
श्रीगंगानगर। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर जब राष्ट्रपति भवन से वर्ष 2026 के पद्म पुरस्कारों की घोषणा की गई, तो इसमें श्रीगंगानगर के स्वामी ब्रह्मदेव का नाम ‘पद्मश्री’ के लिए चयनित होने पर पूरा जिला खुशी से झूम उठा। आध्यात्मिकता, शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें इस नागरिक सम्मान से नवाजने का निर्णय लिया है।
कौन हैं स्वामी ब्रह्मदेव?
स्वामी ब्रह्मदेव पिछले कई दशकों से श्रीगंगानगर और आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों में निस्वार्थ भाव से मानवता की सेवा कर रहे हैं। उनका जीवन सादगी और उच्च विचारों का संगम रहा है। उन्होंने न केवल आध्यात्मिक चेतना जगाई, बल्कि समाज की कुरीतियों के खिलाफ भी एक मौन क्रांति का नेतृत्व किया है।
उनके योगदान के प्रमुख स्तंभ इस प्रकार हैं:
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शिक्षा का प्रसार: उन्होंने सीमावर्ती इलाकों में गरीब और वंचित बच्चों के लिए कई शिक्षण संस्थानों की स्थापना में मार्गदर्शन दिया है।
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व्यसन मुक्ति अभियान: नशाखोरी की समस्या से जूझ रहे श्रीगंगानगर के युवाओं को मुख्यधारा में लाने के लिए उन्होंने व्यापक स्तर पर योग और ध्यान के शिविर आयोजित किए।
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पर्यावरण संरक्षण: उनके सानिध्य में जिले के हजारों गांवों में वृक्षारोपण और जल संरक्षण के प्रोजेक्ट्स पर काम हुआ है।
जिले में हर्ष की लहर
जैसे ही यह समाचार सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों से सार्वजनिक हुआ, श्रीगंगानगर में उत्सव जैसा माहौल बन गया। आज सुबह से ही स्वामी जी के आश्रम और उनके पैतृक निवास पर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा।
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प्रबुद्धजनों की प्रतिक्रिया: शहर के साहित्यकारों, समाजसेवियों और राजनीतिज्ञों ने इसे ‘देर से मिला सही सम्मान’ बताया है। लोगों का कहना है कि यह सम्मान केवल स्वामी जी का नहीं, बल्कि श्रीगंगानगर की उस मिट्टी का सम्मान है जिसने ऐसे महान व्यक्तित्व को जन्म दिया।
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स्थानीय निवासियों का उत्साह: मोहल्लों और गांवों में लोगों ने मिठाइयां बांटकर और पटाखे चलाकर अपनी खुशी का इजहार किया। विशेषकर युवा वर्ग में उन्हें लेकर काफी सम्मान देखा जा रहा है।
पद्मश्री सम्मान का महत्व
पद्मश्री भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला चौथा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है। यह उन लोगों को दिया जाता है जिन्होंने अपने क्षेत्र में असाधारण कार्य करते हुए समाज पर गहरा प्रभाव छोड़ा हो। स्वामी ब्रह्मदेव का चयन यह दर्शाता है कि केंद्र सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर काम करने वाले वास्तविक नायकों को पहचान दे रही है।
“यह सम्मान जनता का है” – स्वामी ब्रह्मदेव
सम्मान की घोषणा के बाद एक संक्षिप्त संदेश में स्वामी ब्रह्मदेव ने अत्यंत विनम्रता के साथ कहा, “यह सम्मान मेरा नहीं, बल्कि उन हजारों सेवादारों और श्रीगंगानगर की जनता का है, जिन्होंने परोपकार के मार्ग पर मेरा साथ दिया। ईश्वर हमें और अधिक सेवा करने की शक्ति प्रदान करे।”
आगामी कार्यक्रम
बताया जा रहा है कि दिल्ली में होने वाले मुख्य अलंकरण समारोह के बाद जब स्वामी जी श्रीगंगानगर लौटेंगे, तो जिला स्तर पर उनका भव्य नागरिक अभिनंदन किया जाएगा। स्थानीय प्रशासन और विभिन्न सामाजिक संस्थाएं इसकी तैयारियों में अभी से जुट गई हैं।