डिग्री सेल्सियस के पार जाता है, तो दाना समय से पहले सूख सकता है, जिससे पैदावार और गुणवत्ता दोनों पर असर पड़ता है।

  • सिंचाई प्रबंधन: कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में नमी बनाए रखने के लिए शाम के समय हल्की सिंचाई करें। गर्म हवाओं के चलते वाष्पीकरण की दर बढ़ गई है, जिससे फसलों को बार-बार पानी की आवश्यकता पड़ रही है।

स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां

चिकित्सकों ने बदलते मौसम को देखते हुए आमजन को सावधानी बरतने की सलाह दी है। दिन और रात के तापमान में बड़ा अंतर (Diurnal Variation) होने के कारण मौसमी बीमारियों, जैसे वायरल बुखार, सर्दी-खांसी और डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है।

  1. तरल पदार्थों का सेवन: शरीर में पानी की कमी न होने दें।

  2. धूप से बचाव: दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच सीधे धूप में निकलने से बचें या सिर ढंककर निकलें।

  3. खान-पान: हल्का और सुपाच्य भोजन करें ताकि शरीर बढ़ते तापमान के साथ तालमेल बिठा सके।


निष्कर्ष: आगे क्या?

मौसम विभाग की भविष्यवाणी के अनुसार, मार्च के दूसरे पखवाड़े में गर्मी अपने शबाब पर होगी। श्रीगंगानगर, जिसे अक्सर सर्दियों में ‘राजस्थान का शिमला’ और गर्मियों में ‘भट्टी’ कहा जाता है, एक बार फिर अपने तप्त स्वभाव की ओर बढ़ रहा है। यदि 10-11 मार्च को तापमान में और अधिक उछाल आता है, तो प्रशासन को ‘हीट एक्शन प्लान’ पर विचार करना पड़ सकता है।

फिलहाल, श्रीगंगानगरवासी इस ‘समय से पहले’ आई गर्मी से दो-चार होने के लिए तैयार हो रहे हैं। यह बढ़ता तापमान न केवल जीवनशैली बदल रहा है, बल्कि आने वाले भीषण ग्रीष्मकाल की एक डरावनी दस्तक भी दे रहा है।

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