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श्रीगंगानगर में सर्दी का सितम: कोहरे की चादर और ठिठुरन भरी फरवरी

राजस्थान का उत्तरी छोर, श्रीगंगानगर, अपनी चरम मौसमी परिस्थितियों के लिए जाना जाता है। इस वर्ष फरवरी की शुरुआत ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यहाँ की सर्दी केवल कैलेंडर की तारीखों पर निर्भर नहीं करती। आमतौर पर फरवरी के महीने में वसंत की आहट होने लगती है और धूप में गर्माहट महसूस की जाने लगती है, लेकिन 2 फरवरी, 2026 को जिले की सुबह ने कुछ अलग ही तस्वीर पेश की।


तापमान का गणित और ठिठुरन

श्रीगंगानगर में 2 फरवरी को न्यूनतम तापमान 9.3°C दर्ज किया गया। हालांकि यह आंकड़ा सुनने में सामान्य लग सकता है, लेकिन हवा में मौजूद नमी और उत्तर से आने वाली बर्फीली हवाओं (Chilly winds) ने ‘फील लाइक’ तापमान को कहीं अधिक कम कर दिया। सुबह के समय गलन इतनी अधिक थी कि लोग घरों में दुबकने को मजबूर हो गए। पार्कों में सुबह की सैर करने वाले लोगों की संख्या में भारी गिरावट देखी गई और शहर के मुख्य चौराहों पर लोग अलाव जलाकर सर्दी से बचते नजर आए।


कोहरे का ‘ब्लैकआउट’ और यातायात पर असर

सोमवार सुबह श्रीगंगानगर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में कोहरे का घनत्व इतना अधिक था कि दृश्यता (Visibility) शून्य से 20-30 मीटर तक सिमट कर रह गई। इस ‘व्हाइट आउट’ स्थिति का सीधा असर परिवहन सेवाओं पर पड़ा:

  1. सड़क यातायात: नेशनल हाईवे और लिंक रोड पर वाहनों की रफ्तार थम सी गई। वाहन चालकों को दिन में भी हेडलाइट और इंडिकेटर का सहारा लेना पड़ा। श्रीगंगानगर-बीकानेर और श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ मार्ग पर चलने वाली बसों और निजी वाहनों को अत्यधिक सावधानी बरतनी पड़ी, जिससे गंतव्य तक पहुँचने में देरी हुई।

  2. रेलवे की रफ्तार थमी: घने कोहरे के कारण उत्तर-पश्चिम रेलवे की कई ट्रेनें अपने निर्धारित समय से देरी से चलीं। लंबी दूरी की ट्रेनें, जो पंजाब और दिल्ली की ओर से आ रही थीं, कोहरे के कारण सुरक्षित गति से संचालित की गईं, जिससे यात्रियों को स्टेशनों पर घंटों इंतजार करना पड़ा।


आम जनजीवन और स्वास्थ्य पर प्रभाव

सर्दी के इस दूसरे दौर ने न केवल आवागमन बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य को भी प्रभावित किया है। कोहरे के कारण सुबह खुलने वाले बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि इस बदलते मौसम और ठंडी हवाओं के कारण सांस के रोगियों, बुजुर्गों और बच्चों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। अस्पतालों में सर्दी-जुकाम और वायरल के मामलों में भी बढ़ोतरी देखी गई है।


पश्चिमी विक्षोभ: क्या कहता है मौसम विभाग?

मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, वर्तमान में एक नया पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) हिमालयी क्षेत्रों में सक्रिय हो रहा है। इसका असर मैदानी इलाकों में भी देखने को मिलेगा।

“आने वाले 48 घंटों में आसमान में बादल छाए रहने और श्रीगंगानगर सहित आसपास के क्षेत्रों में हल्की बूंदाबांदी होने की प्रबल संभावना है। यदि बारिश होती है, तो कोहरा छंट सकता है, लेकिन तापमान में गिरावट आने से गलन और बढ़ सकती है।”


किसानों के लिए उम्मीद और चिंता

श्रीगंगानगर के किसानों के लिए यह मौसम मिला-जुला असर लेकर आया है। जहां एक ओर कोहरा और कम तापमान गेहूं और सरसों की फसल के लिए ‘अमृत’ के समान माना जाता है (क्योंकि यह दानों की गुणवत्ता बढ़ाता है), वहीं दूसरी ओर यदि ओलावृष्टि या भारी बारिश होती है, तो तैयार फसलों को नुकसान का खतरा भी बना रहता है।

निष्कर्ष

2 फरवरी की इस कड़ाके की ठंड ने प्रशासन और आम जनता को सतर्क कर दिया है। जब तक सूर्यदेव के दर्शन पूरी तरह नहीं होते और पश्चिमी विक्षोभ का असर खत्म नहीं होता, तब तक श्रीगंगानगर वासियों को इस ‘सफेद आफत’ और ठिठुरन से जूझना पड़ेगा।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️