
भूमिका: मरुभूमि की जीवनरेखा पर संकट के बादल
राजस्थान के अन्न कटोरे के रूप में प्रसिद्ध सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर और इसके आस-पास के क्षेत्रों की जीवनरेखा कही जाने वाली गंग नहर इन दिनों खुद पानी के लिए तरस रही है। पंजाब की ओर से नहर में पानी की आवक (Inflow) अचानक बेहद कम हो जाने के कारण पूरे क्षेत्र में हाहाकार मचा हुआ है। यह संकट ऐसे समय पर आया है जब किसान अपनी मुख्य खरीफ फसलों (Kharif Crops) की बुवाई की तैयारियों में जुटे थे। पानी की इस भारी किल्लत ने न केवल किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं, बल्कि क्षेत्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सामने भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।
बुवाई का समय और मूंग-नरमा फसलों पर मंडराता खतरा
यह समय श्रीगंगानगर और आस-पास के इलाकों में खरीफ फसलों, विशेषकर मूंग, नरमा (कपास), और ग्वार की समय पर बुवाई के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
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समय की महत्ता: कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, फसलों की समय पर बुवाई न होने से उनकी पैदावार और गुणवत्ता दोनों पर विपरीत असर पड़ता है।
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किसानों की बेबसी: बहुत से किसानों ने बुवाई के लिए महंगे दाम पर बीज और खाद खरीद कर रख लिए हैं, लेकिन खेतों में ‘राउणी’ (बुवाई से पहले खेत को पानी देना) करने के लिए नहरों में पानी ही उपलब्ध नहीं है।
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आर्थिक नुकसान की आशंका: यदि अगले कुछ दिनों में पानी की आपूर्ति बहाल नहीं की गई, तो बुवाई का सही समय हाथ से निकल जाएगा, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
पंजाब से पानी कम मिलने का मुख्य कारण
सिंचाई विभाग के सूत्रों और तकनीकी अधिकारियों के अनुसार, इस संकट की मुख्य जड़ पंजाब की ओर से होने वाली पानी की कम सप्लाई है।
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मरम्मत और सिल्ट की समस्या: अक्सर इस मौसम में हरिके बैराज और संबंधित फीडर नहरों में तकनीकी मरम्मत या सिल्ट (मिट्टी) जमा होने के कारण पानी का फ्लो प्रभावित होता है।
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पंजाब में खुद की मांग: इस समय पंजाब में भी धान (चावल) की रोपाई का काम जोरों पर चल रहा है, जिसके कारण वहां भी पानी की स्थानीय मांग बहुत अधिक बढ़ जाती है। इसका सीधा असर राजस्थान के हिस्से के पानी पर पड़ता है।
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कम शेयर मिलना: तय समझौते के मुताबिक राजस्थान को मिलने वाले पानी के कोटे में इस सप्ताह भारी कटौती देखी गई है, जिससे गंग नहर के अंतिम छोर (Tail) तक पानी पहुंचना पूरी तरह बंद हो गया है।
किसान संगठनों का आक्रोश और सिंचाई विभाग की चिंता
नहरों के खाली पड़े बेड और सूखते खेतों को देखकर स्थानीय किसान संगठनों का गुस्सा फूट पड़ा है। भारतीय किसान यूनियन और अन्य स्थानीय किसान समितियों ने इस स्थिति पर गहरी चिंता और नाराजगी जताई है।
किसान प्रतिनिधियों का कहना है: “सरकार और प्रशासन हर बार समय पर पानी दिलाने का वादा करते हैं, लेकिन ऐन बुवाई के वक्त हमें हमारी किस्मत पर छोड़ दिया जाता है। अगर तुरंत पानी नहीं मिला तो आंदोलन के अलावा हमारे पास कोई रास्ता नहीं बचेगा।”
दूसरी ओर, श्रीगंगानगर सिंचाई विभाग के आला अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि वे पंजाब के सिंचाई विभाग और उच्चाधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं। राजस्थान के कोटे का पूरा पानी जल्द से जल्द रिलीज करवाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि नहरों में पानी का जलस्तर सुधारा जा सके।
निष्कर्ष और समाधान की दरकार
श्रीगंगानगर की पूरी अर्थव्यवस्था कृषि और विशेष रूप से इस नहरी तंत्र पर टिकी है। गंग नहर में पानी की यह कमी केवल एक सीजन की फसल का नुकसान नहीं है, बल्कि यह हजारों किसान परिवारों के सालभर के गुजारे का सवाल है।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए और पंजाब सरकार से उच्च स्तरीय वार्ता कर गंग नहर में पानी की मात्रा तुरंत बढ़ानी चाहिए। इसके साथ ही, भविष्य में ऐसे संकटों से बचने के लिए पानी के बंटवारे और रेगुलेशन की एक पारदर्शी व सख्त व्यवस्था सुनिश्चित की जानी बेहद जरूरी है, ताकि अन्नदाता को पानी के एक-एक कतरे के लिए तरसना न पड़े।