
राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर में महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ सामने आई हालिया जघन्य घटनाओं पर राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने कड़ा संज्ञान लिया है। जिले में नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म और अनैतिक गतिविधियों में अवैध होटलों की संलिप्तता का खुलासा होने के बाद आयोग ने सीधे हस्तक्षेप किया है। राष्ट्रीय महिला आयोग ने श्रीगंगानगर के जिला मजिस्ट्रेट (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) को नोटिस जारी कर सख्त निर्देश दिए हैं तथा मामले में दर्ज प्राथमिकी, जांच की वर्तमान स्थिति और बिना पंजीकरण चल रहे अवैध होटलों व लॉज के खिलाफ की गई कार्रवाई पर 15 दिनों के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) तलब की है।
राष्ट्रीय महिला आयोग का स्वतः संज्ञान और हस्तक्षेप
श्रीगंगानगर में 13 वर्षीय नाबालिग बालिका के साथ हुए गैंगरेप और शहर के अवैध लॉज व होटलों में अनैतिक गतिविधियों के संचालन की मीडिया रिपोर्टों का संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग ने मामले की गंभीरता को रेखांकित किया। आयोग की अध्यक्षा ने स्पष्ट किया कि सीमावर्ती और संवेदनशील इलाकों में इस तरह के अपराधों का पनपना और अवैध व्यावसायिक ठिकानों का बेखौफ चलना स्थानीय पुलिस व प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
NCW ने अपने आधिकारिक पत्र में जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि पीड़िता को तत्काल आवश्यक चिकित्सा सहायता, मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग और राज्य सरकार की पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के तहत आर्थिक मुआवजा उपलब्ध कराया जाए।
15 दिनों में ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ प्रस्तुत करने का अल्टीमेटम
राष्ट्रीय महिला आयोग ने जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक को स्पष्ट समय सीमा देते हुए 15 दिनों के अंदर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है। इस रिपोर्ट में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर जवाब मांगा गया है:
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अपराधियों पर कानूनी कार्रवाई: पीड़िता की प्राथमिकी दर्ज होने से लेकर आरोपियों की गिरफ्तारी, साक्ष्य जुटाने तथा पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत की गई वैधानिक प्रगति का ब्योरा।
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अवैध होटलों व लॉज का सर्वे: जिले भर में बिना वैध अनुमति, सराय एक्ट का उल्लंघन कर या नगर परिषद की मंजूरी के बिना संचालित हो रहे होटलों, पेइंग गेस्ट (PG) और गेस्ट हाउसों की सूची व उनके खिलाफ की गई दंडात्मक कार्रवाई।
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जांच अधिकारी की जवाबदेही: क्या पूर्व में इन अवैध ठिकानों की शिकायत मिलने पर स्थानीय पुलिस या प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा कोई लापरवाही बरती गई थी? यदि हां, तो उन पर क्या विभागीय कदम उठाए गए।
अवैध होटलों और लॉज के खिलाफ व्यापक अभियान
आयोग की इस सख्त हिदायत के बाद श्रीगंगानगर के प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। जिला प्रशासन ने तुरंत प्रभाव से नगर परिषद, पुलिस और पर्यटन विभाग की संयुक्त टीमों का गठन कर जिले भर के होटलों की जांच का विशेष अभियान शुरू कर दिया है।
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पंजीकरण व सुरक्षा मानकों की जांच: शहर व ग्रामीण क्षेत्रों के सभी लॉज और होटलों में सीसीटीवी कैमरों की कार्यप्रणाली, आगंतुक रजिस्टरों (Visitor Registers) के रख-रखाव और ग्राहकों के पहचान पत्रों की गहन जांच की जा रही है।
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अवैध ढांचों की सीलिंग: नियमों का उल्लंघन कर चलाए जा रहे व्यावसायिक परिसरों और बिना पंजीकरण वाले होटलों को तुरंत प्रभाव से सील करने की नोटिस प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
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होटल संचालकों को कड़ी चेतावनी: प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी भी होटल या लॉज में नाबालिगों का शोषण या अनैतिक गतिविधियां पाई जाती हैं, तो संचालक को सह-आरोपी बनाते हुए परिसर को स्थायी रूप से ध्वस्त या सील कर दिया जाएगा।
महिला सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही पर जोर
राष्ट्रीय महिला आयोग के इस कड़े रुख से यह साफ हो गया है कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आयोग ने प्रशासन को यह भी सुझाव दिया है कि जिले में एक समर्पित हेल्पलाइन सेवा और निगरानी तंत्र को मजबूत किया जाए ताकि आम नागरिक बिना किसी डर के अवैध गतिविधियों की सूचना पुलिस को दे सकें। 15 दिनों के भीतर भेजी जाने वाली यह रिपोर्ट तय करेगी कि स्थानीय प्रशासन ने आयोग के निर्देशों का किस हद तक पालन किया है।