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श्रीगंगानगर में ‘ग्राम रथ अभियान’ का शंखनाद: सूचना और तकनीक से सशक्त होता ग्रामीण भारत

श्रीगंगानगर जिला, जिसे राजस्थान का ‘अन्न का कटोरा’ कहा जाता है, आज सूचना क्रांति और सरकारी जन-कल्याणकारी योजनाओं के सीधे संवाद का साक्षी बन रहा है। जिला प्रशासन द्वारा शुरू किया गया ‘ग्राम रथ अभियान’ न केवल एक प्रचार माध्यम है, बल्कि यह प्रशासन और ग्रामीणों के बीच की दूरी को पाटने वाला एक सशक्त सेतु बनकर उभरा है। 28 अप्रैल 2026 को इस अभियान के तहत जिले के विभिन्न दूरदराज के क्षेत्रों में विशेष गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है।

अभियान का उद्देश्य और दृष्टिकोण

अक्सर देखा जाता है कि सरकार द्वारा जनहित में चलाई जा रही दर्जनों योजनाएं कागजों और शहरी कार्यालयों तक ही सिमट कर रह जाती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में साक्षरता के अभाव या तकनीकी जानकारी न होने के कारण पात्र व्यक्ति लाभ से वंचित रह जाते हैं। इसी समस्या के समाधान हेतु जिला कलक्टर डॉ. अमित यादव के कुशल नेतृत्व में ‘ग्राम रथ अभियान’ की रूपरेखा तैयार की गई है।

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति (Antyodaya) तक सरकार की योजनाओं—जैसे किसान सम्मान निधि, पशु बीमा योजना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड और मुख्यमंत्री आयुष्मान योजना—की जानकारी पहुँचाना है।

तकनीक का संगम: एलईडी वैन की भूमिका

इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता आधुनिक तकनीक का उपयोग है। जिले की विभिन्न विधानसभाओं, जिनमें रायसिंहनगर, सूरतगढ़, श्रीकरणपुर, अनूपगढ़, सादुलशहर और श्रीगंगानगर शामिल हैं, के लिए विशेष एलईडी वैन रवाना की गई हैं।

ये वैन महज चलते-फिरते पोस्टर नहीं हैं, बल्कि इनमें उच्च गुणवत्ता वाले ऑडियो-विजुअल सिस्टम लगे हैं। इन एलईडी स्क्रीन के माध्यम से:

  • योजनाओं के आवेदन की प्रक्रिया को वीडियो के जरिए समझाया जा रहा है।

  • सफल किसानों और पशुपालकों की कहानियाँ दिखाई जा रही हैं ताकि अन्य ग्रामीण प्रेरित हो सकें।

  • मौके पर ही क्यूआर कोड (QR Code) के माध्यम से डिजिटल पंजीकरण की सुविधा दी जा रही है।

28 अप्रैल की विशेष गतिविधियाँ: 6 एलएलपी से 12 एलएनपी तक

आज, यानी 28 अप्रैल को जिले के विशेष चक (Chak) क्षेत्रों में इस अभियान की धूम है। विशेष रूप से 6 एलएलपी, 11 एलएनपी और 12 एलएनपी जैसे गांवों में ग्राम रथ का आगमन हुआ है। इन क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति और कृषि प्रधानता को देखते हुए प्रशासन ने यहाँ विशेष शिविरों का आयोजन किया है।

इन गांवों में आयोजित कार्यक्रमों में केवल वीडियो ही नहीं दिखाए जा रहे, बल्कि कृषि विभाग और पशुपालन विभाग के अधिकारी भी मौजूद हैं। वे ग्रामीणों को समझा रहे हैं कि कैसे आधुनिक तकनीक और सरकारी अनुदान का उपयोग कर वे अपनी आय दोगुनी कर सकते हैं। विशेष रूप से नहरी क्षेत्र होने के कारण, पानी की बचत और सूक्ष्म सिंचाई (Drip Irrigation) पर जोर दिया जा रहा है।

पशुपालकों और किसानों के लिए विशेष प्रावधान

श्रीगंगानगर का एक बड़ा हिस्सा पशुपालन पर निर्भर है। ग्राम रथ अभियान के तहत पशुपालकों को ‘लम्पी’ जैसी बीमारियों से बचाव के टीकाकरण और ‘कामधेनु पशु बीमा योजना’ के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। किसानों को खाद-बीज की उपलब्धता और रबी की फसल के उपार्जन (Procurement) संबंधी जानकारी भी मौके पर दी जा रही है।

प्रशासनिक मुस्तैदी और भविष्य की राह

जिला कलक्टर डॉ. अमित यादव ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान केवल सूचना देने तक सीमित नहीं रहेगा। इन वैन के साथ फीडबैक सिस्टम भी जोड़ा गया है। यदि किसी ग्रामीण को योजना का लाभ लेने में कोई समस्या आ रही है, तो उसकी शिकायत दर्ज की जा रही है जिसे सीधे जिला मुख्यालय पर मॉनिटर किया जाएगा।

निष्कर्ष ‘ग्राम रथ अभियान’ श्रीगंगानगर के विकास की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। जब सूचना खुद चलकर ग्रामीणों के द्वार तक पहुँचती है, तो भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम होती है और पारदर्शिता बढ़ती है। 6 एलएलपी से लेकर सादुलशहर की सीमाओं तक दौड़ते ये रथ इस बात का प्रतीक हैं कि विकसित राजस्थान का सपना अब गांव की पगडंडियों से होकर गुजर रहा है। यह पहल आने वाले समय में जिले के कृषि परिदृश्य और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सकारात्मक बदलाव लाने का सामर्थ्य रखती है।

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