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श्रीगंगानगर में ‘विजिबिलिटी शून्य’: कोहरे की चादर में लिपटा सीमावर्ती शहर, जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त

श्रीगंगानगर। उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बीच, राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर में 4 जनवरी को प्रकृति का रौद्र रूप देखने को मिला। आज सुबह पूरा शहर और ग्रामीण अंचल घने कोहरे की एक ऐसी मोटी सफेद चादर में लिपटा रहा कि दृश्यता (Visibility) घटकर शून्य रह गई। यह स्थिति न केवल वाहन चालकों के लिए काल बनी, बल्कि आम जनजीवन की रफ्तार पर भी पूरी तरह से ब्रेक लगा दिया।

यातायात पर पड़ा सबसे बुरा असर

सुबह के समय जब शहर जाग रहा था, तब सड़कों पर सन्नाटा सा पसरा था। जो लोग जरूरी काम से बाहर निकले, उन्हें भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। श्रीगंगानगर-सूरतगढ़ नेशनल हाईवे और बीकानेर रोड पर स्थिति सबसे ज्यादा खराब रही।

  • रोडवेज और निजी बसें: राजस्थान रोडवेज की बसों के पहिए लगभग थम से गए। चालकों को दिन के उजाले में भी हाई-बीम हेडलाइट्स और फॉग लाइट्स का सहारा लेना पड़ा। इसके बावजूद, सड़क पर 5-10 फीट दूर का नजारा भी धुंधला था। कई बसें अपने निर्धारित समय से 3 से 4 घंटे की देरी से पहुंचीं।

  • रेलवे और हवाई यातायात: घने कोहरे का असर केवल सड़क पर ही नहीं, बल्कि पटरियों पर भी दिखा। श्रीगंगानगर आने वाली लंबी दूरी की ट्रेनें घंटों की देरी से चल रही थीं, जिससे यात्रियों को कड़ाके की ठंड में स्टेशन पर इंतजार करने को मजबूर होना पड़ा।

शून्य विजिबिलिटी और जोखिम

विशेषज्ञों के अनुसार, जब दृश्यता शून्य होती है, तो यह ड्राइविंग के लिए सबसे खतरनाक स्थिति मानी जाती है। सुबह 6 बजे से लेकर 10 बजे तक स्थिति ऐसी थी कि सड़कों के किनारे लगे साइन बोर्ड और डिवाइडर भी दिखाई नहीं दे रहे थे। स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को सावधानी बरतने और बहुत जरूरी न होने पर वाहन न चलाने की सलाह जारी की।

खेती और किसानों पर प्रभाव

श्रीगंगानगर एक कृषि प्रधान जिला है। इस घने कोहरे और ओस की बूंदों का असर रबी की फसलों, विशेषकर गेहूं और सरसों पर पड़ रहा है। हालांकि, कृषि जानकारों का मानना है कि हल्की धुंध गेहूं के लिए फायदेमंद हो सकती है, लेकिन यदि यह पाले (Frost) में बदल गई, तो सरसों की फसल को भारी नुकसान हो सकता है। किसान अपनी फसलों को बचाने के लिए खेतों की मेड़ों पर धुआं करते हुए देखे गए।

व्यापार और दैनिक मजदूरी प्रभावित

कोहरे और हाड़ कपाने वाली ठंड के कारण बाजारों में भी रौनक गायब रही। सुबह जल्दी खुलने वाली दुकानें दोपहर 11-12 बजे तक बंद रहीं। रेहड़ी-पटरी वालों और दिहाड़ी मजदूरों के लिए यह मौसम दोहरी मार लेकर आया है। ठंड के कारण निर्माण कार्य और अन्य खुले में होने वाले काम लगभग बंद पड़े हैं, जिससे आर्थिक गतिविधियां सुस्त पड़ गई हैं।

प्रशासनिक सतर्कता और आगामी चेतावनी

मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले 48 घंटों तक श्रीगंगानगर सहित हनुमानगढ़ और आसपास के बेल्ट में इसी तरह का घना कोहरा बना रह सकता है। जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग को भी अलर्ट पर रखा है, क्योंकि इस मौसम में हृदय और श्वास संबंधी रोगों के मामले बढ़ने की संभावना रहती है।

निष्कर्ष: 4 जनवरी की सुबह श्रीगंगानगर के इतिहास की इस सीजन की सबसे धुंधली सुबह रही। शून्य विजिबिलिटी ने न केवल सुरक्षा की दृष्टि से चिंता बढ़ाई है, बल्कि शहर की जीवनशैली को भी सुस्त कर दिया है। प्रशासन और पुलिस लगातार गश्त कर रहे हैं ताकि किसी भी प्रकार की सड़क दुर्घटना से बचा जा सके।

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