
श्रीगंगानगर। राजस्थान का उत्तरी जिला श्रीगंगानगर, जो अपनी हरियाली और कृषि के लिए जाना जाता है, आज प्रदूषण की भारी चादर में लिपटा नजर आया। आज 22 फरवरी 2026 को शहर की आबो-हवा ने चिंताजनक स्तर को छू लिया। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) औसतन 242 दर्ज किया गया, जो तकनीकी रूप से ‘खराब’ से ‘गंभीर’ (Severe) श्रेणी के मुहाने पर खड़ा है। स्थानीय निवासियों के लिए आज का दिन धुंध और आंखों में जलन के बीच बीता।
हवा की गुणवत्ता और स्वास्थ्य पर प्रभाव
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में श्रीगंगानगर के कुछ हिस्सों में AQI का स्तर 300 के पार भी पहुँचा। हवा में मौजूद PM 2.5 और PM 10 (सूक्ष्म कण) की मात्रा सामान्य से कई गुना अधिक दर्ज की गई।
विशेषज्ञों के अनुसार, 200 से ऊपर का AQI उन लोगों के लिए बेहद खतरनाक है जो पहले से ही सांस की बीमारियों या अस्थमा से पीड़ित हैं। सामान्य स्वस्थ व्यक्तियों को भी लंबे समय तक बाहर रहने पर सांस लेने में कठिनाई, गले में खराश और लगातार खांसी की शिकायत हो रही है।
प्रमुख प्रभावित वर्ग:
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बुजुर्ग और बच्चे: फेफड़ों की कार्यक्षमता कम होने के कारण सबसे अधिक जोखिम में हैं।
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मरीज: हृदय और श्वास रोगों से ग्रसित लोगों के लिए यह हवा ‘साइलेंट किलर’ की तरह काम कर रही है।
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सुबह की सैर करने वाले: सुबह के वक्त प्रदूषण की परत जमीन के करीब होने के कारण मॉर्निंग वॉक करने वालों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
प्रदूषण के मुख्य कारण
श्रीगंगानगर में इस समय वायु प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई भौगोलिक और स्थानीय कारक जिम्मेदार माने जा रहे हैं:
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तापमान में बदलाव: फरवरी के अंत में तापमान में हो रहे उतार-चढ़ाव और हवा की गति धीमी होने के कारण धूल के कण और धुआं वातावरण की निचली सतह पर ही थम गए हैं।
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सड़क की धूल: शहर के मुख्य मार्गों और बाहरी इलाकों में उड़ती धूल PM 10 के स्तर को बढ़ा रही है।
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पड़ोसी राज्यों का प्रभाव: पंजाब और हरियाणा की सीमा से सटे होने के कारण कृषि अपशिष्ट या अन्य औद्योगिक गतिविधियों का धुआं हवा के साथ बहकर इस क्षेत्र में जमा हो रहा है।
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वाहनों का दबाव: शहर के मुख्य चौराहों पर ट्रैफिक जाम और पुराने वाहनों से निकलने वाला उत्सर्जन प्रदूषण की स्थिति को और बिगाड़ रहा है।
प्रशासन और चिकित्सा जगत की सलाह
बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ने एडवाइजरी जारी करने की तैयारी की है। स्थानीय चिकित्सकों ने नागरिकों को निम्नलिखित सुझाव दिए हैं:
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मास्क का प्रयोग: बाहर निकलते समय N-95 मास्क का उपयोग करें ताकि बारीक कण फेफड़ों तक न पहुँचें।
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बाहरी गतिविधियों से बचें: जब तक हवा में सुधार न हो, पार्क में व्यायाम करने या अनावश्यक बाहर घूमने से बचें।
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पानी का भरपूर सेवन: शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने के लिए अधिक पानी पिएं।
“श्रीगंगानगर में आज दृश्यता (Visibility) भी कम रही। प्रशासन को धूल नियंत्रण के लिए सड़कों पर पानी का छिड़काव करने और निर्माण गतिविधियों पर निगरानी रखने की आवश्यकता है।” — पर्यावरण विशेषज्ञ
निष्कर्ष
22 फरवरी का यह उच्च AQI स्तर श्रीगंगानगर के लिए एक चेतावनी है। यदि समय रहते धूल और धुआं नियंत्रण के उपाय नहीं किए गए, तो आने वाले दिनों में स्वास्थ्य संकट गहरा सकता है।