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श्रीगंगानगर: महिला थानाधिकारी ज्योति नायक की मौत में बड़ा खुलासा, हादसे के पीछे गहरी साजिश की आशंका

श्रीगंगानगर। राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर में बीते दिनों हुई महिला थानाधिकारी (CI) ज्योति नायक की दर्दनाक मौत के मामले ने अब एक नया और चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है। 10 फरवरी को दुर्गा मंदिर क्षेत्र में हुई जिस घटना को शुरुआती तौर पर एक सामान्य सड़क दुर्घटना माना जा रहा था, उसे लेकर अब पुलिस प्रशासन और जांच एजेंसियों ने गंभीर संदेह जताया है। 14 फरवरी तक चली शुरुआती तफ्तीश के बाद, पुलिस अब इस मामले को “नियोजित हत्या की साजिश” के नजरिए से देख रही है।

घटना का क्रम और शुरुआती जांच

बीते 10 फरवरी की शाम, ज्योति नायक अपनी ड्यूटी के बाद लौट रही थीं, तभी दुर्गा मंदिर क्षेत्र के पास एक तेज रफ्तार वाहन ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि ज्योति नायक ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। शुरुआती पुलिस कार्रवाई में इसे ‘हिट एंड रन’ का मामला दर्ज किया गया था, लेकिन घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज ने कहानी बदल दी। फुटेज में देखा गया कि संदिग्ध वाहन काफी देर से उनका पीछा कर रहा था और टक्कर मारने के बाद चालक ने वाहन की रफ्तार कम करने के बजाय उसे और तेज कर दिया।

कॉल डिटेल्स और तकनीकी साक्ष्य

आज 14 फरवरी को जांच टीम के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस ने ज्योति नायक के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल्स (CDR) और इंटरनेट गतिविधियों को खंगाला है। रिपोर्ट में सामने आया है कि पिछले कुछ दिनों से उन्हें कुछ अज्ञात नंबरों से धमकी भरे कॉल आ रहे थे। इसके अलावा, पुलिस ने घटनास्थल से बरामद साक्ष्यों को विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) भेजा था। FSL की प्रारंभिक रिपोर्ट में वाहन के टकराने के कोण (Angle of Impact) पर सवाल उठाए गए हैं, जो यह संकेत देते हैं कि टक्कर अनायास नहीं बल्कि जानबूझकर मारी गई थी।

जांच के केंद्र में ‘ड्रग माफिया’ और पुराने केस

ज्योति नायक अपनी निडर कार्यशैली और नशे के खिलाफ सख्त अभियान के लिए जानी जाती थीं। श्रीगंगानगर में बढ़ते चिट्टे (हेरोइन) के कारोबार पर लगाम लगाने के लिए उन्होंने हाल ही में कई बड़े तस्करों को सलाखों के पीछे भेजा था। पुलिस की एक विशेष टीम अब उन अपराधियों की सूची तैयार कर रही है जो हाल ही में जेल से पैरोल पर बाहर आए हैं या जिन्हें ज्योति नायक की जांच के कारण भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था।

पुलिस का अगला कदम

जिला पुलिस अधीक्षक ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। पुलिस उन संदिग्ध मोबाइल टावरों की लोकेशन ट्रेस कर रही है जो दुर्घटना के समय सक्रिय थे। साथ ही, उस सफेद रंग की बोलेरो की तलाश तेज कर दी गई है जिसे सीसीटीवी में संदिग्ध स्थिति में देखा गया था।

पुलिस प्रशासन का कहना है कि यह केवल एक पुलिस अधिकारी की मौत नहीं है, बल्कि कानून व्यवस्था को चुनौती देने का प्रयास है। यदि यह साबित होता है कि यह एक सोची-समझी साजिश थी, तो यह जिले के इतिहास में अपराधी-पुलिस गठजोड़ या बदले की भावना से की गई सबसे बड़ी वारदातों में से एक होगी।


अगला कदम: क्या आप इस मामले में पुलिस द्वारा जारी किए गए संदिग्धों के स्केच या सीसीटीवी फुटेज के बारे में और जानकारी चाहते हैं?

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️