
श्रीगंगानगर। राजस्थान के उत्तरी छोर पर स्थित सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर में आज मौसम ने अचानक करवट बदली है। पिछले कुछ दिनों से बढ़ रही तपिश और चिलचिलाती धूप के बीच आए इस बदलाव ने जिलेवासियों को जेठ जैसी गर्मी से बड़ी राहत दिलाई है। हिमालयी क्षेत्रों में सक्रिय हुए एक ताजा पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव से आज 30 मार्च की सुबह से ही आसमान में बादलों का डेरा जमा रहा, जिसके बाद जिले के विभिन्न हिस्सों में हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश दर्ज की गई।
सुबह से ही बदला मिजाज
सोमवार सुबह जब जिले के लोग सोकर उठे, तो मौसम पूरी तरह बदला हुआ था। सूरज की तीखी किरणों की जगह ठंडी हवाओं और घने काले बादलों ने ले ली थी। सुबह करीब 8 बजे के बाद शहर के साथ-साथ सादुलशहर, पदमपुर, रायसिंहनगर और सूरतगढ़ जैसे उपखंडों में भी रिमझिम बारिश का दौर शुरू हुआ। कहीं-कहीं तेज बौछारें भी गिरीं, जिससे सड़कों पर पानी जमा हो गया और धूल भरी हवाओं से निजात मिली।
तापमान में भारी गिरावट
मार्च के अंत में आमतौर पर श्रीगंगानगर का तापमान 35 से 38 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचने लगता है, लेकिन इस बेमौसम बारिश ने पारे को नीचे धकेल दिया है। मौसम विभाग के अनुसार, दिन के अधिकतम तापमान में 4 से 6 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है। ठंडी हवाओं के चलने से वातावरण में नमी बढ़ गई है, जिससे दोपहर के समय महसूस होने वाली उमस और लू जैसी स्थिति पूरी तरह समाप्त हो गई है। पार्कों और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को इस सुहावने मौसम का आनंद लेते देखा गया।
किसानों की चिंता और राहत का मिला-जुला असर
मौसम का यह बदलाव खेती-किसानी के नजरिए से मिश्रित प्रभाव लेकर आया है।
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सरसों और गेहूं की कटाई: वर्तमान में जिले में सरसों की कटाई लगभग पूरी हो चुकी है और गेहूं की फसल पककर तैयार है। कई स्थानों पर कटाई का काम जोरों पर है। ऐसे में अचानक हुई बारिश ने उन किसानों की चिंता बढ़ा दी है जिनकी फसलें अभी खेतों में खुली पड़ी हैं या मंडियों में खुले आसमान के नीचे रखी हैं।
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आने वाली फसलों के लिए लाभ: वहीं, कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस बारिश से भूमि की नमी बढ़ेगी, जो आने वाली नरमा और कपास की बिजाई के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। हालांकि, तेज हवाओं के साथ बारिश होने पर गेहूं की खड़ी फसल के गिरने (Lodging) का खतरा भी बना रहता है।
प्रशासन और विभाग की चेतावनी
मौसम विज्ञान केंद्र (IMD) जयपुर के अनुसार, इस पश्चिमी विक्षोभ का असर अगले 24 से 48 घंटों तक बना रह सकता है। विभाग ने श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों के लिए ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है।
“अगले 24 घंटों के दौरान जिले में कहीं-कहीं 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धूल भरी आंधी चलने, मेघगर्जन होने और हल्की वर्षा की संभावना है।”
प्रशासन ने किसानों को सलाह दी है कि वे कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थानों पर ढक कर रखें और मंडियों में तिरपाल आदि की व्यवस्था सुनिश्चित करें। बिजली विभाग को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं, क्योंकि आंधी के दौरान लाइनों में फॉल्ट आने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
शहर का नजारा
बारिश के बाद श्रीगंगानगर की सड़कों पर धूल बैठ गई है और प्रदूषण के स्तर में भी कमी आई है। शहर के मुख्य बाजारों, जैसे गोल बाजार और सुखाड़िया सर्कल पर लोगों ने चाय और पकौड़ों का आनंद लेकर इस बदले हुए मौसम का स्वागत किया। हालांकि, निचले इलाकों में मामूली जलभराव के कारण राहगीरों को थोड़ी परेशानी का सामना भी करना पड़ा, लेकिन गर्मी से मिली राहत के आगे यह समस्या गौण नजर आई।
निष्कर्ष: श्रीगंगानगर में 30 मार्च को हुई यह बारिश न केवल तापमान को नियंत्रित करने में सहायक सिद्ध हुई है, बल्कि इसने प्रकृति को भी एक नई ताजगी प्रदान की है। यदि आगामी दिनों में और बारिश होती है, तो यह आने वाले भीषण ग्रीष्मकाल की शुरुआत को कुछ समय के लिए टाल सकती है। फिलहाल, जिलेवासी इस ‘सुहावने ब्रेक’ का पूरा लुत्फ उठा रहे हैं।