
RGHS योजना का उद्देश्य लाभार्थियों को कैशलेस इलाज और दवाइयां उपलब्ध कराना है। लेकिन श्रीगंगानगर के कुछ निजी अस्पतालों और फार्मास्युटिकल स्टोरों ने तकनीक और कागजों में हेरफेर कर इस जनकल्याणकारी योजना को अपनी कमाई का जरिया बना लिया है।
1. घोटाले का तरीका (Modus Operandi)
जांच टीमों ने पाया है कि घोटाले के तार मुख्य रूप से ‘कागजी ट्रांजेक्शन’ से जुड़े हैं। इसके लिए कुछ प्रमुख तरीके अपनाए गए:
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बिना दवा दिए बिलिंग: कई फार्मेसी स्टोर संचालकों ने लाभार्थियों के RGHS कार्ड का उपयोग करके महंगी दवाइयों की एंट्री पोर्टल पर कर दी, जबकि वास्तव में मरीज को कोई दवा नहीं दी गई। बदले में लाभार्थी को कुछ नकद राशि या कम मूल्य का अन्य सामान थमा दिया गया।
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अनावश्यक प्रिस्क्रिप्शन: कुछ निजी अस्पतालों के साथ सांठगांठ कर मरीजों को ऐसी महंगी दवाइयां या सर्जिकल सामान लिखा गया जिनकी आवश्यकता ही नहीं थी।
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मल्टीपल स्वाइपिंग: एक ही कार्ड से कम समय के अंतराल में कई बार भारी-भरकम राशि के बिल काट दिए गए, जो कि सामान्य परिस्थितियों में संभव नहीं है।
2. श्रीगंगानगर में अचानक बढ़ी बिलिंग: रेड फ्लैग
राज्य मुख्यालय से आई ऑडिट टीमों का ध्यान श्रीगंगानगर पर तब गया जब पिछले 6 महीनों के डेटा विश्लेषण में जिले की कुछ विशिष्ट फार्मेसी दुकानों की बिलिंग में 200% से 400% तक की संदिग्ध बढ़ोतरी देखी गई।
मुख्य बिंदु: जिले के करीब 25 से ज्यादा बड़े निजी अस्पताल और 50 से अधिक मेडिकल स्टोर वर्तमान में गहन जांच के रडार पर हैं।
3. ऑडिट टीम की कार्रवाई और प्रक्रिया
जयपुर से आई विशेष सतर्कता टीमों (Vigilance Teams) ने स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर छापेमारी शुरू की है:
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स्टॉक मिलान: दुकानों पर मौजूद दवाओं के भौतिक स्टॉक (Physical Stock) का मिलान ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज की गई बिक्री से किया जा रहा है। यदि पोर्टल पर बिक्री अधिक है और स्टॉक में कमी नहीं है, तो इसे सीधे तौर पर धोखाधड़ी माना जा रहा है।
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लाभार्थियों से पूछताछ: रैंडम आधार पर उन लाभार्थियों को फोन किया जा रहा है या उनके घर जाकर सत्यापन किया जा रहा है जिनके कार्ड से भारी बिलिंग हुई है।
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CCTV फुटेज का विश्लेषण: स्टोरों के बाहर लगे कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि यह देखा जा सके कि बिल कटने के समय क्या वास्तव में मरीज या उसका प्रतिनिधि वहां मौजूद था।
4. तकनीकी खामियां और मिलीभगत
जांच में यह भी सामने आया है कि इस घोटाले में केवल स्टोर संचालक ही नहीं, बल्कि कुछ विभाग के निचले स्तर के कर्मचारी और बिचौलिए भी शामिल हो सकते हैं। ओटीपी (OTP) आधारित सत्यापन प्रणाली में सेंध लगाने या मरीजों के मोबाइल नंबर बदलकर फर्जीवाड़ा करने की आशंकाओं की भी जांच की जा रही है।
5. दोषियों पर क्या होगी कार्रवाई?
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के मामले में किसी को बख्शा नहीं जाएगा:
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पंजीकरण निरस्त: दोषी पाए जाने वाले अस्पतालों और मेडिकल स्टोरों का RGHS पैनल से नाम तुरंत हटा दिया जाएगा (De-empanelment)।
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FIR और वसूली: धोखाधड़ी की गई राशि की वसूली ब्याज सहित की जाएगी और आईपीसी की संबंधित धाराओं के तहत आपराधिक मुकदमे दर्ज होंगे।
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कर्मचारियों पर गाज: यदि किसी सरकारी कर्मचारी की मिलीभगत पाई जाती है, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई और सेवा समाप्ति तक के प्रावधान किए गए हैं।
निष्कर्ष: RGHS घोटाला केवल पैसों की हेराफेरी नहीं है, बल्कि यह उन ईमानदार मरीजों के हक पर डाका है जिन्हें वास्तव में इलाज की जरूरत है। श्रीगंगानगर में जारी यह ‘क्लीन-अप’ ऑपरेशन न केवल सरकारी खजाने की रक्षा करेगा, बल्कि भविष्य में ऐसी योजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाएगा।