
श्रीगंगानगर:
राजस्थान के प्रमुख कृषि केंद्र श्रीगंगानगर की मुख्य कृषि उपज मंडी में इन दिनों व्यापारिक गतिविधियों का माहौल चरम पर है। सितंबर महीने की शुरुआत के साथ ही मंडी प्रांगण में नई फसलों, विशेषकर ग्वार और नरमे (कपास) की आवक में भारी उछाल दर्ज किया गया है। सुबह तड़के से ही आसपास के ग्रामीण इलाकों और दूर-दराज़ के ढानी क्षेत्रों से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लंबी कतारें मंडी के प्रवेश द्वारों पर लगनी शुरू हो जाती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मांग में सुधार और घरेलू स्तर पर बेहतर गुणवत्ता की फसल के कारण इस बार किसानों को अपनी उपज का आकर्षक मूल्य मिल रहा है, जिससे लंबे समय से आर्थिक तंगी का सामना कर रहे किसानों के चेहरे खिल उठे हैं।
ग्वार और नरमे के भाव में मजबूती का कारण
मंडी के वरिष्ठ व्यापारियों और आढ़तियों के अनुसार, ग्वार और नरमे के भाव में आई इस तेजी के पीछे वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर के कई व्यापारिक कारण जिम्मेदार हैं। ग्वार गम (Guar Gum) की वैश्विक मांग में पिछले कुछ हफ्तों के दौरान लगातार सुधार देखा गया है, विशेष रूप से पेट्रोलियम और क्रूड ऑयल ड्रिलिंग उद्योगों की ओर से। इसके परिणामस्वरूप ग्वार के थोक दामों में प्रति क्विंटल उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
दूसरी ओर, नरमे (कपास) की बात करें तो कपड़ा उद्योगों (Textile Mills) की ओर से गुणवत्तापूर्ण लंबे रेशे वाले नरमे की मांग में बढ़ोतरी हुई है। इस बार मानसूनी बारिश के सही समय पर होने और फसल कीटों (जैसे गुलाबी सुंडी) के प्रकोप पर प्रभावी नियंत्रण के कारण मंडी में पहुंच रही नरमे की गुणवत्ता काफी बेहतर है। इसी वजह से बोली के दौरान व्यापारी बिना किसी झिझक के ऊंचे दामों पर सौदे तय कर रहे हैं।
| फसल का नाम | औसत आवक (प्रतिदिन) | न्यूनतम भाव (₹/क्विंटल) | अधिकतम भाव (₹/क्विंटल) |
| नरमा (कपास) | 8,000 – 10,000 बोरी | ₹ 7,200 | ₹ 8,100 |
| ग्वार | 4,000 – 5,000 बोरी | ₹ 5,400 | ₹ 6,150 |
| मूंग | 2,500 – 3,000 बोरी | ₹ 6,800 | ₹ 7,600 |
पारदर्शी तौल व्यवस्था और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
आवक में अचानक हुई इस भारी बढ़ोतरी को देखते हुए श्रीगंगानगर मंडी समिति (Mandi Samiti) प्रशासन पूरी तरह से सतर्क हो गया है। मंडी परिसर में किसानों को किसी भी तरह की असुविधा न हो और उनकी फसल का उचित दाम मिले, इसके लिए कई ठोस कदम उठाए गए हैं:
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इलेक्ट्रॉनिक कांटों से तौल: तौल प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या ‘कांटा-मारी’ की शिकायत को रोकने के लिए सभी आढ़तों पर डिजिटल और प्रमाणित इलेक्ट्रॉनिक कांटों का अनिवार्य उपयोग लागू किया गया है।
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सुरक्षा एवं सीसीटीवी निगरानी: मंडी प्रांगण में किसानों की फसल और नकद भुगतान की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त गार्ड तैनात किए गए हैं। साथ ही, पूरे परिसर की निगरानी सीसीटीवी कैमरों के जरिए की जा रही है।
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यातायात प्रबंधन: मंडी के मुख्य द्वारों पर ट्रैफिक जाम की स्थिति से बचने के लिए वाहनों के आवगमन के लिए अलग-अलग मार्ग निर्धारित किए गए हैं। माल उतारने वाले क्षेत्रों (Drying Platforms) को साफ और व्यवस्थित रखा गया है।
किसानों और आढ़तियों में उत्साह का माहौल
मंडी में फसल लेकर पहुंचे किसानों का कहना है कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार शुरुआती दौर में ही बेहतर भाव मिलने से उनकी लागत आसानी से निकल रही है और मुनाफा भी हो रहा है। रायसिंहनगर क्षेत्र से आए एक किसान ने बताया कि इस बार फसल का उठाव और बोली प्रक्रिया काफी तेज गति से चल रही है, जिससे उन्हें मंडी में घंटों इंतजार नहीं करना पड़ रहा है।
व्यापारियों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में यदि मौसम अनुकूल रहा और फसल की आवक इसी तरह बनी रही, तो श्रीगंगानगर मंडी में कारोबार का एक नया रिकॉर्ड कायम होगा। इस आवक से न केवल किसानों और व्यापारियों को फायदा हो रहा है, बल्कि मंडी में कार्यरत हमालों (मजदूरों) और परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों को भी रोजगार के बेहतरीन अवसर मिल रहे हैं।