
श्रीगंगानगर: राजस्थान के ‘अन्न भंडार’ कहे जाने वाले श्रीगंगानगर में इस वक्त दोहरा मौसम वार देखने को मिल रहा है। एक तरफ बर्फीली हवाओं ने पारा गिरा दिया है, वहीं दूसरी तरफ आसमान में बादलों के डेरे ने सूर्य देव को ओझल कर दिया है। 31 जनवरी 2026 को मौसम विभाग ने जिले के लिए ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है।
1. पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) का प्रभाव
मौसम विज्ञान केंद्र (IMD) के अनुसार, हिमालयी क्षेत्रों में एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ पहुंचा है। इसका सीधा असर उत्तरी राजस्थान के सीमावर्ती जिलों, विशेषकर श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ पर पड़ रहा है।
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बादलों की आवाजाही: सुबह से ही आसमान में घने बादल छाए हुए हैं।
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बूंदाबांदी की संभावना: जिले के रावला, अनूपगढ़, सूरतगढ़ और रायसिंहनगर क्षेत्रों में आज रात या कल सुबह तक हल्की से मध्यम बारिश (Rainfall) की संभावना जताई गई है।
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हवा की गति: उत्तर-पश्चिमी ठंडी हवाएं 10 से 15 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही हैं, जिससे ‘चिल फैक्टर’ बढ़ गया है।
2. तापमान का गणित: हाड़ कंपाने वाली ठंड
पिछले 24 घंटों में श्रीगंगानगर का न्यूनतम तापमान 4°C से 6°C के बीच दर्ज किया गया है।
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दिन का तापमान: धूप न निकलने के कारण दिन के अधिकतम तापमान में भी भारी गिरावट आई है, जो सामान्य से 5-6 डिग्री नीचे चल रहा है।
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शीतलहर (Cold Wave): रात के समय चलने वाली बर्फीली हवाओं ने लोगों को घरों में दुबकने पर मजबूर कर दिया है। शहर के मुख्य चौराहों पर लोग अलाव जलाकर ठंड से बचने का प्रयास कर रहे हैं।
3. खेती और किसानों पर असर: वरदान या अभिशाप?
श्रीगंगानगर एक कृषि प्रधान जिला है, ऐसे में इस बारिश के दो पहलू देखे जा रहे हैं:
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गेहूं की फसल के लिए अमृत: कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हल्की बूंदाबांदी होती है, तो यह गेहूं और जौ की फसल के लिए ‘गोल्डन ड्रॉप्स’ (अमृत) साबित होगी। इससे दाने की गुणवत्ता बढ़ेगी।
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सरसों पर संकट: यदि बारिश के साथ ओलावृष्टि (Hailstorm) होती है, तो सरसों की पकी हुई फसल को भारी नुकसान हो सकता है। सरसों के फूल झड़ने और फलियों में फंगस लगने का डर किसानों को सता रहा है।
4. आम जनजीवन और प्रशासन की तैयारी
ठंड और संभावित बारिश ने दैनिक मजदूरी करने वालों और बेघर लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
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रेन बसेरे: प्रशासन ने शहर के रेन बसेरों में पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं ताकि कोई भी खुले में सोने को मजबूर न हो।
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स्वास्थ्य सलाह: डॉक्टरों ने इस बदलते मौसम में बच्चों और बुजुर्गों को खास ख्याल रखने की सलाह दी है, क्योंकि अचानक नमी बढ़ने से सांस और वायरल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
निष्कर्ष: आगामी दिनों का पूर्वानुमान
मौसम विभाग की मानें तो यह विक्षोभ अगले 48 घंटों तक सक्रिय रह सकता है। इसके बाद जैसे ही आसमान साफ होगा, उत्तर से आने वाली सर्द हवाएं ‘पाले’ (Frost) की स्थिति पैदा कर सकती हैं, जो फसलों के लिए सबसे घातक साबित होता है।
सावधानी ही बचाव है: घर से निकलते समय गर्म कपड़ों का प्रयोग करें और यदि आप खेती से जुड़े हैं, तो सिंचाई प्रबंधन पर ध्यान दें।