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श्रीगंगानगर में ‘किन्नू महोत्सव’ का भव्य समापन: कृषि और संस्कृति के संगम ने जीता किसानों का दिल

श्रीगंगानगर: राजस्थान के ‘कैलिफोर्निया’ के रूप में विख्यात श्रीगंगानगर जिले में कृषि, तकनीक और स्थानीय संस्कृति का अनूठा उत्सव ‘तीन दिवसीय किन्नू महोत्सव’ आज हर्षोल्लास के साथ संपन्न हो गया। जिला प्रशासन और उद्यान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव ने न केवल जिले के बागवानों को एक मंच प्रदान किया, बल्कि श्रीगंगानगर के ‘गोल्डन फ्रूट’ (किन्नू) को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में भी मजबूत कदम बढ़ाए।


प्रतियोगिताओं का आकर्षण: किन्नू, गाजर और गोभी का दबदबा

समापन समारोह के दौरान आयोजित फल-सब्जी प्रतियोगिता आकर्षण का केंद्र रही। प्रदर्शनी में केवल किन्नू ही नहीं, बल्कि श्रीगंगानगर की उपजाऊ मिट्टी में पैदा होने वाली लाल गाजर और ठोस पत्ता गोभी की उन्नत किस्मों का भी प्रदर्शन किया गया।

  • किन्नू प्रतियोगिता: विशेषज्ञों की एक टीम ने फल की चमक, रस की मात्रा, छिलके की मोटाई और मिठास के आधार पर सर्वश्रेष्ठ बागवानों का चयन किया।

  • सब्जी प्रदर्शनी: जैविक तरीके से उगाई गई विशालकाय पत्ता गोभी और गहरी लाल गाजर को देखकर आगंतुक और अधिकारी अचंभित रह गए।

  • पुरस्कार वितरण: महोत्सव के अंतिम दिन विभिन्न श्रेणियों में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रगतिशील किसानों को स्मृति चिन्ह और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।

विधायक का संबोधन: “तकनीक ही खेती का भविष्य है”

समारोह के मुख्य अतिथि सादुलशहर विधायक ने अपने संबोधन में क्षेत्र के किसानों के पुरुषार्थ की सराहना की। उन्होंने कहा कि श्रीगंगानगर का किन्नू अपनी विशेष मिठास के कारण विदेशों में भी मांग में है, लेकिन अब समय ‘वैल्यू एडिशन’ (मूल्य संवर्धन) का है।

उन्होंने किसानों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि केवल फल बेचना काफी नहीं है, बल्कि हमें किन्नू के जूस, ग्रेडिंग और वैक्सिंग प्लांट की दिशा में आगे बढ़ना होगा। विधायक ने सरकार की ओर से कृषि यंत्रीकरण और ड्रिप सिंचाई पर दी जाने वाली सब्सिडी का लाभ उठाने का आह्वान किया।

उद्यान विभाग की पहल: नई तकनीकों का प्रदर्शन

उद्यान विभाग के अधिकारियों ने महोत्सव के दौरान किसानों को ‘इजराइली खेती तकनीक’ और ‘जीरो बजट नेचुरल फार्मिंग’ के बारे में जानकारी दी। महोत्सव में लगे स्टालों पर नई कीटनाशक दवाओं, सॉइल टेस्टिंग किट और आधुनिक छिड़काव मशीनों (ड्रोन तकनीक) का जीवंत प्रदर्शन किया गया। किसानों को बताया गया कि कैसे कम पानी में अधिक उत्पादन लेकर अपनी आय को दोगुना किया जा सकता है।

सांस्कृतिक रंगत और स्थानीय जायका

महोत्सव का समापन केवल कृषि चर्चा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने इसमें चार चांद लगा दिए। स्थानीय कलाकारों ने लोक गीतों और नृत्य के जरिए किसानों का मनोरंजन किया। साथ ही, आगंतुकों ने किन्नू से बने विभिन्न उत्पादों जैसे जैम, शरबत और स्क्वैश का भरपूर आनंद लिया।


निष्कर्ष

तीन दिवसीय किन्नू महोत्सव ने यह साबित कर दिया है कि यदि सही मार्गदर्शन और बाजार उपलब्ध कराया जाए, तो श्रीगंगानगर के किसान वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं। यह महोत्सव केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि ज्ञान के आदान-प्रदान का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। प्रशासन की इस पहल से निश्चित रूप से जिले के बागवानी क्षेत्र को नई ऊर्जा मिलेगी।

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