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श्रीगंगानगर में साइबर ठगी और अवैध गतिविधियों पर पुलिस का शिकंजा: फर्जी बैंक खातों और ठगों के नेटवर्क पर कार्रवाई

श्रीगंगानगर जिले में बढ़ती साइबर वित्तीय धोखाधड़ी और अवैध डिजिटल लेन-देन पर नकेल कसने के लिए जिला पुलिस और साइबर क्राइम सेल ने संयुक्त रूप से एक व्यापक अभियान शुरू किया है। हालिया जांच और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने फर्जी बैंक खातों (म्यूल अकाउंट्स) और डिजिटल माध्यमों से आम जनता से करोड़ों रुपये ऐंठने वाले गिरोहों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है।

फर्जी बैंक खातों (Mule Accounts) का पर्दाफाश

साइबर ठगों द्वारा आम नागरिकों, विशेषकर ग्रामीण और कम पढ़े-लिखे लोगों को पैसों का लालच देकर उनके नाम से फर्जी बैंक खाते खुलवाए जा रहे थे। इन खातों का उपयोग साइबर अपराधों से अर्जित अवैध राशि को ट्रांसफर और निकालने के लिए किया जा रहा था।

  • म्यूल अकाउंट्स पर कार्रवाई: पुलिस और साइबर सेल की टीमों ने विभिन्न राष्ट्रीयकृत और निजी बैंकों से डेटा शेयरिंग के माध्यम से संदिग्ध खातों को चिन्हित किया है। इन खातों में अचानक हुए बड़े लेन-देन के स्रोतों की गहनता से पड़ताल की जा रही है।

  • अकाउंट प्रोवाइडर्स पर शिकंजा: जो लोग अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड या सिम कार्ड किराए या कमीशन पर ठगों को उपलब्ध कराते हैं, पुलिस ने उन्हें भी इस अपराध का बराबर का भागीदार माना है। ऐसे कई स्थानीय मददगारों को चिन्हित कर उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज किए गए हैं।

साइबर ठगी के प्रमुख तरीके और कार्यप्रणाली

साइबर क्राइम सेल के विश्लेषकों के अनुसार, जिले में सक्रिय या बाहर से संचालित हो रहे गिरोह मुख्य रूप से निम्नलिखित तरीकों से लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं:

  • फर्जी एपीके (APK) फाइल और लिंक: व्हाट्सएप, टेलीग्राम और मैसेज के जरिए “बिजली बिल अपडेट करने”, “क्रेडिट कार्ड रिवॉर्ड पॉइंट भुनाने” या “पार्ट-टाइम जॉब में घर बैठे कमाई” के नाम से लुभावने लिंक और एपीके डाउनलोड फाइलें भेजी जाती हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति इन्हें इंस्टॉल करता है, ठग उसके मोबाइल का रिमोट एक्सेस हासिल कर बैंक खाते साफ कर देते हैं।

  • डिजिटल अरेस्ट और कॉल फ्रॉड: खुद को सीबीआई, पुलिस या ईडी का अधिकारी बताकर लोगों को डराया जाता है और “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाकर उनके बैंक खातों से पैसे ट्रांसफर करवा लिए जाते हैं।

पुलिस प्रशासन की हिदायत और एडवाइजरी

बढ़ते साइबर खतरों को देखते हुए जिला पुलिस और साइबर क्राइम सेल ने आमजन को जागरूक करने के लिए एडवाइजरी जारी की है:

  • गोपनीय जानकारी शेयर न करें: किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपना बैंक ओटीपी (OTP), यूपीआई पिन, क्रेडिट कार्ड नंबर या पासवर्ड साझा न करें। कोई भी बैंक कभी भी फोन पर पासवर्ड या ओटीपी नहीं मांगता।

  • अनजान ऐप्स और लिंक से बचें: अनधिकृत वेबसाइट्स, व्हाट्सएप संदेशों या सोशल मीडिया पर आए किसी भी अनजान लिंक या एपीके फाइल्स पर क्लिक न करें।

  • साइबर हेल्पलाइन 1930 का प्रयोग: यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाता है, तो उसे तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करना चाहिए या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। घटना के शुरुआती 1-2 घंटों (गोल्डन आवर्स) में सूचना देने से ठगी की राशि को ठगों के खातों में ही फ्रीज (ब्लॉक) कराने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

जिला पुलिस अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि डिजिटल सुरक्षा को सुदृढ़ करने के साथ-साथ अपराधियों के वित्तीय स्रोतों को पूरी तरह से ध्वस्त करना ही इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है।

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