
श्रीगंगानगर। उत्तर भारत में सक्रिय हुए एक नए वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) ने राजस्थान के सरहदी जिले श्रीगंगानगर सहित पूरे पश्चिमी राजस्थान के मौसम का गणित बिगाड़ दिया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आगामी 24 से 48 घंटों के लिए विशेष बुलेटिन जारी करते हुए धूल भरी आंधी, मेघगर्जन और कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश के साथ ओलावृष्टि की चेतावनी दी है। रेगिस्तानी इलाकों में अचानक आए इस बदलाव ने न केवल आम जनजीवन को प्रभावित किया है, बल्कि पककर तैयार खड़ी और कटी हुई फसलों को लेकर किसानों की धड़कनें भी तेज कर दी हैं।
सक्रिय हुआ ताकतवर पश्चिमी विक्षोभ
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के ऊपर बने एक चक्रवाती तंत्र के कारण अरब सागर से नमी वाली हवाएं राजस्थान की ओर बढ़ रही हैं। इसका सीधा असर श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर और जैसलमेर जैसे जिलों में देखने को मिल रहा है। आज सुबह से ही आसमान में बादलों की आवाजाही शुरू हो गई है और हवा की गति में तेजी दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है, जिसमें 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से अंधड़ चलने की संभावना जताई गई है।
किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें
श्रीगंगानगर जिला, जिसे ‘राजस्थान का अन्न भंडार’ कहा जाता है, इस समय रबी की फसल की कटाई और थ्रेसिंग के महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है। खेतों में गेहूं, सरसों और चने की फसलें या तो कट चुकी हैं या कटने की कगार पर हैं। ऐसे समय में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि का खतरा किसी आपदा से कम नहीं है।
किसानों की मुख्य चिंताएं:
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कटी हुई फसल: मंडियों और खेतों में खुले में पड़ी सरसों की फसल भीगने से उसकी गुणवत्ता खराब हो सकती है और तेल की मात्रा कम हो सकती है।
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गेहूं की चमक: बारिश होने से गेहूं के दानों का रंग काला पड़ सकता है, जिससे बाजार में किसानों को उचित दाम नहीं मिल पाएगा।
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कटाई में देरी: मिट्टी गीली होने से कंबाइन हार्वेस्टर और थ्रेसर चलाने में दिक्कत आएगी, जिससे फसल का सीजन लंबा खिंच जाएगा।
गंगानगर के स्थानीय किसान नेताओं ने प्रशासन से मांग की है कि मंडियों में तिरपाल और अनाज ढकने की पुख्ता व्यवस्था की जाए ताकि किसानों की सालभर की मेहनत पर पानी न फिरे।
आम जनजीवन और तापमान पर असर
धूल भरी आंधी के कारण दृश्यता (Visibility) कम होने से नेशनल हाईवे पर यातायात प्रभावित होने की आशंका है। बिजली विभाग ने भी अलर्ट जारी किया है क्योंकि तेज हवाओं के चलते पेड़ गिरने और बिजली के पोल टूटने से आपूर्ति बाधित हो सकती है। हालांकि, इस बदलाव से पिछले कुछ दिनों से पड़ रही भीषण गर्मी से राहत मिली है। अधिकतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे मौसम खुशनुमा तो होगा, लेकिन धूल भरी हवाएं एलर्जी और सांस के मरीजों के लिए परेशानी खड़ी कर सकती हैं।
प्रशासन की एडवायजरी: क्या करें और क्या न करें
जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने किसानों और आम नागरिकों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
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किसानों के लिए: कटी हुई फसल को ऊंचे स्थानों पर रखें और तिरपाल से ढककर सुरक्षित करें। सिंचाई और कीटनाशकों का छिड़काव फिलहाल टाल दें।
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आम नागरिकों के लिए: आंधी के दौरान कच्चे मकानों, पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे शरण न लें। घर के अंदर रहें और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को अनप्लग कर दें।
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वाहन चालकों के लिए: धूल के गुबार के दौरान वाहनों की हेडलाइट ऑन रखें और सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
निष्कर्ष
प्रकृति के इस अनिश्चित व्यवहार ने एक बार फिर कुदरत के आगे इंसान की बेबसी को उजागर किया है। जहाँ एक ओर शहरवासी गर्मी से राहत की उम्मीद कर रहे हैं, वहीं अन्नदाता आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठा है कि कहीं उसकी मेहनत ‘मावठ’ की भेंट न चढ़ जाए। अगले 48 घंटे श्रीगंगानगर की अर्थव्यवस्था और कृषि परिदृश्य के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहने वाले हैं। मौसम विभाग लगातार उपग्रह चित्रों के जरिए स्थिति पर नजर बनाए हुए है और पल-पल की जानकारी साझा कर रहा है।