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श्रीगंगानगर में पश्चिमी विक्षोभ का तांडव: बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से जनजीवन प्रभावित

श्रीगंगानगर। सरहदी जिले श्रीगंगानगर और आसपास के इलाकों में बुधवार को मौसम ने करवट ली, जिससे शहरवासियों और किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। सक्रिय हुए पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव के कारण आसमान में सुबह से ही घने बादलों का डेरा रहा, जिसके बाद दोपहर होते-होते तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि दर्ज की गई। इस अचानक हुए बदलाव ने न केवल तापमान को नीचे गिरा दिया है, बल्कि खेती-किसानी के समीकरणों को भी बिगाड़ दिया है।


तापमान में भारी गिरावट: ठिठुरन ने फिर दी दस्तक

फरवरी के मध्य में जहां आमतौर पर गर्मी की आहट होने लगती है, वहीं इस पश्चिमी विक्षोभ ने सर्दी का अहसास फिर से करा दिया है। बुधवार को हुई बारिश के कारण जिले के अधिकतम तापमान में $5.7\text{°C}$ की भारी गिरावट दर्ज की गई। ठंडी हवाओं के चलने से ठिठुरन बढ़ गई है और लोग एक बार फिर गर्म कपड़ों में लिपटे नजर आए। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दो-तीन दिनों तक पारे में इसी तरह का उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, जिससे रात के तापमान में भी गिरावट आने की संभावना है।

किसानों पर दोहरी मार: फसलों के लिए ‘आफत’ बनी बारिश

श्रीगंगानगर एक कृषि प्रधान जिला है, और इस समय खेतों में सरसों और गेहूं की फसलें पकने के कगार पर हैं। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।

  • सरसों की फसल: सरसों की कटाई का काम कई क्षेत्रों में शुरू हो चुका है। ऐसे में बारिश से कटी हुई फसल के भीगने का डर है, जिससे दाने काले पड़ सकते हैं और गुणवत्ता खराब हो सकती है।

  • गेहूं की फसल: तेज हवाओं के साथ हुई बारिश से गेहूं की फसल के खेतों में बिछने (Lodging) का खतरा बढ़ गया है, जिससे पैदावार पर सीधा असर पड़ सकता है।

  • ओलावृष्टि का प्रभाव: जिले के कुछ ग्रामीण अंचलों में छोटे आकार के ओले गिरे हैं, जो पौधों की फलियों और फूलों को सीधा नुकसान पहुँचाते हैं।

मौसम विभाग का ‘येलो अलर्ट’ और प्रशासनिक सलाह

जयपुर स्थित मौसम केंद्र ने श्रीगंगानगर सहित उत्तर-पश्चिमी राजस्थान के लिए अगले 24 घंटों का ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है। विभाग का अनुमान है कि विक्षोभ का असर अभी बना रहेगा और कहीं-कहीं मेघगर्जन के साथ बिजली गिरने की घटनाएं भी हो सकती हैं।

प्रशासन की ओर से किसानों को विशेष दिशा-निर्देश:

  1. फसल सुरक्षा: जिन किसानों ने फसल काट ली है, वे उसे तुरंत तिरपाल से ढंकें या ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर रखें।

  2. सिंचाई रोकें: अगले दो दिनों तक खेतों में सिंचाई और किसी भी प्रकार के कीटनाशक का छिड़काव न करने की सलाह दी गई है।

  3. मंडी अपडेट: अनाज मंडियों में खुले में रखे अनाज को बचाने के लिए पुख्ता प्रबंध करने के निर्देश दिए गए हैं।


जनजीवन पर असर

बारिश के कारण शहर के निचले इलाकों और मुख्य सड़कों पर जलभराव की स्थिति भी देखने को मिली। रविंद्र पथ और सुखाड़िया सर्कल जैसे क्षेत्रों में वाहन चालकों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि, गर्मी से राहत मिलने के कारण कुछ लोग इस मौसम का आनंद लेते भी दिखे, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यह बारिश ‘अमृत’ कम और ‘आफत’ ज्यादा साबित हो रही है।

विशेषज्ञ की राय: मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्रों में हो रही भारी बर्फबारी और वहां से आने वाली सर्द हवाओं के मेल से यह विक्षोभ अधिक प्रभावी हो गया है। शुक्रवार तक मौसम के साफ होने की उम्मीद है।

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