
राजस्थान के ‘अन्न कटोरे’ के रूप में विख्यात श्रीगंगानगर जिले में रबी विपणन सीजन 2026-27 के लिए गेहूं की सरकारी खरीद की सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राज्य सरकार और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने इस वर्ष की खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए कमर कस ली है। जिले के हजारों किसानों के लिए यह खबर राहत भरी है कि इस बार न केवल एमएसपी में वृद्धि की गई है, बल्कि खरीद केंद्रों की संख्या में भी विस्तार किया जा रहा है।
न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP): ₹2585 का सुरक्षा कवच
केंद्र सरकार ने कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों के आधार पर वर्ष 2026-27 के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹2585 प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। यह मूल्य पिछले वर्ष की तुलना में एक सम्मानजनक वृद्धि दर्शाता है, जिसका उद्देश्य किसानों को उनकी लागत पर कम से कम 50% का रिटर्न सुनिश्चित करना है।
श्रीगंगानगर के किसानों के लिए यह मूल्य इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां की जलवायु और मिट्टी गेहूं की उच्च गुणवत्ता वाली किस्मों के लिए अनुकूल है। ₹2585 की यह दर खुले बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान किसानों के लिए एक वित्तीय सुरक्षा कवच (Financial Safety Net) का काम करेगी।
खरीद लक्ष्य: 6 लाख मीट्रिक टन का भारी भरकम टारगेट
श्रीगंगानगर जिले की उत्पादन क्षमता को देखते हुए, राज्य सरकार ने इस सीजन के लिए 6 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। जिले की प्रमुख मंडियों जैसे श्रीगंगानगर मुख्य मंडी, पदमपुर, गजसिंहपुर, रायसिंहनगर, अनूपगढ़ और सूरतगढ़ में इसके लिए विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं।
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भंडारण क्षमता: भारतीय खाद्य निगम (FCI) और राजस्थान राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम (RSCSC) ने गोदामों की साफ-सफाई और स्पेस मैनेजमेंट का काम शुरू कर दिया है।
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बारदाना प्रबंध: गेहूं की पैकिंग के लिए जूट की बोरियों (बारदाना) की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है ताकि सीजन के पीक समय में कोई कमी न आए।
पंजीकरण प्रक्रिया: डिजिटल तकनीक से सुगमता
भ्रष्टाचार को रोकने और बिचौलियों को बाहर निकालने के लिए सरकार ने पंजीकरण प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल रखा है। किसानों को सरकारी केंद्रों पर गेहूं बेचने के लिए ‘जन आधार’ के माध्यम से ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।
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आवश्यक दस्तावेज: किसानों को अपनी जमीन की जमाबंदी (नकल), गिरदावरी, बैंक पासबुक और जन आधार कार्ड तैयार रखने की सलाह दी गई है।
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गिरदावरी का मिलान: पटवारी द्वारा ऑनलाइन अपडेट की गई गिरदावरी के आधार पर ही किसान अपनी फसल का रकबा दर्ज करा सकेंगे।
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स्लॉट बुकिंग: पंजीकरण के बाद किसानों को अपनी सुविधा के अनुसार मंडी और तारीख चुनने का विकल्प (E-Slot Booking) दिया जाएगा, जिससे मंडियों में लंबी कतारों और भीड़भाड़ से बचा जा सके।
खरीद केंद्रों का निर्धारण और बुनियादी सुविधाएं
जिले में इस बार खरीद केंद्रों की संख्या बढ़ाई जा रही है ताकि किसानों को अपना अनाज दूर न ले जाना पड़े। ग्राम सेवा सहकारी समितियों (GSS) और क्रय-विक्रय सहकारी समितियों (KVSS) को भी खरीद केंद्र के रूप में सक्रिय किया जा रहा है।
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मंडियों में व्यवस्था: खरीद केंद्रों पर किसानों के लिए पीने के पानी, छाया, और अनाज सुखाने के लिए फर्श की सफाई के निर्देश दिए गए हैं।
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गुणवत्ता जांच: केंद्रों पर नमी मापक यंत्र (Moisture Meters) लगाए जाएंगे। मानक के अनुसार, गेहूं में नमी की मात्रा निर्धारित सीमा (आमतौर पर 12-14%) के भीतर होनी चाहिए ताकि वह लंबे समय तक भंडारण के योग्य रहे।
भुगतान प्रणाली: सीधे बैंक खाते में (DBT)
पारदर्शिता की दिशा में सबसे बड़ा कदम ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’ (DBT) है। जैसे ही किसान का गेहूं सरकारी केंद्र पर तौला और स्वीकृत किया जाएगा, उसका भुगतान सीधे उसके जन आधार से लिंक बैंक खाते में 48 से 72 घंटों के भीतर स्थानांतरित कर दिया जाएगा। इससे किसानों को आढ़तियों या बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
निष्कर्ष
श्रीगंगानगर में 2026-27 की गेहूं खरीद की यह तैयारी न केवल आर्थिक रूप से जिले को मजबूती देगी, बल्कि सुव्यवस्थित पंजीकरण और ₹2585 की एमएसपी किसानों के आत्मविश्वास को भी बढ़ाएगी। प्रशासन का लक्ष्य है कि मार्च के अंतिम सप्ताह या अप्रैल के प्रथम सप्ताह से शुरू होने वाली इस खरीद प्रक्रिया में एक भी पात्र किसान लाभ से वंचित न रहे।