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श्रीगंगानगर में गहराया जल संकट: नहरबंदी के विरोध में सड़कों पर उतरे किसान, कलेक्ट्रेट घेराव की चेतावनी

श्रीगंगानगर। राजस्थान के इस सीमावर्ती जिले में, जिसे “नहरों का शहर” कहा जाता है, आज स्थिति इसके विपरीत नजर आ रही है। 4 फरवरी को श्रीगंगानगर की सड़कों पर गूंजते “नहरों में पानी दो” के नारों ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। सिंचाई के पानी की किल्लत और लंबी खिंचती नहरबंदी के विरोध में जिले के हजारों किसानों ने कलेक्ट्रेट के बाहर एक विशाल विरोध प्रदर्शन किया। किसानों का कहना है कि यदि जल्द ही सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं छोड़ा गया, तो रबी की तैयार फसलें खेतों में ही दम तोड़ देंगी।


नहरबंदी और पानी की कमी: संकट की जड़

श्रीगंगानगर की कृषि मुख्य रूप से इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) और गंग नहर पर निर्भर है। पिछले कुछ हफ्तों से मरम्मत और रखरखाव के नाम पर की गई नहरबंदी ने किसानों की कमर तोड़ दी है।

  • फसलों पर खतरा: वर्तमान में गेहूं, सरसों और चने की फसलें अपने सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव पर हैं। इस समय सिंचाई की भारी आवश्यकता होती है। पानी की अनुपलब्धता के कारण फसलों में पीलापन आने लगा है, जिससे उत्पादन में 40% तक की गिरावट की आशंका जताई जा रही है।

  • पेयजल संकट: सिंचाई तो दूर, नहरों में पानी न होने के कारण जिले के कई गांवों में पीने के पानी का भी गंभीर संकट पैदा हो गया है।

विरोध प्रदर्शन: आक्रोश की लहर

सुबह 11 बजे से ही विभिन्न किसान संगठनों के बैनर तले किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचने लगे। प्रदर्शनकारी किसानों ने प्रशासन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया।

  • प्रमुख मांगें: किसानों की मुख्य मांग है कि नहरबंदी की अवधि को तुरंत कम किया जाए और बारीबंदी प्रणाली (Water Rotation) में सुधार कर टेल (अंतिम छोर) तक पानी पहुंचाया जाए।

  • प्रशासनिक विफलता का आरोप: किसान नेताओं ने कहा कि प्रशासन और सिंचाई विभाग के बीच तालमेल की कमी का खामियाजा अन्नदाता को भुगतना पड़ रहा है। रबी सीजन के पीक समय में नहरबंदी का निर्णय पूरी तरह से किसान विरोधी है।

सिंचाई प्रणाली का महत्व

श्रीगंगानगर की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से इसकी नहर प्रणाली पर टिकी है। नीचे दिए गए प्रवाह चार्ट के माध्यम से आप समझ सकते हैं कि नहर के पानी की कमी कैसे पूरी श्रृंखला को प्रभावित करती है:

घेराव की चेतावनी और आगामी रणनीति

प्रदर्शन के दौरान किसान संगठनों ने जिला कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। किसान नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि अगले 72 घंटों के भीतर नहरों में पानी का प्रवाह सुनिश्चित नहीं किया गया, तो जिले भर के किसान अनिश्चितकालीन महापड़ाव शुरू करेंगे और कलेक्ट्रेट का पूर्ण घेराव किया जाएगा। इस दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की जिम्मेदारी शासन की होगी।

प्रशासन का पक्ष

वहीं, जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नहरों की मरम्मत का कार्य पंजाब क्षेत्र में चल रहा है, जो बेहद अनिवार्य है। उन्होंने किसानों को आश्वासन दिया है कि वे उच्चाधिकारियों से बात कर पानी की रोटेशन अवधि को बढ़ाने और चोरी रोकने के लिए सख्त कदम उठाएंगे।

निष्कर्ष: श्रीगंगानगर का किसान आज एक दोराहे पर खड़ा है—एक तरफ कड़ाके की ठंड है और दूसरी तरफ पानी के बिना सूखते उसके खेत। 4 फरवरी का यह प्रदर्शन केवल एक विरोध नहीं, बल्कि उस हताशा का परिणाम है जो एक किसान अपनी मेहनत को बर्बाद होते देख महसूस करता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन कागजी आश्वासनों से आगे बढ़कर धरातल पर पानी पहुंचा पाता है या नहीं।

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