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श्रीगंगानगर में आसमान से बरस रही आग: ‘ऑरेंज-येलो अलर्ट’ के बीच भट्टी की तरह तपा सीमावर्ती इलाका, जानें कब मिलेगी राहत

श्रीगंगानगर। राजस्थान का सीमावर्ती जिला श्रीगंगानगर इस समय भीषण और जानलेवा गर्मी की चपेट में है। सूर्य देव के तीखे तेवरों ने पूरे क्षेत्र को जैसे एक सुलगती हुई भट्टी में तब्दील कर दिया है। आज, 26 मई को भी जिले में गर्मी ने अपने पिछले कई रिकॉर्ड्स को हिलाकर रख दिया। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए श्रीगंगानगर और आसपास के इलाकों के लिए तीव्र हीटवेव (प्रचंड लू) का ‘ऑरेंज और येलो अलर्ट’ जारी रखा है। सुबह सूरज उगने के साथ ही शुरू होने वाला तपन का यह दौर देर रात तक लोगों को झुलसा रहा है।

दिन में पारा 47°C के पार, रातें भी बनीं ‘अंगारा’

मौसम केंद्र के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, आज श्रीगंगानगर का अधिकतम तापमान रिकॉर्ड तोड़ 47 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिसने इसे पूरे राजस्थान का सबसे गर्म स्थान बना दिया। दोपहर के समय हालात यह थे कि मुख्य सड़कों और बाजारों में पूरी तरह सन्नाटा पसरा नजर आया, जैसे अघोषित कर्फ्यू लग गया हो। गर्म हवा के थपेड़े (लू) इतने तीव्र थे कि दुपहिया वाहन चालकों और पैदल चलने वालों का सड़क पर टिकना दूभर हो गया।

केवल दिन ही नहीं, बल्कि श्रीगंगानगर में रातें भी अब ‘अंगारा’ साबित हो रही हैं। न्यूनतम तापमान सामान्य से 3 से 4 डिग्री ऊपर चढ़कर 29 से 31 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। रात के समय हवा पूरी तरह बंद होने के कारण लोग चौबीसों घंटे भयंकर उमस और तपिश से बेहाल हैं। घरों में लगे एयर कंडीशनर (AC) और कूलर भी इस भीषण गर्मी के आगे सरेंडर करते दिख रहे हैं और केवल गर्म हवा फेंक रहे हैं।

मौसम विभाग की चेतावनी: “आने वाले अगले 24 से 48 घंटों (27 मई तक) में पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों में पारा 47-48 डिग्री तक पहुंच सकता है। नागरिक दोपहर 12 से शाम 4 बजे के बीच अत्यंत आवश्यक काम होने पर ही घरों से बाहर निकलें।”

जनजीवन पूरी तरह प्रभावित, अस्पतालों में बढ़े मरीज

इस जानलेवा मौसम का सीधा असर आम जनजीवन और व्यापार पर पड़ा है। सुबह 10 बजते ही धूप इतनी तेज हो जाती है कि लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं। निर्माण कार्य से जुड़े मजदूरों, रेहड़ी-पटरी वालों और दिहाड़ी कामगारों के लिए यह मौसम दोहरी मार लेकर आया है। दोपहर के समय काम पूरी तरह ठप रहने से उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है।

भीषण गर्मी के कारण श्रीगंगानगर के जिला अस्पताल और निजी क्लीनिकों में मरीजों की संख्या में अचानक भारी उछाल आया है। उल्टी-दस्त, डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी), तेज बुखार और हीट स्ट्रोक (लू लगना) के शिकार सैकड़ों लोग रोजाना अस्पताल पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों ने लोगों को सलाह दी है कि वे ज्यादा से ज्यादा पानी, ओआरएस (ORS) का घोल, नींबू पानी और छाछ का सेवन करें ताकि शरीर का तापमान नियंत्रित रहे।

बिजली-पानी का संकट और फसलों को नुकसान

लगातार बढ़ रहे तापमान के कारण जिले में बिजली और पानी की मांग अपने चरम पर पहुंच गई है। ओवरलोडिंग की वजह से कई मोहल्लों में अघोषित बिजली कटौती और ट्रांसफार्मर फुंकने की शिकायतें आ रही हैं, जिससे नागरिकों की परेशानी दोगुनी हो गई है। इसके अलावा, इस प्रचंड धूप और गर्म हवाओं के कारण खेतों में खड़ी चारे की फसलें और बागवानों के किन्नू के पौधे भी झुलसने लगे हैं, जिससे किसान बेहद चिंतित हैं।

राहत की उम्मीद: कब बदलेगा मौसम का मिजाज?

मौसम प्रेमियों और स्थानीय निवासियों के लिए एक राहत भरी खबर भी आ रही है। जयपुर मौसम केंद्र के अनुसार, वर्तमान में चल रहा यह प्रचंड हीटवेव का दौर अगले दो दिनों तक इसी तरह हावी रहेगा। हालांकि, 28 और 29 मई से एक नया पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय होने की संभावना है।

इस नए सिस्टम के प्रभाव से मई के आखिरी दिनों (29 से 31 मई) में श्रीगंगानगर सहित राज्य के कई हिस्सों में तेज आंधी-तूफान के साथ हल्की बूंदाबांदी या धूलभरी आंधी चलने के आसार हैं। इस मौसमी बदलाव के कारण तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे जून के पहले सप्ताह की शुरुआत में लोगों को इस झुलसाने वाली गर्मी से थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। तब तक प्रशासन ने सभी को सतर्क रहने और ठंडे स्थानों पर रहने की हिदायत दी है।

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