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श्रीगंगानगर में ‘स्मॉग’ का कहर: ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंचा प्रदूषण स्तर

आज सुबह जब श्रीगंगानगर के निवासियों की आँख खुली, तो उन्हें चारों ओर धुंध की एक मोटी चादर दिखाई दी। शुरुआत में इसे कोहरा समझा गया, लेकिन सूरज निकलने के बाद भी दृश्यता (Visibility) में सुधार नहीं हुआ, जिससे स्पष्ट हो गया कि यह सामान्य कोहरा नहीं बल्कि ‘स्मॉग’ (Smog) है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, शहर के कई इलाकों में AQI 400 के पार दर्ज किया गया।

प्रदूषण बढ़ने के प्रमुख कारण

विशेषज्ञों ने इस अचानक आए उछाल के पीछे कई भौगोलिक और स्थानीय कारकों को जिम्मेदार ठहराया है:

  1. मौसमी बदलाव: वर्तमान में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण हवा की गति अत्यंत धीमी हो गई है। हवा की कमी के कारण प्रदूषक तत्व (Pollutants) वातावरण में एक ही जगह स्थिर हो गए हैं।

  2. नमी और पीएम 2.5: हवा में नमी बढ़ने से सूक्ष्म कण (PM 2.5 और PM 10) भारी होकर निचले स्तर पर जम गए हैं, जिससे सांस लेना दूभर हो गया है।

  3. सीमावर्ती गतिविधियां: कृषि प्रधान क्षेत्र होने के नाते, आस-पास के इलाकों में अवशेषों का जलाया जाना भी एक संभावित कारण माना जा रहा है।

स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव

चिकित्सा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ‘गंभीर’ श्रेणी की हवा में लंबे समय तक रहना एक दिन में 15-20 सिगरेट पीने के बराबर हानिकारक हो सकता है।

  • तत्काल लक्षण: आंखों में जलन, गले में खराश, लगातार खांसी और सांस फूलना।

  • दीर्घकालिक जोखिम: फेफड़ों की कार्यक्षमता में कमी, अस्थमा का अटैक और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ना।

प्रशासनिक गाइडलाइन और सावधानियां

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन ने ‘हेल्थ एडवाइजरी’ जारी की है:

  • आउटडोर गतिविधियों पर रोक: लोगों को सलाह दी गई है कि वे सुबह की सैर (Morning Walk) और बाहर व्यायाम करने से बचें, क्योंकि सुबह के समय प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक होता है।

  • मास्क का अनिवार्य उपयोग: सामान्य कपड़े के मास्क के बजाय N-95 या N-99 मास्क का उपयोग करने की सलाह दी गई है जो सूक्ष्म कणों को रोकने में सक्षम हैं।

  • इनडोर सुरक्षा: घर के दरवाजे और खिड़कियां बंद रखें। यदि संभव हो, तो एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें और घर के अंदर अगरबत्ती या मोमबत्ती जलाने से बचें।

क्या कहता है AQI पैमाना?

आम जनता की समझ के लिए AQI के स्तरों को इस प्रकार वर्गीकृत किया गया है: | AQI स्तर | श्रेणी | स्वास्थ्य प्रभाव | | :— | :— | :— | | 0 – 50 | अच्छा | न्यूनतम प्रभाव | | 51 – 100 | संतोषजनक | संवेदनशील लोगों को हल्की परेशानी | | 101 – 200 | मध्यम | फेफड़ों और हृदय रोगियों को दिक्कत | | 201 – 300 | खराब | लंबे समय तक रहने पर बीमारी | | 301 – 400 | बहुत खराब | श्वसन संबंधी गंभीर बीमारियां | | 401 – 500 | गंभीर (Severe) | स्वस्थ लोगों पर भी बुरा असर |


निष्कर्ष: श्रीगंगानगर में प्रदूषण का यह स्तर एक ‘पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी’ जैसा है। जब तक हवा की गति नहीं बढ़ती या बारिश के माध्यम से ये कण जमीन पर नहीं बैठते, तब तक सावधानी ही एकमात्र बचाव है।

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