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श्रीगंगानगर में महिला अपराध पर राष्ट्रीय महिला आयोग सख्त: जिला प्रशासन से मांगी रिपोर्ट, कई आरोपी गिरफ्तार

श्रीगंगानगर। राजस्थान के सरहदी जिले श्रीगंगानगर में दर्ज महिला सुरक्षा से जुड़े एक गंभीर और संवेदनशील अपराध मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है। नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने इस घटना का स्वतः संज्ञान लेते हुए श्रीगंगानगर जिला प्रशासन और पुलिस विभाग से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने पीड़िता को त्वरित न्याय दिलाने, सुरक्षा प्रदान करने और मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए हैं। वहीं दूसरी ओर, स्थानीय पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले में संलिप्त मुख्य आरोपियों सहित कई सहयोगियों को गिरफ्तार कर लिया है।

क्या है पूरा मामला?

घटना श्रीगंगानगर जिले के एक थाना क्षेत्र की है, जहाँ पीड़िता के साथ हुई गंभीर आपराधिक वारदात और उत्पीड़न का मामला सामने आया था। आरोपियों ने न केवल पीड़िता के साथ दरिंदगी और मारपीट की, बल्कि घटना की वीडियो क्लिप बनाकर उसे ब्लैकमेल करने और जान से मारने की धमकियां भी दीं।

पीड़िता द्वारा परिजनों के साथ पुलिस थाने पहुंचकर आपबीती बताने के बाद पुलिस ने पोक्सो/भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संगीन और गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। मामला सोशल मीडिया और मीडिया के जरिए उजागर होने के बाद इसकी संवेदनशीलता को देखते हुए राष्ट्रीय स्तर पर हलचल मच गई।

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) का हस्तक्षेप और कड़े निर्देश

मामले की गंभीरता, क्रूरता और महिला सुरक्षा पर उठे सवालों को देखते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग ने त्वरित कार्रवाई की। आयोग की अध्यक्ष ने श्रीगंगानगर जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (SP) को पत्र भेजकर पूरे घटनाक्रम का ब्योरा मांगा है।

राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा जारी पत्र में निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी गई है:

  • जांच की प्रगति: प्राथमिकी (FIR) दर्ज होने के बाद से अब तक की गई कानूनी कार्रवाई की विस्तृत स्थिति।

  • पीड़िता की सुरक्षा व उपचार: पीड़िता को प्रदान की गई चिकित्सा सहायता, परामर्श (Counselling) और पुलिस सुरक्षा का ब्योरा।

  • अधिकारियों की जवाबदेही: क्या मामले की सुनवाई या एफआईआर दर्ज करने में किसी स्थानीय स्तर पर लापरवाही हुई है या नहीं।

आयोग ने प्रशासन को 48 से 72 घंटे के भीतर पूरी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं ताकि पीड़िता के अधिकारों का हनन न हो सके।

पुलिस की ताबड़तोड़ दबिश: कई आरोपी सलाखों के पीछे

महिला आयोग के रुख और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए श्रीगंगानगर पुलिस एक्शन मोड में आ गई। पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में एक विशेष वृत्ताधिकारी (CO) के नेतृत्व में SIT का गठन किया गया। पुलिस की अलग-अलग टीमों ने संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की।

तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस ने मुख्य आरोपी सहित उसके 3 से 4 अन्य सहयोगियों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पुलिस रिमांड लेकर गहन पूछताछ की जा रही है तथा घटना में प्रयुक्त मोबाइल फोन और अन्य साक्ष्य जब्त कर लिए गए हैं।

प्रशासन का आश्वासन

जिला पुलिस प्रशासन ने राष्ट्रीय महिला आयोग को समय पर रिपोर्ट भेजने का आश्वासन दिया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है:

“महिला अपराधों के प्रति श्रीगंगानगर पुलिस शून्य सहनशीलता (Zero Tolerance) की नीति पर काम करती है। पीड़ित पक्ष को पूरा न्याय दिलाया जाएगा। मामले की केस ऑफिसर स्कीम (Case Officer Scheme) के तहत केस चलाकर कोर्ट में जल्द से जल्द चालान पेश किया जाएगा ताकि आरोपियों को कठोरतम सजा दिलाई जा सके।”

महिला सुरक्षा पर उठे सवाल और प्रशासनिक सतर्कता

इस घटना के बाद जिले में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय सामाजिक संगठनों और नागरिक समूहों ने भी अपराधियों के खिलाफ त्वरित व सख्त सजा की मांग की है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि जिले में सार्वजनिक स्थानों, शैक्षणिक संस्थानों और संवेदनशील इलाकों में पुलिस गश्त बढ़ाई जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।

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