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श्रीगंगानगर में ‘भारत बंद’ का मिला-जुला असर: मंडियों में पसरा सन्नाटा, पर पटरी पर दौड़ता रहा शहर

श्रीगंगानगर। आज 12 फरवरी को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और विभिन्न किसान संगठनों द्वारा अपनी मांगों के समर्थन में बुलाए गए ‘भारत बंद’ का असर राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर में आंशिक और मिला-जुला रहा। जहां एक ओर शहर के मुख्य बाजारों और परिवहन सेवाओं पर इसका प्रभाव कम दिखा, वहीं जिले की आर्थिक रीढ़ मानी जाने वाली कृषि मंडियों में पूरी तरह काम-काज ठप रहा। प्रशासन की मुस्तैदी के कारण कहीं भी अप्रिय घटना की खबर नहीं मिली और जनजीवन सामान्य रूप से चलता रहा।

कृषि मंडियों में दिखा व्यापक असर

श्रीगंगानगर को ‘राजस्थान का अन्न भंडार’ कहा जाता है, इसलिए यहां की मंडियों की हलचल पूरे जिले की अर्थव्यवस्था को दर्शाती है। आज बंद के आह्वान का सबसे बड़ा असर इन्हीं मंडियों में देखने को मिला।

  • मजदूरों की हड़ताल: मंडी के पल्लेदारों, तुलावटियों और अन्य मजदूरों ने सुबह से ही काम बंद रखा। उनका कहना था कि बढ़ती महंगाई और श्रम कानूनों में बदलाव के विरोध में वे इस बंद का समर्थन कर रहे हैं।

  • व्यापार ठप: मजदूरों के काम न करने के कारण अनाज की बोली नहीं लग पाई, जिससे करोड़ों रुपये का व्यापार प्रभावित हुआ। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले किसान भी अपनी उपज लेकर कम संख्या में पहुंचे।

बाजार और यातायात: सामान्य रही स्थिति

मंडियों के उलट, श्रीगंगानगर शहर के मुख्य बाजारों जैसे गोल बाजार, सुखाड़िया सर्कल और पुरानी आबादी में स्थिति सामान्य रही।

  • दुकानें खुली रहीं: सुबह कुछ संगठनों ने बाजार बंद कराने का प्रयास जरूर किया, लेकिन व्यापारिक संगठनों के पूर्ण समर्थन न होने के कारण अधिकांश दुकानें दोपहर तक खुल गईं।

  • स्कूल और बोर्ड परीक्षाएं: आज का सबसे संवेदनशील पहलू बोर्ड परीक्षाएं थीं। जिला प्रशासन ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि परीक्षाओं में किसी भी प्रकार का व्यवधान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए निजी और सरकारी बसें सुचारू रूप से चलती रहीं, जिससे छात्रों को अपने केंद्रों तक पहुँचने में कोई परेशानी नहीं हुई।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम: चप्पे-चप्पे पर पुलिस

बंद के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह सतर्क नजर आया।

  • फ्लैग मार्च: संवेदनशील इलाकों और चौराहों पर पुलिस की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात की गईं। सुबह के वक्त पुलिस ने कुछ मुख्य मार्गों पर फ्लैग मार्च भी निकाला ताकि आमजन में सुरक्षा का भाव बना रहे।

  • शांतिपूर्ण प्रदर्शन: विभिन्न यूनियनों के कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट के सामने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार के नाम अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। उनकी मुख्य मांगों में पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लागू करना, न्यूनतम वेतन में वृद्धि और संविदा प्रथा को समाप्त करना शामिल था।

आम जनता की राय

बंद को लेकर जनता की राय बंटी हुई दिखी। जहां मजदूर और कर्मचारी इसे अपने हक की लड़ाई मान रहे थे, वहीं मध्यम वर्ग और व्यापारियों का कहना था कि बार-बार बंद होने से आर्थिक नुकसान होता है। हालांकि, सभी ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और हिंसा या तोड़फोड़ जैसी कोई घटना नहीं हुई।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, श्रीगंगानगर में ‘भारत बंद’ का आह्वान ‘आंशिक सफल’ रहा। मंडियों की तालाबंदी ने जरूर सरकार तक अपना संदेश पहुँचाया, लेकिन आम नागरिक की दिनचर्या और शिक्षा व्यवस्था पर इसका नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ने दिया गया। प्रशासन की रणनीतिक तैयारी ने यह सुनिश्चित किया कि विरोध और व्यवस्था के बीच एक संतुलन बना रहे।

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