
राजस्थान के शिक्षा विभाग द्वारा सरकारी विद्यालयों में शैक्षणिक स्तर और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए शुरू किया गया ‘शाला संबलन अभियान’ वर्तमान में श्रीगंगानगर जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। 18 जनवरी 2026 को जारी ताज़ा समीक्षा रिपोर्ट ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं, क्योंकि जिले की प्रगति अभी मात्र 54 प्रतिशत तक ही सीमित है।
1. क्या है शाला संबलन अभियान?
यह अभियान राज्य सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है जिसका मुख्य उद्देश्य सरकारी स्कूलों का निरीक्षण कर वहां की कमियों को दूर करना है। इसके तहत शिक्षा अधिकारी और ब्लॉक स्तर के निरीक्षक स्कूलों में जाकर निम्नलिखित बिंदुओं की जांच करते हैं:
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विद्यार्थियों का लर्निंग लेवल: छात्र अपनी कक्षा के स्तर के अनुसार पढ़ और लिख पा रहे हैं या नहीं।
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शिक्षकों की उपस्थिति और शिक्षण पद्धति: शिक्षक आधुनिक तरीकों और टीएलएम (Teaching Learning Material) का उपयोग कर रहे हैं या नहीं।
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बुनियादी सुविधाएं: मिड-डे मील की गुणवत्ता, पेयजल, शौचालय और खेल के मैदानों की स्थिति।
2. श्रीगंगानगर की रिपोर्ट: 54% प्रगति के मायने
हालिया रिपोर्ट के अनुसार, श्रीगंगानगर जिला लक्ष्य से काफी पीछे चल रहा है। 54% की प्रगति यह दर्शाती है कि जिले के आधे से अधिक स्कूलों में या तो निरीक्षण का कार्य अधूरा है या फिर वहां निरीक्षण के दौरान गंभीर कमियां पाई गई हैं जिन्हें अभी तक सुधारा नहीं गया है।
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पिछड़ने के कारण: अधिकारियों का मानना है कि सर्दी की छुट्टियों और हालिया कोहरे के कारण निरीक्षण की गति धीमी रही है। इसके अलावा, कई स्कूलों में रिक्त पदों के चलते भी डेटा फीडिंग और शैक्षणिक गतिविधियों में देरी हुई है।
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डाटा एंट्री में लापरवाही: शाला संबलन ऐप पर समय पर जानकारी अपडेट न करना भी प्रगति रिपोर्ट कम रहने का एक बड़ा तकनीकी कारण बताया जा रहा है।
3. प्रशासन का सख्त रुख: धरातलीय मॉनिटरिंग के निर्देश
54% के चिंताजनक आंकड़े को देखते हुए, श्रीगंगानगर जिला कलेक्टर और मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी (CDEO) ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रशासन ने अब ‘डेस्क मॉनिटरिंग’ के बजाय ‘ग्राउंड मॉनिटरिंग’ पर जोर देने के निर्देश दिए हैं।
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अधिकारियों की जवाबदेही: अब ब्लॉक प्रारंभिक शिक्षा अधिकारियों (BEEO) को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया जाएगा। यदि किसी ब्लॉक की प्रगति रिपोर्ट में सुधार नहीं होता है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
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आकस्मिक निरीक्षण: अब निरीक्षण पूर्व-निर्धारित नहीं होंगे। अधिकारी बिना किसी सूचना के स्कूलों में पहुंचेंगे ताकि वास्तविक स्थिति का पता चल सके।
4. सुधार के लिए आगामी कार्ययोजना
प्रशासन ने आगामी 15 दिनों के भीतर प्रगति को 80% से ऊपर ले जाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए विशेष ‘संबलन दल’ गठित किए गए हैं। इन दलों का काम न केवल कमियां निकालना है, बल्कि शिक्षकों को मौके पर ही मार्गदर्शन देना भी है ताकि बच्चों के सीखने के स्तर (Learning Outcome) में सुधार हो सके।
निष्कर्ष: श्रीगंगानगर को ‘शिक्षा का हब’ माना जाता है, ऐसे में शाला संबलन अभियान में 54% की रैंकिंग जिले की प्रतिष्ठा के अनुकूल नहीं है। प्रशासन की इस सख्ती और धरातलीय सक्रियता से उम्मीद जगी है कि आने वाले हफ्तों में सरकारी स्कूलों की स्थिति में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।