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श्रीगंगानगर में ‘ऑपरेशन म्यूल हंटर’ का बड़ा धमाका: ₹10,000 महीने के किराए पर बैंक खाते लेकर चलाया जा रहा था राष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क, मास्टरमाइंड की संपत्तियां सीज करने की तैयारी

श्रीगंगानगर (राजस्थान)।

सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान ‘ऑपरेशन म्यूल हंटर’ के तहत श्रीगंगानगर कोतवाली पुलिस को एक बहुत बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने डिजिटल अपराध की दुनिया में पांव पसार रहे एक ऐसे संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो जरूरतमंद और सीधे-साधे लोगों के बैंक खातों (म्यूल अकाउंट्स) को किराए पर लेकर देश भर में करोड़ों रुपये की साइबर ठगी के खेल को अंजाम दे रहा था। इस पूरे गिरोह का मुख्य सूत्रधार और मास्टरमाइंड महालक्ष्मी नगर निवासी शुभम सेतिया बताया जा रहा है, जिसके संभावित ठिकानों पर पुलिस ने दबिश दी है तथा अवैध काली कमाई से अर्जित की गई चल-अचल संपत्तियों को कुर्क/सीज करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।

₹10,000 प्रति माह का लालच और ‘म्यूल अकाउंट्स’ का खेल

कोतवाली पुलिस थानाधिकारी तेजवंत सिंह के नेतृत्व में की गई शुरुआती जांच में इस पूरे फर्जीवाड़े की चौंकाने वाली कार्यप्रणाली (मोडस ऑपरेंडी) सामने आई है। मुख्य आरोपी शुभम सेतिया ने अपने साथ 10 से 12 युवकों की एक पूरी टीम तैयार कर रखी थी। ये युवक शहर और आसपास के इलाकों में ऐसे गरीब, बेरोजगार अथवा जरूरतमंद लोगों को निशाना बनाते थे जिन्हें तुरंत पैसे की सख्त जरूरत होती थी।

आरोपी उन मासूम लोगों को झांसा देते थे कि उनके बैंक खाते का उपयोग पूरी तरह कानूनी कारोबारी लेन-देन के लिए किया जाएगा। इसके बदले में खाताधारकों को हर महीने ₹10,000 का निश्चित किराया देने का लालच दिया जाता था। एक बार खाताधारक राजी हो जाता, तो आरोपी उसके पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक और रजिस्टर्ड सिम कार्ड अपने पूर्ण नियंत्रण में ले लेते थे।

देशभर के पीड़ितों से ठगी गई रकम का ट्रांजैक्शन

जांच अधिकारियों के अनुसार, इन म्यूल अकाउंट्स का इस्तेमाल तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र सहित देश के अलग-अलग राज्यों में अंजाम दी जाने वाली साइबर ठगी की वारदातों में किया जा रहा था। डिजिटल अरेस्ट, पार्ट-टाइम जॉब का झांसा, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर जब देश के अन्य हिस्सों में लोगों को ठगा जाता था, तो ठगी की वह राशि सीधे श्रीगंगानगर में किराए पर लिए गए इन खातों में ट्रांसफर करवाई जाती थी। इसके बाद गिरोह के सदस्य अलग-अलग एटीएम या ऑनलाइन ट्रांसफर के जरिए उस रकम को तुरंत निकाल कर ठिकाने लगा देते थे।

हाल ही में जब देश के अन्य राज्यों की पुलिस और नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) से जुड़े मामलों की कड़ियों को श्रीगंगानगर पुलिस ने आपस में जोड़ा, तो एसएसबी रोड स्थित एक स्थानीय नागरिक आकाशदीप के नाम पर संचालित संदिग्ध बैंक खाते का खुलासा हुआ। जब पुलिस ने खाताधारक को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने ₹10,000 मासिक किराए पर शुभम सेतिया को अपनी पासबुक और एटीएम देने की पूरी कहानी बयां कर दी।

फर्जी ज्योतिषी से ‘साइबर किंगपिन’ बनने का सफर और संपत्तियों का ब्योरा

पुलिस पड़ताल में मास्टरमाइंड शुभम सेतिया का पुराना क्रिमिनल बैकग्राउंड भी खंगाला जा रहा है। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी पूर्व में सोशल मीडिया और कॉल सेंटरों के माध्यम से फर्जी ज्योतिषी बनकर विदेश में रहने वाले लोगों को अलौकिक शक्तियों और तंत्र-मंत्र के नाम पर चूना लगाता था। इसके बाद उसने साइबर ठगी के बड़े सिंडिकेट से हाथ मिला लिया और खुद का बड़ा नेटवर्क खड़ा कर लिया।

ठगी की इस काली कमाई से आरोपी ने श्रीगंगानगर की पॉश कॉलोनियों (जैसे रिद्धि-सिद्धि कॉलोनी) में महंगे भूखंड (प्लॉट) और संपत्तियां खरीदी हैं। फिलहाल कोतवाली पुलिस ने आरोपी के महालक्ष्मी स्थित आवास पर दबिश दी, लेकिन भनक लगते ही आरोपी फरार हो गया। जिला पुलिस प्रशासन ने आरोपी की तमाम बेनामी और अर्जित संपत्तियों का ब्योरा जुटाकर उन्हें सीज करने तथा उसके बैंक खातों को फ्रीज करने की कानूनी कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर इस नेटवर्क से जुड़े अन्य बड़े चेहरों को भी बेनकाब किया जाएगा।

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