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श्रीगंगानगर में भीषण गर्मी का तांडव: 41°C के पार पहुंचा पारा, जनजीवन अस्त-व्यस्त

श्रीगंगानगर: राजस्थान का ‘धान का कटोरा’ कहा जाने वाला श्रीगंगानगर जिला अब अपनी पुरानी पहचान यानी ‘देश के सबसे गर्म इलाकों’ की सूची में वापस लौट आया है। आज, 21 अप्रैल 2026 को जिले में भीषण गर्मी का प्रकोप देखा गया, जहाँ अधिकतम तापमान 41°C के आंकड़े को पार कर गया। सूरज की तपिश और गर्म हवाओं (लू) ने आम जनजीवन की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है।


सुबह से ही दिखने लगे तपिश के तेवर

आज सुबह सूरज की पहली किरण के साथ ही गर्मी का अहसास होने लगा था। सुबह 10 बजे तक ही धूप इतनी तीखी हो गई कि पैदल चलने वालों और दुपहिया वाहन चालकों के लिए सड़कों पर निकलना दूभर हो गया। न्यूनतम तापमान भी 27°C दर्ज किया गया, जिससे रात के समय भी लोगों को गर्मी से राहत नहीं मिल पाई। हवा की गति धीमी होने और आर्द्रता (Humidity) के कम स्तर ने इस तपिश को और अधिक कष्टकारी बना दिया।

बाजारों में सन्नाटा और सड़कों पर सन्नाटा

गर्मी का सबसे बड़ा असर स्थानीय बाजारों और व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ा। दोपहर 12 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक शहर के मुख्य बाजारों जैसे गोल बाजार, सुखाड़िया सर्कल और पुरानी आबादी के क्षेत्रों में सन्नाटा पसरा रहा। दुकानदारों का कहना है कि भीषण गर्मी के कारण ग्राहक घरों से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।

सड़कों पर इक्का-दुक्का लोग ही नजर आए, जो पूरी तरह से चेहरे को ढंककर और सनग्लासेस लगाकर यात्रा कर रहे थे। शहर के मुख्य चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस कर्मियों के लिए भी ड्यूटी करना एक बड़ी चुनौती बन गया है।


लू (Loo) का बढ़ता खतरा और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं

श्रीगंगानगर की गर्मी की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ चलने वाली ‘लू’ है। आज दोपहर में गर्म हवाओं के थपेड़ों ने लोगों को झुलसाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। चिकित्सा विशेषज्ञों ने चेतावनी जारी की है कि ऐसी स्थिति में Heat Stroke (लू लगना) का खतरा काफी बढ़ जाता है।

राजकीय चिकित्सालय और निजी क्लीनिकों में डिहाइड्रेशन, उल्टी-दस्त, सिरदर्द और घबराहट के मरीजों की संख्या में अचानक बढ़ोतरी देखी गई है। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि:

  • दोपहर के समय घर से बाहर निकलने से बचें।

  • ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थों (जैसे नींबू पानी, छाछ, ओआरएस) का सेवन करें।

  • सूती और हल्के रंग के कपड़े पहनें।

  • खाली पेट धूप में बिल्कुल न निकलें।

बेजुबान पक्षियों और जानवरों पर संकट

भीषण गर्मी का असर सिर्फ इंसानों पर ही नहीं, बल्कि बेजुबान पशु-पक्षियों पर भी पड़ रहा है। पानी के स्रोत सूखने और चिलचिलाती धूप के कारण पक्षी पेड़ों की छांव की तलाश में भटकते देखे गए। स्थानीय स्वयंसेवी संगठनों ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने घरों की छतों और छज्जों पर परिंडे बांधें और नियमित रूप से उनमें पानी भरें ताकि इन बेजुबानों की प्यास बुझ सके।


मौसम विभाग की चेतावनी: अभी तो शुरुआत है

मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, श्रीगंगानगर और आसपास के इलाकों में अगले 48 से 72 घंटों के दौरान गर्मी और अधिक प्रचंड हो सकती है। विभाग ने ‘येलो अलर्ट’ जारी करते हुए कहा है कि आने वाले दिनों में पारा 43°C से 45°C तक पहुंच सकता है। पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता न होने के कारण फिलहाल बारिश या धूल भरी आंधी की भी कोई संभावना नहीं है, जिससे राहत की उम्मीद धुंधली नजर आ रही है।

कृषि और जल संकट की चिंता

श्रीगंगानगर एक कृषि प्रधान जिला है, ऐसे में अचानक बढ़ी इस गर्मी ने किसानों की चिंता भी बढ़ा दी है। तेज धूप के कारण खेतों में नमी कम हो रही है, जिससे सब्जियों और चारे की फसलों को अधिक पानी की आवश्यकता पड़ रही है। वहीं, नहरों में पानी की उपलब्धता और पेयजल आपूर्ति को सुचारू बनाए रखना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।

निष्कर्ष: श्रीगंगानगर के निवासियों के लिए आने वाले दिन अग्निपरीक्षा जैसे होने वाले हैं। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और गर्मी से बचने के सभी एहतियाती उपाय अपनाने की अपील की है। फिलहाल, पूरा जिला इंद्रदेव से थोड़ी राहत और ठंडी हवाओं की गुहार लगा रहा है।

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