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श्रीगंगानगर में कुदरत का कहर: बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से किसान बेहाल

श्रीगंगानगर। सरहदी जिले श्रीगंगानगर में पिछले 24 घंटों से मौसम के बदले मिजाज ने अन्नदाता की कमर तोड़ दी है। जहां एक ओर किसान अपनी साल भर की मेहनत यानी पकी हुई फसल को घर लाने की तैयारी में जुटा था, वहीं अचानक आए पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) ने सुनहरी दिख रही उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। शुक्रवार सुबह से ही आसमान में काली घटाएं छाई रहीं और दोपहर होते-होते जिले के कई हिस्सों में तेज गर्जना के साथ झमाझम बारिश और भीषण ओलावृष्टि शुरू हो गई।

फसलों का भारी नुकसान: बिछ गई गेहूं की बालियां

श्रीगंगानगर जिले में गेहूं की कटाई का सीजन अपने चरम पर है। खेतों में गेहूं की फसल पूरी तरह पककर तैयार खड़ी है, जबकि कई जगहों पर किसानों ने फसल काटकर गट्ठर बना लिए थे। आज हुई तेज बारिश और ओलावृष्टि के कारण खड़ी फसल जमीन पर बिछ गई है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, फसल गिरने (Lodging) से दानों की गुणवत्ता खराब हो जाती है और दाना काला पड़ जाता है, जिससे किसानों को मंडी में सही भाव नहीं मिल पाता।

विशेष रूप से सादुलशहर, पदमपुर, रायसिंहनगर और सूरतगढ़ के बेल्ट में ओलावृष्टि की तीव्रता अधिक रही। कई गांवों में चने के आकार के ओले गिरे, जिससे सरसों और गेहूं की फलियों को सीधा नुकसान पहुंचा है। कटी हुई फसल जो खुले खेतों में पड़ी थी, वह पानी में भीग जाने के कारण खराब होने की कगार पर है।

मौसम विभाग की चेतावनी और वैज्ञानिक कारण

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, उत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों में सक्रिय हुए एक तीव्र पश्चिमी विक्षोभ के कारण राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में यह मौसमी बदलाव आया है। विभाग ने श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

“अगले 48 घंटों तक श्रीगंगानगर समेत आसपास के क्षेत्रों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धूलभरी हवाएं चलने और मध्यम से तेज बारिश होने की प्रबल संभावना है। कुछ स्थानों पर आकाशीय बिजली गिरने का भी खतरा बना हुआ है।” – क्षेत्रीय मौसम केंद्र

किसानों की आपबीती और आर्थिक संकट

सादुलशहर के एक स्थानीय किसान, गुरमीत सिंह ने बताया, “कल तक हम कटाई शुरू करने की सोच रहे थे, लेकिन आज की बारिश ने सब बर्बाद कर दिया। फसल जमीन पर गिर गई है, अब मशीन (कंबाइन) से कटाई करना संभव नहीं होगा। हाथ से कटाई कराने पर खर्च दोगुना हो जाएगा और पैदावार भी कम निकलेगी।” खेतों के साथ-साथ अनाज मंडियों में भी अव्यवस्था का आलम है। खुले आसमान के नीचे पड़ी गेहूं की बोरियां और ढेरी भीग जाने से व्यापारियों और किसानों में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि प्रशासन ने तिरपाल की व्यवस्था के निर्देश दिए थे, लेकिन बारिश की अचानक आई तीव्रता के सामने वे नाकाफी साबित हुए।

प्रशासन और कृषि विभाग का रुख

जिले में हुए इस नुकसान का जायजा लेने के लिए जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर फसल खराबे की गिरदावरी (Special Assessment) की रिपोर्ट तैयार करें।

  • बीमा क्लेम: विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि जिन किसानों ने ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ के तहत बीमा कराया है, वे 72 घंटों के भीतर अपने नुकसान की सूचना टोल-फ्री नंबर या संबंधित बैंक को दें, ताकि उन्हें उचित मुआवजा मिल सके।

  • सतर्कता: बिजली विभाग ने भी खराब मौसम को देखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में ढीले तारों और ट्रांसफार्मरों से दूर रहने की अपील की है।

आगे क्या?

मौसम विभाग का अनुमान है कि 5 अप्रैल के बाद ही मौसम पूरी तरह साफ होगा। तब तक किसानों को अपनी कटी हुई फसल को ऊंचे स्थानों पर रखने और तिरपाल से ढककर रखने की सलाह दी गई है। यह बेमौसम बारिश न केवल आर्थिक नुकसान है, बल्कि उन हजारों परिवारों के लिए एक मानसिक आघात भी है, जिनकी पूरी साल की आजीविका इस ‘स्वर्ण फसल’ पर टिकी थी।

श्रीगंगानगर का प्रशासन फिलहाल स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जल्द ही राहत पैकेज की घोषणा की उम्मीद जताई जा रही है।


नोट: किसान भाई किसी भी सहायता के लिए कृषि विभाग के हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।

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