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श्रीगंगानगर में सुरक्षा एजेंसियों का बड़ा एक्शन: अनधिकृत सैन्य वर्दी के 1,000 मीटर कपड़े की खेप बरामद; इंटेलिजेंस और पुलिस की संयुक्त छापेमारी से मचा हड़कंप

श्रीगंगानगर (राजस्थान)। भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे संवेदनशील जिले श्रीगंगानगर में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़ी संभावित सुरक्षा सेंध को विफल कर दिया है। सेना की खुफिया इकाई (Military Intelligence) और श्रीगंगानगर पुलिस की संयुक्त टीम ने शहर के मुख्य कपड़ा बाजार और संदिग्ध ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी करते हुए लगभग 1,000 मीटर अनधिकृत सेना-पैटर्न (नकली इंडियन आर्मी कॉम्बैट ड्रेस) का कपड़ा जब्त किया है। सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण इतनी बड़ी मात्रा में बिना अनुमति और अनधिकृत रूप से भारतीय सेना के नया कॉम्बैट पैटर्न वाला कपड़ा बरामद होने से सुरक्षा और खुफिया महकमे में हड़कंप मच गया है।

सैन्य खुफिया इनपुट पर हुई गुप्त कार्रवाई

सूत्रों के अनुसार, सेना की इंटेलिजेंस विंग को पिछले कुछ दिनों से यह गुप्त सूचना मिल रही थी कि श्रीगंगानगर शहर के कुछ कपड़ा व्यापारी और सप्लायर बिना किसी वैध लाइसेंस, अनुमति या पहचान पत्र की जांच किए भारतीय सेना की आधिकारिक डिजिटल कॉम्बैट यूनिफॉर्म से मिलता-जुलता कपड़ा धड़ल्ले से बेच रहे हैं।

सूचना को बेहद गंभीर मानते हुए मिलिट्री इंटेलिजेंस और स्थानीय कोतवाली व सदर थाना पुलिस की एक विशेष संयुक्त टीम का गठन किया गया। टीम ने बोगस ग्राहक बनकर शहर के चुनिंदा कपड़ा बाजारों और गोदामों की रेकी की। पुष्टि होते ही मंगलवार शाम सुरक्षा एजेंसियों ने एक साथ दो मुख्य व्यापारिक ठिकानों पर दबिश देकर 1,000 मीटर से अधिक सैन्य पैटर्न वाला कपड़ा सीज कर लिया।

बिना आईडी और सत्यापन के बेचा जा रहा था कपड़ा

रक्षा मंत्रालय और भारतीय सेना के स्पष्ट नियमों के अनुसार, सेना की आधिकारिक वर्दी या उससे मिलता-जुलता पैटर्न का कपड़ा खुले बाजार में आम नागरिकों को बेचना सख्त मना है। केवल अधिकृत मिलिट्री कैंटीन या वैध परिचय पत्र (ID Card) के सत्यापन के बाद ही पंजीकृत सप्लायर इसे बेच सकते हैं।

छापेमारी के दौरान जब पुलिस ने दुकानदारों और गोदाम मालिकों से इस कपड़े का स्टॉक रजिस्टर, खरीद-बिक्री के बिल और ग्राहकों के सत्यापन से जुड़े दस्तावेज मांगे, तो वे कोई भी वैध कागजात पेश नहीं कर सके। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि यह कपड़ा सूरत और अहमदाबाद के कपड़ा मिलों से स्थानीय थोक विक्रेताओं द्वारा मंगवाया गया था।

सुरक्षा के लिहाज से क्यों संवेदनशील है यह मामला?

श्रीगंगानगर जिला अंतरराष्ट्रीय सीमा (Radcliffe Line) के बेहद करीब स्थित है। रणनीतिक दृष्टि से यह इलाका बेहद संवेदनशील माना जाता है और यहां सेना की कई महत्वपूर्ण छावनियां व अग्रिम चौकियां मौजूद हैं। अतीत में कई आतंकी घटनाओं (जैसे पठानकोट और उरी हमले) में देखा गया है कि असामाजिक या असामाजिक तत्व सुरक्षा बलों की वर्दी पहनकर सैन्य प्रतिष्ठानों में घुसपैठ की कोशिश करते हैं।

ऐसे में बिना किसी रोक-टोक और रिकॉर्ड के 1,000 मीटर यानी सैकड़ों वर्दियों के बराबर कपड़ा खुले बाजार में उपलब्ध होना एक बहुत बड़ा सुरक्षा जोखिम माना जा रहा है। इंटेलिजेंस एजेंसियां इस बात की गहनता से पड़ताल कर रही हैं कि:

  • यह कपड़ा किस-किस व्यक्ति या संस्था को बेचा जा चुका है?

  • क्या यह केवल स्थानीय दर्जी/मजदूरों के व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए था या इसके पीछे किसी राष्ट्रविरोधी/तस्कर सिंडिकेट का हाथ है?

  • कपड़ा किस रूट से श्रीगंगानगर तक पहुंचा और इसके मुख्य सप्लायर कौन हैं?

सप्लायरों पर कसता शिकंजा और आगे की कार्रवाई

पुलिस ने कपड़ा जब्त कर संबंधित दुकानदारों और सप्लायरों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं और सुरक्षा अधिनियमों के तहत मामला दर्ज कर लिया है। संदिग्ध दुकानदारों से पुलिस स्टेशन में कड़ाई से पूछताछ जारी है और उनके पिछले छह महीनों के बिक्री रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।

जिला पुलिस प्रशासन और सेना ने स्पष्ट चेतावनी जारी की है कि यदि शहर में कोई भी व्यापारी अनधिकृत रूप से सैन्य वर्दी, होलस्टर या कॉम्बैट फैब्रिक बेचता पाया गया, तो उसके खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे जिले में ऐसे अन्य वस्त्र विक्रेताओं पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

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