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श्रीगंगानगर में आवारा कुत्तों का आतंक: व्यापारियों और डॉग लवर्स के बीच छिड़ी जंग 🐕⚠️

श्रीगंगानगर शहर इन दिनों एक ऐसी समस्या से जूझ रहा है जिसने स्थानीय निवासियों की रातों की नींद और दिन का चैन छीन लिया है। यह समस्या किसी अपराध या कानून-व्यवस्था से नहीं, बल्कि शहर की सड़कों पर बढ़ते आवारा कुत्तों के आतंक से जुड़ी है। हाल के हफ्तों में कुत्ते के काटने और हमलों की बढ़ती घटनाओं ने पूरे शहर को दो गुटों में बांट दिया है, जिससे सामाजिक तनाव की स्थिति पैदा हो गई है।

दहशत का माहौल: राहगीर और बच्चे निशाने पर

शहर के विभिन्न इलाकों, विशेष रूप से गोल बाजार, पुरानी आबादी और रिहायशी कॉलोनियों में आवारा कुत्तों के झुंड अब राहगीरों के लिए ‘काल’ साबित हो रहे हैं।

  • हमलों में वृद्धि: पिछले कुछ दिनों में कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं जहाँ कुत्तों ने पैदल चल रहे बुजुर्गों और स्कूल जाने वाले बच्चों पर अचानक हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया।

  • CCTV फुटेज: सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कुछ सीसीटीवी फुटेज ने लोगों के मन में डर और बढ़ा दिया है, जिनमें देखा जा सकता है कि कुत्ते अकेले जा रहे व्यक्ति को घेरकर हमला कर रहे हैं।


व्यापारी बनाम डॉग लवर्स: दो गुटों में बंटा शहर

इस समस्या ने अब एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। शहर के व्यापारियों और डॉग लवर्स (पशु प्रेमी) के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है।

  1. व्यापारियों का पक्ष: स्थानीय व्यापार मंडल और दुकानदारों का कहना है कि आवारा कुत्तों की वजह से ग्राहक बाजार आने से कतराने लगे हैं। वे प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि इन कुत्तों को पकड़कर शहर से बाहर सुरक्षित स्थानों या शेल्टर होम में स्थानांतरित किया जाए।

  2. डॉग लवर्स का तर्क: दूसरी ओर, पशु प्रेमी और पशु अधिकार कार्यकर्ता ‘पशु क्रूरता’ के खिलाफ खड़े हैं। उनका तर्क है कि कुत्तों को उनके प्राकृतिक आवास से हटाना गैर-कानूनी है। वे समाधान के रूप में केवल नसबंदी (Sterilization) और एंटी-रेबीज टीकाकरण पर जोर दे रहे हैं।


प्रशासन की कार्रवाई और चुनौतियां

बढ़ते विरोध को देखते हुए नगर परिषद और जिला प्रशासन ने कदम उठाने शुरू किए हैं:

  • नसबंदी अभियान: प्रशासन ने आवारा कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए नसबंदी के टेंडर जारी किए हैं।

  • टीकाकरण: पशुपालन विभाग के सहयोग से विशेष अभियान चलाने की योजना है ताकि रेबीज के खतरे को कम किया जा सके।

  • सुप्रीम कोर्ट के निर्देश: प्रशासन इन कार्रवाइयों को सुप्रीम कोर्ट के उन हालिया निर्देशों के तहत अंजाम देने की कोशिश कर रहा है जिनमें सार्वजनिक सुरक्षा और पशु अधिकारों के बीच संतुलन बनाने की बात कही गई है।

निष्कर्ष

श्रीगंगानगर की सड़कों पर शांति बहाल करने के लिए प्रशासन को एक ठोस और मानवीय समाधान की आवश्यकता है। केवल नसबंदी ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि कुत्तों के लिए उचित शेल्टर और भोजन की व्यवस्था करना भी जरूरी है ताकि वे आक्रामक न हों। शहरवासी उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन जल्द ही ऐसी नीति लागू करेगा जिससे मनुष्य और बेजुबान जानवर दोनों सुरक्षित रह सकें।


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©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️