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श्रीगंगानगर में बैंक कर्मियों का हल्ला बोल: 5-दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग को लेकर प्रदर्शन

श्रीगंगानगर। अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर आज श्रीगंगानगर जिले के बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों ने यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के बैनर तले जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। शहर के हृदय स्थल बीरबल चौक स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की मुख्य शाखा के बाहर एकत्रित हुए सैकड़ों बैंक कर्मियों ने केंद्र सरकार और भारतीय बैंक संघ (IBA) के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

मुख्य मांग: 5-दिवसीय कार्य सप्ताह (5-Day Banking)

प्रदर्शनकारियों की सबसे प्रमुख मांग बैंकों में सप्ताह में केवल पांच दिन कार्य प्रणाली लागू करना है। वर्तमान में बैंकों में दूसरे और चौथे शनिवार को अवकाश रहता है, लेकिन कर्मचारी संगठन मांग कर रहे हैं कि इसे पूर्ण रूप से लागू किया जाए और हर शनिवार को बैंक बंद रखे जाएं।

यूनियन नेताओं का तर्क है कि:

  • आधुनिक बैंकिंग के बढ़ते दबाव और तकनीकी जटिलताओं के कारण कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।

  • अन्य सरकारी विभागों और आईटी सेक्टर की तरह बैंकिंग क्षेत्र में भी ‘वर्क-लाइफ बैलेंस’ की सख्त जरूरत है।

  • डिजिटल बैंकिंग (Mobile Banking, UPI) के विस्तार के कारण ग्राहकों को शनिवार को शाखा आने की आवश्यकता कम हो गई है।

करोड़ों का लेनदेन हुआ प्रभावित

इस एक दिवसीय सांकेतिक प्रदर्शन और कार्य बहिष्कार के कारण श्रीगंगानगर जिले की करीब 150 से अधिक बैंक शाखाओं में कामकाज पूरी तरह ठप रहा। शुरुआती अनुमानों के अनुसार:

  1. चेक क्लियरिंग: जिले में लगभग 50 से 70 करोड़ रुपये के चेक क्लियरिंग का काम अटक गया।

  2. नकद लेनदेन: व्यापारियों और आम जनता को नकद जमा करने और निकालने में भारी असुविधा हुई।

  3. ऋण प्रक्रिया: ऋण संबंधी फाइलें और अन्य कागजी कार्यवाही एक दिन के लिए पूरी तरह रुक गई।

  4. एटीएम पर दबाव: बैंक शाखाएं बंद होने के कारण शहर के एटीएम पर दबाव बढ़ गया, जिससे दोपहर बाद कई मशीनों में कैश खत्म होने की शिकायतें भी आईं।


प्रदर्शन में गूंजे नारे

प्रदर्शन के दौरान बैंक कर्मचारियों ने हाथों में तख्तियां ले रखी थीं, जिन पर “5-डे बैंकिंग लागू करो”, “हमारी मांगें पूरी हो” और “कर्मचारी एकता जिंदाबाद” जैसे नारे लिखे थे। प्रदर्शन को संबोधित करते हुए स्थानीय यूनियन पदाधिकारियों ने कहा कि यदि सरकार उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं करती है, तो आगामी दिनों में बेमियादी हड़ताल (Indefinite Strike) जैसा कड़ा कदम उठाया जा सकता है।

आम जनता पर असर

हालांकि बैंक यूनियनों ने पहले ही हड़ताल की सूचना दे दी थी, लेकिन फिर भी ग्रामीण इलाकों से आए कई किसान और पेंशनभोगी परेशान नजर आए। विशेष रूप से मंडियों में फसलों के भुगतान को लेकर आए किसानों को बैंक के ताले देखकर खाली हाथ लौटना पड़ा। व्यापारियों का कहना है कि बैंकिंग बंद होने से व्यापारिक चक्र (Business Cycle) धीमा पड़ जाता है, जिससे आर्थिक नुकसान होता है।


आगे की राह

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक चेतावनी है। यदि 5-दिवसीय कार्य सप्ताह, नई पेंशन योजना (NPS) को रद्द कर पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाली और वेतन विसंगतियों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो दिल्ली स्तर पर बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

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